Home Education Book Fair: ज्ञान का भंडार व सबसे अच्छा मित्र भी है पुस्तक!

Book Fair: ज्ञान का भंडार व सबसे अच्छा मित्र भी है पुस्तक!

पुस्तकों का महत्व हमेशा ही रहा है और रहेगा. पर इंटरनेट के इस युग में लोगों में पुस्तक के प्रति रूचि में गिरावट आ रही है. जो कि चिंताजनक है.

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पुस्तकें हमारी दोस्त की तरह होती है. हर किसी के बचपन की शुरुआत किताबों से ही होती है. बगैर पुस्तक पढ़े कोई व्यक्ति ज्ञानी नहीं बन सकता. अच्छी पुस्तकों का हर किसी के जीवन में महत्व होता है. पुस्तक की प्रकृति ऐसी होती है जो केवल देना जानता है, लेना नहीं. बच्चों के जीवन में तो पुस्तकों का महत्व बहुत ज्यादा है.

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College Square Book Fair

इनकी जिंदगी का आधार ही पुस्तकों से तैयार होता है. किताबों को प्रेरणा का भंडार कहना अनुचित नहीं होगा. इन पुस्तकों को पढ़कर (Book Reading Habit) ही बच्चों में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा जागृत होती है.

बदली है बच्चों की गतिविधियां –

पहले के बच्चों की तुलना में अभी के बच्चों की गतिविधियों में काफी बदलाव आया है. अभी वे विभिन्न तरह की गतिविधियों से घिरे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे कई तरह के खेल व कार्यशालाओं में भी हिस्सा ले रहे हैं. जो उनके जीवन के लिए उपयोगी भी है. पढ़ाई के अलावा बाकी के कार्यों पर भी अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए बच्चों को रचनात्मक बनने की सलाह दी जाती है.

कहानी की पुस्तक पढ़ कर (Book Reading Habit) कोई भी इंसान खुद को तनाव मुक्त महसूस करता है. पर इसके लिए बचपन से ही पुस्तक पढ़ने की आदत डालना जरूरी है. अगर बच्चे को किताब पढ़ना नहीं सिखाया जाएगा. तो व्यस्क होकर भी उसे पुस्तक पढ़ कर वैसा आनंद नहीं मिलेगा.

जीवन में आसानी से सफलता पाने के लिए किताबों से दोस्ती होना जरूरी है.

विशेषज्ञों के मुताबिक किताबें पढ़ना (Book Reading Habit) तनाव से मुक्ति से सबसे बेहतर माध्यम है. मात्र 6 मिनट किताब पढ़ना किसी व्यक्ति के तनाव के स्तर को दो तिहाई से भी ज्यादा कम कर देता है.

व्यक्तित्व विकास में सहायक (Helpful in Personality Development):

किताबें पढ़ना (Book Reading Habit) किसी बच्चे के व्यक्तित्व विकास के लिए बहुत आवश्यक है. कहानियों की पुस्तक पढ़ने से बच्चे नई-नई चीजों से अवगत होते हैं. बच्चों का मस्तिष्क एक स्पंज की तरह होता है. जिसकी वजह से उनके आस-पास होने वाले तमाम क्रिया-कलापों को वे तुरंत ही सोख लेते हैं. यह अनुभव बच्चे के व्यस्क होने पर उनके लिए कारगर साबित होता है.

book fair stall

College Square Book Fair

बच्चों को अलग-अलग विषयों की पुस्तकें पढ़ने (Book Reading Habit) के लिए देना चाहिए. किताबें पढ़ने से बच्चे बगैर किसी बाधा के खुद ही अपना मनोरंजन करना सीखते हैं. कहानियों में कल्पनाएं होती है, कविताएं भाषा को रचनात्मक बनाती है, कॉमिक में चित्रों व लेखन का सुंदर ताल-मेल रहता है व शैक्षणिक लेख किसी विषय को गहराई से समझाने में सक्षम होते हैं.

ज्ञान का भंडार (Knowledge Store):

नियमित रूप से किताबें पढ़ना व्यक्ति को बुद्धिमान बनाता है. किताबे पढ़ना सिर्फ ज्ञान वृद्धि में काम नहीं आता बल्कि उक्त जानकारी को आजीवन याद रखने में भी मददगार साबित होता है. किताबें जानकारियों का भंडार होते हैं. उसे पढ़ने पर हमारे दिमाग में वह तमाम जानकारियां एकत्रित हो जाती है. हमारी जिंदगी में कभी न कभी काम आती है.

तकनीक का भी इस्तेमाल जरूरी (Use of Technology is also Important):

आज के युग में तकनीक हर किसी के जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है. हालांकि कुछ लोग इसे भटकाने का मार्ग बताते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. इंटरनेट बच्चों के लिए भी ज्ञान व मनोरंजन का मुख्य साधन है. इंटरनेट ऐसा माध्यम है जो दुनिया के हर कोने में अपनी सेवा देने तो तैयार है. किताबी ज्ञान साथ-साथ इंटरनेट का व्यवहार भी ज्ञानवर्धन करता है. यह बच्चों में कौशल वृद्धि करता है. यह बच्चों को आत्मविश्वासी भी बनाता है.

इंटरनेट के इस युग में लोगों का ध्यान किताबों की ओर खींचना भी एक चैलेंज साबित हो रहा है. वैसे तो पुस्तक मेले का आयोजन पहले भी होता था और आज भी हो रहा है. पर वो पुरानी रौनक अब इस मेले में नहीं दिखती.

college square book fair
College Square Book Fair

खासकर बच्चों के लिए पुस्तक मेले में जाना उन्हें काफी कुछ सिखाता है. अगर बच्चे इस मेले का रूख करते हैं तो उनकी पुस्तक पढ़ने के प्रति रूचि बढ़ती है. उन्हें यहां अपनी मनपसंद की तमाम किताबें मिल जाती है.

अपनी मर्जी से वे उन पुस्तकों का चयन भी कर सकते है, जिसे वे रूचि लेकर पढ़ें. यह भी कह सकते हैं कि पुस्तक मेला भी बच्चों को किताब पढ़ने के लिए प्रेरित करता है. पुस्तक मेले में बड़ों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी तमाम तरह की पुस्तकें उपलब्ध रहती है.

कॉलेज स्क्वायर पुस्तक मेला (College Square Book Fair):

इन दिनों कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर में बांग्ला नववर्ष के उपलक्ष्य में ‘नववर्ष पुस्तक उत्सव’ का आयोजन किया गया है. गत 13 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलने वाले इस पुस्तक मेले में सिर्फ बांग्ला के स्टॉल लगाये गए हैं. इसका आयोजन पब्लिसर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड की तरफ से किया गया है.

इंटरनेट का प्रभाव बखूवी इस मेले पर पड़ता दिख रहा है. इस मेले में किसी भी स्टॉल पर रौनक नहीं दिख रही क्योंकि किताबें खरीदने वाले ना के बराबर हैं. किताबें खरीदना तो दूर लोगों के अंदर पुस्तक मेले में घुमने का भी पहले की तरह उत्साह बिल्कुल नहीं है.

इंटरनेट से अछूता नहीं (Not Insulated from Internet):

कॉलेज स्ट्रीट इलाके को शिक्षा का मुख्य केंद्र कह सकते हैं. कलकत्ता विश्वविद्यालय, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय से लेकर कई नामी स्कूल कॉलेज यहां स्थित हैं. इसके अलावा पुस्तकों की दुकानों से लैस इस जगह में हर दिन चहत पहल रहती है. इसके विपरीत कॉलेज स्क्वायर में लगे इस पुस्तक मेले में जाना लोगों को नहीं भा रहा. यह नतीजा किताबों के प्रति लोगों में घटती रूचि का ही है.

हमें समझना होगा कि पुस्तकों का महत्व मानव जीवन में सदैव ही रहा है और रहेगा. आज कल बच्चे भी अपना ज्यादा वक्त इंटरनेट में ही व्यतित करना चाहते हैं. पर ऐसा गलत है. उन्हें शुरुआती दिनों से ही पुस्तक पढ़ने के प्रति प्रेरित करना हमारी जिम्मेवारी है.

empty book stall
College Square Book Fair

पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान का माध्यम –

एक पीढ़ी का ज्ञान दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में किताबें मददगार साबित होती है. किताबें किसी विचार या संस्कार के प्रचार का सबसे शक्तिशाली माध्यम है. यह मनोरंजन का साधन है. किताबें पढ़ते वक्त इंसान अकेला होता है, इसलिए मनोरंजन का आनंद गहरा हो जाता है.

क्या आप भी पुस्तक प्रेमी हैं? अगर हां तो अपने बच्चे को भी ज्ञान के इस भंडार को पढ़ने के लिए प्रेरित करें. किताबें ही हमारा सबसे अच्छा मित्र है. इस आलेख को पढ़ कर उस पर अमल भी करें और ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें. #BookReadingHabit

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