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बच्चों के लिए कितना खतरनाक है चांदीपुरा वायरस?

चमकी के बाद अब चांदीपुरा वायरस बच्चों की जान का दुश्मन बनी हुई है. यह वायरस इतना खतरनाक है कि इसका मरीज 2-3 दिनों में कोमा में चला जाता है या फिर उसकी मौत हो जाती है. Chandipura Virus Symptoms

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पिछले महीने से बच्चों के ऊपर एक के बाद एक संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कभी चमकी तो कभी चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus Symptoms) बच्चों के जान का खतरा बनी हुई है. बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार ने करीब 147 बच्चों की जान ली थी. अब चांदीपुर नामक वायरस गुजरात में अपना पैर फैला रहा है. चांदीपुरा बहुत ही खतरनाक वायरस है. जो 14 साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बना रहा है.

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यह वायरस इतना खतरनाक है कि इसकी चमेट में आने वाला बच्चा 2-3 दिनों के बाद कोमा में चला जाता है या फिर उनकी मौत हो जाती है. इस वायरस को लेकर गुजरात के स्वास्थ्य अधिकारी अलर्ट पर हैं. गुजरात के भायली गांव की रहने वाली 5 साल की बच्ची को गत 28 जून को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था. इलाज के दौरान 30 जून को उसकी मौत हो गई.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की रिपोर्ट में पुष्टि –

बच्ची का ब्लड सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजा गया था. इसकी रिपोर्ट 13 जुलाई को सौंपी गई है. जिसमें पुष्टि हुई है कि उस बच्ची की मौत चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus Symptoms) से ही हुई है.

इसके साथ ही दाहोद में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus Symptoms) इंफेक्शन के चार मामले प्रकाश में आए हैं. इन सबकी उम्र 5 से 11 वर्ष के अंदर है. इन चार में से दो बच्चों की मौत हो चुकी है जबकि दो बच्चों का इलाज चल रहा है. इससे पहले वर्ष 2014 में भी गुजरात में इसके मामले प्रकाश में आए थे. उस वक्त भी पीड़ित बच्चों की उम्र 5 से 14 साल के बीच थी.

वडोदरा के चीफ डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर डॉ उदय तिलावत का कहना है

भायली समेत अन्य इलाकों में रैपिड रिस्पॉन्स टीम की तैनाती कर दी गई है. ताकि समय रहते इस बीमारी से बचाव के उपाय किए जा सकें. इन उपायों के तहत सैंड फ्लाइज के खात्मे के लिए डस्टिंग भी शामिल है.

1. चांदीपुरा वायरस है क्या – Chandipura Virus Symptoms

चांदीपुरा (Chandipura Virus Symptoms) ऐसा खतरनाक वायरस है जो बच्चों के दिमाग में सूजन पैदा करता है. इस वायरस की वजह से बच्चों में पहले फ्लू के लक्षण नजर आते हैं और थोड़े समय में ही वे कोमा में चले जाते हैं. या फिर उनकी मौत हो जाती है.

इस वायरस का नाम महाराष्ट्र के एक गांव चांदीपुरा के नाम पर रखा गया है. वर्ष 1965 में इसी गांव में पहली बार इस वायरस से कई बच्चों के बीमार होने का मामला प्रकाश में आया था. सामान्यतः यह वायरस 14 साल से कम उम्र वाले बच्चों को अपना शिकार बनाता है.

2. चांदीपुरा फैलने की वजह –

आमतौर पर यह वायरस सैंड फ्लाई (बड़मक्खी) या मच्छरों की वजह से फैलता है. यह मक्खियों की ऐसी प्रजाति है जो रेत व कीचड़ में पाई जाती है.

बारिश के दौरान डेंगू व मलेरिया के मच्छरों की तरह इसकी संख्या में भी वृद्धि हो जाती है. मच्छरों द्वारा भी यह वायरस फैल सकता है. इसलिए मैदानी इलाकों में भी चांदीपुरा वायरस का खतरा बहुत ज्यादा रहता है.

इसको लेकर जानवरों पर भी रिसर्च किया गया था. जिसमें पता चला है कि यह वायरस रोगी के तंत्रिकाओं पर हमला करता है. इससे हुए नुकसान की वजह से व्यक्ति के दिमाग में सूजन आ जाती है.

चांदीपुरा वायरस सैंड फ्लाई या मच्छरों से फैलता है. यह रोगी के तंत्रिकाओं पर हमला करता है जिससे मरीज के दिमाग में सूजन आ जाती है-

3. लक्षणों पर रखें नजर – Chandipura Virus Symptoms

1. बुखार के साथ तेज सिर दर्द होना

2. मितली व उल्टी के साथ-साथ मरीज का बेहोश हो जाना

3. शरीर में ऐंठन महसूस करना

4. नसों में खिंचाव आना

आपको भी अगर अपने बच्चे में ये लक्षण नजर आए तो जितनी जल्दी हो सके चिकित्सक की सलाह लें. डॉक्टर के परामर्श से ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं. इस वायरस के बारे में चिकित्सक अभी ज्यादा परिचित नहीं हैं लेकिन इसके लक्षणों को देखते हुए डॉक्टर मरीज का ब्लड टेस्ट करवा सकते हैं.

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Credit: Pixabay

4. चांदीपुरा से बचाव के टिप्स – Chandipura Virus Symptoms

इस वायरस के लक्षण व इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) के लक्षण काफी हद तक समान हैं. चांदीपुरा (Chandipura Virus Symptoms) का कोई विशेष इलाज नहीं है.

क्योंकि ये वायरस बहुत ही खतरनाक है इसलिए उपर बताए गए लक्षणों को देखते हुए ही मरीज का तुरंत इलाज शुरू करें. समय पर अगर बीमारी का पता चल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है.

अन्यथा मौत का खतरा बना रहता है.इस खतरनाक वायरस से सुरक्षित रहने के लिए मच्छर व मक्खियों से बचना जरूरी है. खान-पान की स्वस्थता पर विशेष ध्यान रखें.

खासकर खुले फलों को खाने से बचें. बारिश के दौरान खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्रियों पर मक्खियां बैठती हैं. इसे खाने के बाद इंसान के अंदर उसके वायरस के फैलने की पूरी संभावना रहती है.

चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए सर्वप्रथम साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बहुत आवश्यक है. इसके साथ ही सतर्कता भी जरूरी है. क्योंकि अगर आपके बच्चे में भी इस बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो समय रहते इलाज शुरू कर दें. ताकि बच्चे की जान का खतरा ना रहे. #ChandipuraVirus

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