Home Health Care लीजा रे कैंसर को मात देकर ऐसे जी रही हैं खुशहाल जिंदगी!

लीजा रे कैंसर को मात देकर ऐसे जी रही हैं खुशहाल जिंदगी!

बॉलीवुड अभिनेत्री लीजा रे ने कैंसर को मात देकर नई जिंदगी जी रही हैं. कैंसर की वजह से मां नहीं बन पाने पर वह सरोगेसी से सहारे जुड़वा बेटियों की मां बनी थी. Lisa Ray Cancer

बॉलीवुड अभिनेत्री लीजा रे ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्होंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी. कैंसर जैसी घातक बीमारी (Lisa Ray Cancer) को मात देकर वह अपने परिवार के साथ खुशनुमा पल बिता रही हैं.

lisa ray

‘कसूर’ व ‘वाटर’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकी लीजा रे कनाडा की रहने वाली हैं. वर्ष 2009 में वह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का शिकार हो गई थी.

कैंसर की जंग जीतने के साथ ही वह अपने फिटनेस को लेकर काफी सतर्क हैं. इस वर्ष उनका 47वां जन्मदिन है. इतनी उम्र में भी उनकी फिटनेस व ग्लोइंग चेहरा देखकर उनकी उम्र का अंदाजा लगाना असंभव है.

लीजा को मल्टीपल माइलोमा हुआ था. यह व्हाइट ब्लड सेल्स का कैंसर (Lisa Ray Cancer) होता है. मल्टीपल माइलोमा एक रेयर कैंसर है. वर्ष 2010 में उन्होंने स्टेम सेल ट्रांसप्लांट करवाकर कैंसर से छुटकारा पाया.

उन्होंने कैंसर को हौसले से हरा दिया. जानकारी के मुताबिक करीब साल भर उनका इलाज चला था. तब जाकर वह ठीक हो पाई थी.

कैंसर से उबारने के बाद वर्ष 2015 में ‘इश्क फॉरेवर’ फिल्म से उन्होंने हिंदी फिल्मों में वापसी की थी. वहीं फिल्म ‘वीरप्पन’ में भी उन्होंने अहम भूमिका अदा की थी. उनसे जुड़ी कई कहानियां लोगों को इंस्पायर करती है.

सरोगेसी से बनी मां Lisa Ray Cancer

लीजा रे वर्ष 2018 में सरोगेसी से दो जुड़वा बेटियों की मां बनी थी. इनकी बेटियों का नाम सूफी व सोलेल है. इनके पति का नाम जेसन है. माता-पिता बनने के लिए दोनों ने सरोगेसी का सहारा लिया.

कैंसर की वजह से लीजा रे मां नहीं बन पा रही थी. तभी उन्हें सरोगेसी के सहारे मां बनान पड़ा. बेटियों को जन्म देने के बाद वह काफी खुश हुई थी. लीजा रे का कहना है कि वह अपने बच्चों को बताएंगी कि भविष्य भी महिलाओं का ही है.

अपनी खुशी का इजहार उन्होंने सोशल मीडिया पर किया था. उन्होंने बताया था कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है. जिंदगी में आने वाले बहुत सारे उतार-चढ़ाव के बाद वह इस बदलाव का भरपूर मजा ले रही हैं.

लीजा सोशल मीडिया पर हमेशा ऐक्टिव रहती हैं. इंस्टाग्राम पर आप उनकी बेटियों के साथ बहुत सारी तस्वीरें देख सकते हैं. कैंसर से जंग जीतने वाली लीज़ा अपनी उम्र से इत्तेफाक रखती हैं.

बढ़ती उम्र में अपने आउटलुक को लेकर वह काफी हद तक व्यावहारिक रवैया अपनाती हैं. उनका मानना है कि वह जैसी भी हैं, उसमें बेहद खुश और सहज हैं।

ट्रीटमेंट के बाद से कम लेती हैं डेयरी प्रोडक्ट

अभिनेत्री ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ट्रीटमेंट (Lisa Ray Cancer) के बाद से वह डेयरी प्रोडक्ट बहुत कम लेती हैं. जबकि जूस व अन्य वेजिटेरियन चीजें वह ज्यादा खाती हैं. वर्ष 2012 में लीजे ने बैंक एग्जिक्यूटिव जेसन से कैलिफोर्नियां में शादी कर ली थी.

क्या है मल्टीपल मायलोमा

मल्टिपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर (Lisa Ray Cancer) है. यह व्हाइट ब्लड सेल्स को प्रभावित करता है. व्हाइट ब्लड सेल्स हमारे शरीर के लिए जरूरी हैं क्योंकि ये बीमारियों और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है.

इसलिए मल्टिपल मायलोमा एक खतरनाक बीमारी है. क्योंकि इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से कम जाती है. मल्टीपल माइलोमा कैंसर में कोशिकाएं बोन मैरो यानि अस्थि मज्जा में एकत्रित होने लगती है.

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इन अस्वस्थ कोशिकाओं की वजह से स्वस्थ कोशिकाएं प्रभावित होती हैं. धीरे-धीरे स्वस्थ कोशिकाओं की संख्या कम होने लगती है. इस बीमारी की वजह से गुर्दे के रोगों की संभावना भी बढ़ जाती है.

मल्टिपल मायलोमा के लक्षण Lisa Ray Cancer

1. जल्दी-जल्दी संक्रमण और बुखार होना

2. वजन का तेजी से घटना

3. पीठ या पसलियों और हड्डियों में हमेशा दर्द की समस्या रहना

4. हमेशा कमजोरी व थकान महसूस होना

5. छोटी सी चोट में ही हड्डियों का टूटना

6. जी मिचलाना व भूख न लगना

7. शरीर में खून की कमी रहना

8. ज्यादा प्यास लगना

9. ज्यादा पेशाब लगना

किनको है खतरा

इस बीमारी (Lisa Ray Cancer) का खतरा सबसे ज्यादा उन लोगों को होता है जिनका वजन सामान्य से ज्यादा होता है. इसके अलावा एल्कोहल का सेवन करने वालों को भी इस बीमारी का खतरा रहता है. ज्यादातर यह बीमारी 50 साल के बाद ही होती है. लेकिन कम उम्र में भी इस बीमारी के कई मामले सामने आए हैं. इसके अलावा ये बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को ज्यादा शिकार बनाती है.

ये है इलाज की प्रक्रियाLisa Ray Cancer

मल्टीपल मायलोमा कैंसर बोन मैरो को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. इसलिए इस बीमारी की पहचान बोन मैरो की जांच, खून की जांच, लीवर और गुर्दे की सामान्य जांचों से की जाती है.

नार्मल कीमोथेरेपी के जरिए अब इस बीमारी को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. वहीं बोन मैरो ट्रांसप्लांट से इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है.

कैंसर से जीतने के बाद लीजा काफी आगे बढ़ चुकी हैं. वह कहती हैं मैं खुद क कैंसर ग्रेजुएट मानती हूं. कैंसर से गुजरने के बाद अब समय की कीमत पहले से ज्यादा समझ आने लगी है. समय सबसे अनमोल है. आज सबसे कीमती चीज समय है. #LisaRay

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