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74 वर्ष की महिला ने दिया जुड़वा बच्चियों को जन्म, जानें कैसे साकार हुआ मां बनने का सपना!

विज्ञान से सबकुछ संभव है. विज्ञान की ही देन है कि 74 वर्ष की उम्र में आंध्रप्रदेश की एक बुजुर्ग महिला ने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया है. Old age delivery case

आप कभी सोच भी सकते हैं कि 74 वर्ष की महिला बच्चे को जन्म दे सकती है. लेकिन ऐसा सच में हुआ है. यहां तक की बुजुर्ग महिला (Old age delivery case) को एक नहीं बल्कि जुड़वा बच्चे हुए हैं. आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर स्थित अस्पताल अहल्या नर्सिग होम में 74 वर्षीय एरामती मंगायम्मा (55) नामक एक महिला ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया है.

Old age delivery case

यह कहना अनुचित नहीं होगा कि विज्ञान ने असंभव को संभव कर दिया है. हालांकि यह खबर सुनकर हर कोई हैरान है. बहुत सारे लोगों को तो विश्वास ही नहीं हो रहा कि ऐसा भी संभव हो सकता है. वहीं बुजुर्ग दंपत्ति संतान सुख (Old age delivery case) पाकर बहुत ही खुश हैं.

डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व करने वाले उमाशंकर के अनुसार मां व बच्चे दोनों स्वस्थ और ठीक है. गुरुवार चार डॉक्टरों की एक टीम में सिजेरियन ऑपरेशन कर बच्चे को जन्म दिया गया है. इन व्रिटो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया के माध्यम से गर्भ धारण करने वाली मंगायम्मा ने यहां में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. महिला ने इतनी ज्यादा उम्र में बच्चे को जन्म देकर (Old age delivery case) मिसाल कायम की है.

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) से हुआ गर्भधारण

महिला ने इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया के माध्यम से गर्भ धारण किया था. गर्भधारण उन्होंने इस साल जनवरी में किया था. अब आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के नेललापतीपार्डू की रहने वाली मंगायम्मा व उनके पति वाई राजा राव (80) के घर जुड़वा बच्चों की किलकारी गूंजेगी. महिला के पति राजा राव का कहना है कि अस्पताल में नौ महीने बीत गए आज बच्चों का चेहरा देखने के बाद सारे संघर्ष भूल गया हूं।”

शादी के 54 सालों बाद बनी मां Old age delivery case

एरामती मंगायम्मा व वाई राजा राव की शादी वर्ष 1962 में हुई थी. शादी के 54 सालों वाद भी जब उन्हें कोई संतान नहीं हुआ. तब उन्होंने कई डॉक्टरों से सलाह ली. लेकिन इस बुजुर्ग दंपत्ति की ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी. लेकिन गत वर्ष जब उनके पड़ोस में रहने वाली एक 55 साल की महिला ने आईवीएफ तकनीक (कृत्रिम गर्भाधान) के माध्यम से बच्चे को जन्म (Old age delivery case) दिया.

मंगयम्मा को भी लगा की यह उपाय उनके लिए भी फलदायक हो सकता है. और फिर तो इस दंपत्ति के अंदर भी एक उम्मीयद की किरण जगने लगी. तब जाकर इन्होंने भी आईवीएफ का सहारा लेने का निर्णय लिया. पिछले वर्ष दोनों ने गुंटूर के आईवीएफ विशेषज्ञों के साथ संपर्क स्थापित किया था. इतने लंबे समय तक संतानहीन रहने वाली इस महिला के गर्भधारण के लिए डॉक्टरों ने आईवीएफ नामक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया.

आईवीएफ के बाद बरतें सावधानियां – Take precautions after IVF

पिछले साल नवंबर 2018 में वे गुंटूर के एक निजी अस्पताल में पहुंचे. वहां डॉ. शनाक्याला उमाशंकर ने इनके केस को बारीकी से समझा. उन्हें भी महिला के आईवीएफ तकनीक के अनुकूल होने की संभावना दिखी. चिकित्सक का कहना है कि मंगयम्मा को बीपी, शुगर जैसी कोई बीमारियां नहीं है.

इनकी जेनेटिक लाइन बहुत अच्छी है. अस्पताल के बाकी विशेषज्ञों ने भी इस केस को सही से स्टडी किया. महिला ने मेनोपॉज की अवस्था बहुत पहले प्राप्त कर ली थी. लेकिन आईवीएफ के माध्यम से हम उनके पीरियड्स को एक महीने में ही वापस ले आए हैं.

Old age delivery case

क्या है आईवीएफ तकनीक – What Is In Vitro Fertilisation (IVF)

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एक कृत्रिम गर्भाधान प्रक्रिया है. इसमें मानव शरीर से अलग परखनली में अंड कोशिकाओं और शुक्राणुओं का निशेचन कराया जाता है. इस प्रक्रिया में अंडे को निषेचित करने के बाद इसे महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाता है.

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अगर पुरूष का स्प र्म काउंट कम है तो आइवीएफ किया जाता है. पति या पत्नी की उम्र अगर ज्यायदा है या नेचुरल प्रेग्नेंसी के चांस कम हैं तो भी आईवीएफ प्रक्रिया से बच्चे का जन्म कराया (Old age delivery case) जा सकता है.

ये रही कुछ जरूरी बातें – Old age delivery case

बुजुर्ग महिला का पिछले एक दशक से ईलाज चल रहा था. पिछले साल उन्होंने गुंटूर की आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. सनक्कायला उमाशंकर से मिलीं थी. चिकित्सकों ने उनकी माइनर सर्जरी की और अन्य महिला का यूट्रस उनके शरीर में ट्रांसप्लांट किया. जनवरी में उन्हें सफलता मिली और मंगायम्मा के गर्भवती होने की पुष्टि हुई.

चिकित्सक कहते हैं कि मंगायम्मा 74 साल की उम्र में भी फिट हैं. उन्हें न तो डायबिटीज है और न ही हाई बीपी की समस्या. फिटनेस की वजह से ही उनका ट्रीटमेंट आसानी से हो पाया है. इलाज के दौरान दंपति को मानसिक रूप से शांत रखने के लिए कई बार काउंसलिंग भी की गई.

आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. उमाशंकर के मुताबिक बच्चियां और मां दोनों स्वस्थ हैं. बच्चियों का वजन 1.8 किलो है. मंगायम्मा बच्चों को स्तनपान कराने में असमर्थ हैं इसलिए मिल्क बैंक की मदद से बच्चियों की फीडिंग कराई जाएगी. इससे पहले अधिक उम्र में मां बनने का रिकॉर्ड राजस्थान की दलजिंदर कौर के नाम था. जिन्होंने 70 साल की उम्र में 19 अप्रैल 2016 को एक बच्चे को जन्म दिया था. #VitroFertilisation

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