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9/11 Anniversary: वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकियों ने ऐसे दिया हमले को अंजाम!

मानव समुदाय की उन्नति शांति में निहित है और इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. लेकिन फिर भी दुनिया में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो शांति में खलल डालने को तैयार बैठे रहते हैं. 9/11 Anniversary

मानव समुदाय की उन्नति शांति में निहित है और इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. लेकिन फिर भी दुनिया में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो शांति में खलल डालने को तैयार बैठे रहते हैं. विश्वयुद्धों की मार से दुनिया को निजात मिल ही रहा था कि आतंकवाद ने इसे अपने कारनामों से अशांत करना शुरू कर दिया. विकास पसंद देशों को जब इन वारदातों से गुजरना पड़ता है तो ये पीड़ादायक होता है. आज से ठीक 18 साल पहले 11 सितंबर 2001 (9/11) को अमेरिका में जो घटना हुई उसकी याद भी कंपा देती है.

ये वारदात भूलना मुश्किल!

रोज की तरह उस दिन भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (World Trade Centre) में लगभग 18 हजार कर्मचारी अपने-अपने कामों में लगे थे. लेकिन आतंकियों ने कुछ और ही प्लान कर रखा था और प्लेन से हमला बोल दिया. बता दें कि 19 आतंकियों ने 4 विमानों का अपहरण कर घटना को अंजाम दिया था. इस घटना में लगभग 3000 लोग मारे गए जो कि बड़ी विभीषिका से कम नहीं है. मरे हुए लोगों में 70 देशों के नागरिक शामिल थे, लिहाजा इसने लगभग पूरी दुनिया को ही टारगेट बनाया था. अकल्पनीय अफरातफरी का माहौल देखा गया.

आतंकियों ने 4 विमानों में से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को निशाना बनाया था. वहीं शेष दो विमानों से न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स और आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन में टकरा दिया. 11 सितम्बर 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका पर हुए इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन अल-क़ायदा ने लिया. 19 हाइजैकर्स में से 15 सऊदी अरब के थे और बाकी यूएई, इजिप्‍ट और लेबनान के रहने वाले थे. इसके बाद ही संगठन के सरगना ओसामा बिन लादेन को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए 2.5 करोड़ डॉलर का इनाम रखा गया.

राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में तो ओसामा को ढूंढ निकलना मुमकिन नहीं हो सका. लेकिन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के समय ने लादेन को अमेरिकी सैनिकों ने पाकिस्तान में ढूंढ निकाला. उसे 2 मई 2011 को सैन्य कार्रवाई कर मार गिराया गया.

बताते चलें कि दिल दहला देने वाली ये घटना शायद दुनिया कभी ना भूल पाए. आतंक के साये से दुनिया को मुक्त करने के लिए कई देश लामबंद हैं लेकिन जब तक दृढ इच्छाशक्ति से ऐसे तत्वों से निपटा नहीं जाएगा, उसका नाश सम्भव नहीं है. हम सभी नागरिकों को भी शांतिपूर्ण समाज निर्माण की दिशा में अपना योगदान देना चाहिए ताकि शांति उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके.

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