Home Health Care आत्महत्या के आंकड़े क्यों बढ़ रहे हैं?

आत्महत्या के आंकड़े क्यों बढ़ रहे हैं?

पूरे विश्व में लाखों लोगों के मौत की वजह आत्महत्या है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक विश्व में प्रति वर्ष करीब 10 लाख लोग आत्महत्या करते हैं. Prevention of Suicide

एक तरफ पूरी दुनिया में विभिन्न तरह की बीमारियों से लाखों लोगों की जानें जाती है. तो दूसरी तरफ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो खुद ही अपनी जान के दुश्मन बन आत्महत्या (Prevention of Suicide) तक कर लेते हैं. आत्महत्या, बहुत ही डरावना शब्द है. एक ऐसा शब्द जो आंखों के सामने मौत का भयावह मंजर खड़ा कर देता है.

देखा जाए तो आत्महत्या को मनचाही मौत माना जाता है. जबकि असल में आत्महत्या एक अनचाही व दर्दनाक मौत है. आत्महत्या के लिए लोग न जाने कितने रास्ते आजमाते हैं. जैसे फांसी, आग, जहर व नदी समेत अन्य रास्ते. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक पूरी दुनिया में प्रति वर्ष करीब 10 लाख लोग आत्महत्या (Prevention of Suicide) करते हैं.

वहीं औसतन 40 मिनट पर आत्महत्या की एक घटना घटती है. जबकि प्रति 3 मिनट पर इसकी कोशिश की जाती है. हर आत्महत्या की अपनी परिस्थितियां और कारण होते हैं. आत्महत्या करने वालों में महिला, पुरुष के अलावा बच्चे भी शामिल हैं. जो डिप्रेशन व तनाव के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं.

आत्महत्या के कारण – Prevention of Suicide

1. आत्महत्या (Prevention of Suicide) के मुख्य कारक मानसिक विकार, संस्कृति, पारिवारिक व सामाजिक परिस्थितियां व अनुवांशिकी हैं.

2. पारिवारिक कलह, वित्तीय कठिनाइयां, परीक्षा में असफलता, बेरोजगारी, गरीबी, बेघर होना आदि की वजह से तनाव में रहना.

3. हमेशा अवसादग्रस्तन रहना भी है आत्महत्या की वजह.

4. कोई गंभीर बीमारी, बहुत बड़ी क्षति होना या किसी अपने को खो देने का गम.

5. कुछ मेडिकल कंडिशन जैसे किसी बीमारी में ठीक होने की संभावना खत्म हो जाना.

आत्महत्या के विचार के लक्षण – Symptoms of Suicide

1. अक्सर आत्महत्या से पहले व्यक्ति इसी विषय पर बात करता है.

2. बोलचाल में जाने-अनजाने कहता है कि मैं आत्महत्या कर लूंगा. या फिर इससे तो अच्छा होता मैं मर जाता.

3. व्यक्ति खुद को बहुत ही असहाय महसूस करता है.

4. जीवन के प्रति निराशावादी विचारधारा व्यक्त करना व खुद के प्रति नफरत जताना.

5. व्यक्ति में बेचैनी, गहन हताशा या फिर हमेशा आत्महत्या (Prevention of Suicide) संबंधी चर्चा करना.

6. व्यक्ति का अक्सर आत्महत्या के तरीकों के बारे में पूछताछ करना.

7. तेज गति से कम समय में अधिकाधिक लोगों से मिलने का प्रयास करना.

8. मुलाकात के दौरान लोगों को अलविदा कहकर अंतिम मिलन का संकेत देना.

9. खाने-पीने व सोने की आदतों में बदलाव आना.

10. डायरी लिखने में अधिक समय गुजारना.

11. अपनी सबसे फेवरेट चीजों से दूर हो जाना.

12. अपनी सबसे फेवरेट चीजों से दूर हो जाना.

13. व्यवहार में चिड़चिड़ापन आना.

14. जब किसी व्यक्ति के अंदर अचानक बिना किसी कारण रोने की भावना उत्पन्न होने लगे.

15. सामाजिक रिश्ते और जिम्मेदारियों से दूर भागने लगना.

16. व्याक्ति का सुसाइड के तरीकों और कैसे किया जाता है, इसे डिसाइड करने लगना.

17. व्यक्ति में आपराधिक व्यवहार का बढ़ना.

आत्महत्या से बचाव – Prevention of Suicide

1. अगर आपके परिवार में या फिर कोई भी परिचित व्यक्ति अवसादग्रस्तह है तो उसे कभी अकेला न छोड़ें. ध्यान दें, अगर वो हमेशा चुपचाप व अकेला रहता है तो उसे भावनात्मक सपोर्ट दें.

2. ऐसे व्यक्तियों को तनावपूर्ण माहौल से दूर रखें.

3. अलगाव से बचें- यानी बाहर की दुनिया से जुड़े रहने की कोशिश करें.

4. एक्सरसाइज करने का अभ्यास डालें.

5. कोई इंसान अगर ब्रेकअप की वजह से अवसाद में है तो उसे वर्तमान रिश्तों के मूल्यों के बारे में बताएं.

इसे भी पढ़ें: आपका बच्चा डिप्रेशन का शिकार तो नहीं है? जानिए ऐसे!

6. व्यक्ति अगर अवसाद, सिंजोफ्रेनिया या अन्य किसी मानसिक विकार से ग्रसित हैं तो उसे किसी अच्छे मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाएं.

7. डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं का दवा व स्पीच थेरेपी जैसे सीबीटी (संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी) व काउंसलिंग से सफलतापूर्वक इलाज संभव है.

8. संतुलित व स्वस्थ आहार लेने के साथ-साथ रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें.

9. परिवार व मित्रों से बात करें व जीवन में हमेशा अच्छी बातों पर ध्यान दें.

10. ऐसी चीजों की तलाश करें जो आपको खुशी दे.

11. अपनी समस्या को किसी करीबी के साथ साझा करें. यह संभव ना हो तो हेल्पलाइन, पेशेवर परामर्शदाता या फिर मनोचिकित्सक से बात करें.

12. अगर परिवार के बाकी सदस्यों को इस बात की जानकारी है तो वे हमेशा व्यक्ति के साथ रहें. उसे यह जताने का प्रयास करें कि परिवार का हर सदस्य व्यक्ति से प्यार करता है.

13. अगर परिवार के बाकी सदस्यों को इस बात की जानकारी है तो वे हमेशा व्यक्ति के साथ रहें. उसे यह जताने का प्रयास करें कि परिवार का हर सदस्य व्यक्ति से प्यार करता है.

View this post on Instagram

Today is #WorldSuicidePreventionDay. Global statistics show that one person dies by suicide every 40 seconds. The fallout from suicides is absolutely devastating to everyone for a long, long time afterward. Suicides affect everyone, not just the person who ended their life. The trauma for those left behind is catastrophic. Please check in on your loved ones – even the ones who appear to be happy. The truth is that none of us can ever really know what someone else is going through deep down inside. All we can do is be there for one another, fully and deeply. If you know someone who is feeling suicidal, follow the ALAN method (swipe left for details), and help them find the right professional supports to get them through their difficult time. If you are feeling distressed right now, please remember that having thoughts of suicide is a temporary state of mind. But acting on suicidal thoughts will bring permanent, devastating consequences to you and everyone who knows and loves you. Reach out to a friend or loved one. Tell your family doctor. Speak to a psychotherapist. Call a suicide hotline. Speak to someone – anyone. Help is available. And more importantly, good professional help is effective and life saving. I know this because I reached out for help, and I'm still here because I did so. More importantly, life is so much brighter for me today as a result of having sought help when I so desperately needed it. #suicideprevention #mentalhealthawareness #depressionhelp #gethelp #psychotherapy #talktherapy #treatmentworks

A post shared by Sandy Kiaizadeh (@mindfulsolutionsclinic) on

आत्महत्या के विचार से जुड़े तथ्य – Prevention of Suicide

अगर आत्महत्या (Prevention of Suicide) के मामले में भारत की बात करें तो यहां आत्महत्या के आंकड़े काफी भयावह हैं. डब्ल्यूएचओ के अनुसार सिर्फ भारत में प्रति वर्ष करीब 1 लाख लोग आत्महत्या करते हैं. आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया की महिलाओं की सालाना आत्महत्या दर में भारत का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा है, वहीं पुरुषों की आत्महत्या का तकरीबन एक चौथाई हिस्सा है.

साथ ही आत्महत्या की दर 1990 के बाद से बहुत ही तेज़ी से बढ़ी है. इसकी रोकथाम के लिए इंडिया में एक राष्ट्रीय योजना की जरूरत है.लोगों में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने और इसके प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से डब्ल्यूएचओ ने विश्वभर में 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या निषेध दिवस की शुरुआत की थी.

डब्ल्यूएचओ के इस अभियान में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) आत्महत्या निषेध अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईएएसपी) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अमेरिका में हर साल लगभग 30 हजार लोग आत्महत्याएं करते हैं. आत्मभहत्या के ज्याादातर मामलों में मानसिक बीमारी से ग्रस्त् लोग हैं. आत्महत्या के विचार के कारणों में अवसाद, एनोरेक्सिया और मादक द्रव्यों का सेवन शामिल है.

जीवन अनमोल है और यहां हर किसी के साथ सुख-दुःख लगा रहता है. ऐसे में सिर्फ अपने दुःखों की सोचकर अवसाद में जाना व आत्महत्या की राह अपनाना मूर्खता है. इस तरह की समस्या समाधान में हमारा आलेख आपके लिए कारगर साबित होगा. आप ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें.#WorldSuicidePreventionDay

(योदादी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here