दीपिका पादुकोण को ऐसे मिली डिप्रेशन से मुक्ति!

    कई हिट फिल्में देने वाली दीपिका पादुकोण भी कभी डिप्रेशन की शिकार थी. उनके अंदर मौजूद खिलाड़ी ने उन्हें इस बीमारी से उबरने में सहायता किया. Tips to avoid depression

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    एक के बाद एक हिट फिल्में देने वाली दीपिका पादुकोण लंबे समय तक डिप्रेशन (Tips to avoid depression) की शिकार थी. वर्ष 2014 में डिप्रेशन ने उन्हें इस कदर अपने वश में कर लिया था कि उन्हें लगने लगा था कि जिंदगी में अब कुछ बचा नहीं है.

    Deepika Padukone

    डिप्रेशन की शिकार दीपिका मानों जिंदगी से हार मान चुकी थी. इस बात का खुलासा स्वयं दीपिका ने ही किया था. हालांकि धीरे-धीरे दीपिका डिप्रेशन से उबरीं.

    लेकिन क्या आप जानना चाहते हैं कि इससे निजात पाने के लिए दीपिका ने क्या तरीका अपनाया है. खासकर तनाव झेल रहे अन्य मरीजों के लिए इससे प्रेरणा व नई ऊर्जा मिल सकती है.

    बात करते हैं दीपिका के बीमारी की – Depression

    15 फरवरी 2014 को सुबह सो कर उठते ही दीपिका अचानक अपने आप को कमजोर महसूस करने लगीं. वर्ष 2013 की तरक्की, लोगों का प्यार व अवॉर्ड सबकुछ उन्हें बेकार लगने लगा था.

    वह हर वक्त बस रोना चाहती थी. उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. घर वालों को भी उनकी बीमारी का कुछ पता नहीं चल पा रहा था. फिर उनकी मम्मी ने दीपिका को एक काउंसलर से दिखाया.

    तब जाकर पता चला कि वह अवसादग्रस्त हैं. इस डिप्रेशन (Depressed Deepika Padukone) की एक वजह कुछ समय पहले हुई उनकी एक दोस्त की मौत भी थी. पहले तो वो इसके मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. लेकिन मां के काफी समझाने के बाद तब जाकर तैयार हुई थी.

    खेल ने बदली जिंदगी – Tips to avoid depression

    दीपिका ने कहा कि खेल ने उनकी जिंदगी बदल दी. खेल ने उन्हें दो साल तक चले अवसाद से लड़ना भी सिखाया है. दीपिका का कहना है कि डिप्रेशन से बुरी तरह ग्रस्त होने के बाद वह पूरी तरह टूट चुकी थी.

    इससे उबरने के लिए उन्हें किसी अन्य के सहारे की जरूरत नहीं पड़ी. बल्कि उनके अंदर मौजूद एथलीट से उन्हें सहायता मिली. दीपिका के अंदर मौजूद खिलाड़ी ने ही उन्हें लड़ने व हार नहीं मानने की ताकत दी.

    अवसाद से निजात पाने के लिए उन्होंने खेलों को चुना. खेल से उन्हें अंदरूनी ताकत मिली और खेल ने उनकी जिंदगी बदल दी. दीपिका का कहना है कि खेल से ही उन्हें इतनी शक्ति मिली है कि वह इस अवसाद से लड़ पाई और इस पर जीत हासिल की.

    खुद बैडमिंटन खिलाड़ी रही दीपिका ने युवाओं को कोई न कोई खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया है. खेल में इतनी ताकत है कि यह व्यक्ति को मुश्किल परिस्थितयों से लड़ने व आगे बढ़ने में मदद करती है.

    खेल की वजह से वह हमेशा वास्तविकता के करीब रहीं. खेल ने उन्हें जमीन से जोड़े रखा, विनम्रता खिसाई. उनके अंदर हमेशा मौजूद रहने वाली खिलाड़ी से ही उन्हें ताकत मिलती है.

    दीपिका ने कहा कि अवसाद (Tips to avoid depression) में डूबने के दौरान वह लगभग हार मान चुकी थी. लेकिन उनके अंदर मौजूद खिलाड़ी ने उन्हें लड़ने व कभी हार न मानने की ताकत दी.

    सही इलाज व सकारात्मक नजरिए की बदौलत अब मैं पहले वाली दीपिका हूं.

    काम आई पिता की 3 सीख – Tips to avoid depression

    जब दीपिका बड़ी हो रही थी तो उनके पिता ने दीपिका से कहा था कि बेस्ट होने के लिए 3 ‘डी’ याद रखना–डिसीप्लिन, डेडिकेशन व डिटरमिनेशन. अपने दिल की बात सुनिए. वही कीजिए, जो जुनून हो.

    Deepika Padukone

    अभिनेत्री खुद एक बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं. उन्होंने फेसबुक के माध्यम से युवाओं को कोई न कोई खेल के लिए प्रोत्साहित किया था.

    क्या है डिप्रेशन – Tips to avoid depression

    डिप्रेशन (Tips to avoid depression) शब्द सुनने में बहुत छोटा लगता है. लेकिन यह बहुत घातक बीमारी है. यह कब खतरनाक रूप धारण कर लेता है किसी को पता नहीं चलता. यह ऐसी बीमारी है जिसके शुरुआती लक्षणों से पता नहीं चलता कि व्यक्ति अवसादग्रस्त है.

    अगर आप ध्यान दें तो धीरे-धीरे आपके हाव-भाव बदलने लगते हैं. आपको नॉर्मल जैसा एहसास होगा लेकिन एक समय के बाद कुछ नॉर्मल नहीं रहता. बल्कि व्यक्ति के शरीर व दिमाग के बीच का तालमेल बिगड़ने लगता है.

    आज की व्यस्त जिंदगी में डिप्रेशन लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. इसकी कोई उम्र नहीं होती. बच्चे, युवा व बुजुर्ग कोई भी डिप्रेशन का शिकार हो रहा है. इसके कई सारी वजहें है.

    जैसे बच्चों को पढ़ाई व नौकरी की चिंता, बड़ों घर-परिवार, स्वास्थ्य व नौकरी की चिंता रहती है. तनाव की वजह से मन अशान्त, भावना स्थिर व शरीर अस्वस्थता का अनुभव करता है. इससे हमारा शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होती है.

    मरीज को पता नहीं चलता कि वह डिप्रेशन में है!

    दीपिका कहती हैं कि डिप्रेशन (Depressed Deepika Padukone) ऐसी बीमारी है जिससे मरीज स्वयं अनभिज्ञ रहता है. इसमें इंसान दूसरों की नहीं बल्कि अपनी सोच से ही बीमारी होता है.

    देश में 36-40 फीसदी लोग अवसाद को कलंक मानकर स्वयं ही हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं. ऐसे लोगों की भलाई के लिए ही दीपिका ने डिप्रेशन व इससे बाहर आने के दौर को सामने लाने का फैसला किया था.

    लक्षण – Tips to avoid depression

    1. अवसादग्रस्त लोगों में अधिक होती है थकान

    दिमागी हालत सही नहीं होने पर शरीर को संभालना मुश्किल होता है. या फिर यह भी कह सकते हैं कि शरीर को संभाल ही नहीं पाएंगे. यही वजह है कि डिप्रेशन के शिकार लोग सामान्य लोगों की तुलना में अधिक थकान महसूस करते हैं.

    2. नींद की अनियमितता

    डिप्रेशन के शिकार लोगों में नींद की अनियमितता देखी जाती है. यानी ऐसे में कुछ लोगों को ज्यादा नींद आती है तो कुछ को कम.

    3. शरीर में दर्द

    ज्यादा तनाव होने पर व्यक्ति के शरीर में दर्द होना शुरू हो जाता है. शरीर के अलावा सिर में भी तेज दर्द की शिकायत रहती है.

    4. एकाग्रता की कमी व चिड़चिड़ापन

    अवसाद के दौरान इंसान में एकाग्रता की कमी देखी जाती है. बातों को भूलने की भी समस्या होती है. ऐसे व्यक्ति में चिड़चिड़ापन भी देखने को मिलता है.

    5. बात-बात पर गुस्सा व डर लगना

    अवसादग्रस्त इंसान काफी तनाव से गुजरता है. उसे बात-बात में गुस्सा आता है. इसके अलावा उसके अंदर डर की भावना भी घर कर जाती है. उसे अंधेरे, बंद कमरे, उंचाई व अनजान लोगों से भी डर लगता है.

    6. हर वक्त मन में बुरे ख्याल आना

    डिप्रेशन के शिकार लोगों को हमेशा बुरे ख्याल आते रहते हैं. यहां तक व्यक्ति अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की जान लेने की भी सोचता है.

    इन उपायों को अपनाएं अवसाद से मिलेगी मुक्ति

    1. रोजाना करें व्यायाम

    व्यायाम अवसाद को दूर करने का सबसे बेहतर तरीका है. व्यायाम से अच्छी सेहत के अलावा शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इससे शरीर में सेरोटोनिन व टेस्टोस्टेरोन हारमोंस का स्त्राव होने से दिमाग स्थिर रहता है.

    2. आत्मिक जागरूकता है जरूरी

    समय की मांग के अनुसार खुद को तैयार रखना जरूरी होता है. स्थिति की मांग के अनुसार आत्म जागरूकता की कमी के कारण लोग अवसादग्रस्त हो जाते हैं.

    3. नियमित छुट्टियां लेकर आराम करें

    खुद को अवसादग्रस्त महसूस करने पर कहीं छुट्टियां मनाने चले जाएं. ऐसा करने पर आप बहुत जल्दी तनाव मुक्त महसूस करेंगे. इस तरह के टूर नकारात्मक विचारों को दूर करने में मदद करती है.

    4. सहायता की मांग करें

    जब आप किसी समस्या में पड़े हों तो इससे बाहर निकलने के लिए किसी अपने से सहायता मांगे. विपरीत परिस्थितियों में अगर आप किसी से सहायता लेते हैं तो आपको भावनात्मक बोझ से छुकारा मिलेगी.

    5. नौकरी छोड़ना भी होगा कारगर

    कई बार ऐसा होता है कि लोग अपनी नौकरी को लेकर भी चिंतित रहते हैं. और उन्हें समझ नहीं आता कि क्या किया जाए. अगर आप भी अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हैं तो इसे छोड़ने से आपको मानसिक शांति मिलेगी.

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    6. नकारात्मक लोगों से दूरी बनाए रखें

    आप अगर नकारात्मक लोगों से दूर रहेंगे तो आपको मानसिक शांति मिलने में मदद मिलेगी. क्योंकि नकारात्मक लोगों के साथ रहने पर वह आपको और ज्यादा बीमार कर देंगे.

    7. अकेला रहने से बचें

    अक्सर ऐसा होता है कि अवसादग्रस्त लोग आस-पास के लोगों से दूरी बनाए रखना चाहते हैं. लेकिन यह गलत है. अगर आप लोगों के बीच रहते हैं तो नकारात्मक विचारों को दूर करने में मदद मिलेगी.

    8. सिर्फ आज के लिए जीना सीखें

    जो पल बीत गया और जो आने वाला है उसकी चिंता करने से कोई फायदा नहीं. इसलिए अपने आज पर फोकस करते हुए उसे बेहतर तरीके से जीएं.

    9. संगीत भी है तनाव दूर करने का बेहतर साधन

    खराब मूड को ठीक करने के लिए संगीत बहुत ही बेहतर साधन है. क्योंकि यह बहुत जल्दी काम करता है.

    10. मनोचिकित्सक को दिखाएं

    एक सबसे बेहतर उपाय यह है कि आप डिप्रेशन को दूर करने के लिए मनोचिकित्सक को दिखाएं. इनकी सहायता से आपको इस बीमारी से बचने में काफी हद तक सहायता मिलेगी.

    > डिप्रेशन को समाज में मानते हैं कलंक

    मानसिक बीमारी को भारत में 47 फीसद लोग कलंक की नजर से देखते हैं. इस श्रेणी के लोग मानसिक रोगियों के बारे में गलत धारणा बना लेते हैं.

    ये लोग अवसादग्रस्त लोगों के साथ सहानुभूति तो रखते हैं लेकिन लेकिन उनसे एक सुरक्षित दूरी भी बनाए रखते हैं. इसके विपरीत 87 फीसद लोग इसे गंभीर बीमारियों से जोड़ते हैं. इस तरह के लोगों की ज्यादा संख्या मुंबई, कोलकाता व हैदराबाद में है.

    ‘द लिव लव लाफ फाउंडेशन’ की तरफ से जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार मानसिक बीमारी वाले मरीज हमेशा लोगों से डरे हुए रहते हैं.

    इस रिपोर्ट की मानें तो 60 फीसद लोगों का मानना है कि डिप्रेशन की सही वजह आत्म अनुशासन व इच्छाशक्ति की कमी है.

    26 फीसद लोग ऐसे होते हैं जो मानसिक बीमारी वाले लोगों से डरे हुए होते हैं. ऐसे लोग मानसिक रोगी के निकट जाना पसंद नहीं करते. ऐसी मानसिकता वाले लोग ज्यादातर बैंगलुरू व पुणे में देखने को मिलते हैं.

    27 फीसद लोगों को ऐसा विश्वास रहता है कि कोई भी व्यक्ति मानसिक रोग से ग्रसित हो सकता है. इसलिए उनके लिए भेद-भाव की भावना नहीं रहती. ऐसे लोगा कानपुर, दिल्ली व पटना में अधिक मिलते हैं. #DeepikaPadukone

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