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परीक्षा की तैयारी के दौरान बच्चे इन 10 तरीकों को अपनाएंगे तो मिलेगी सफलता!

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प्रतियोगिता के इस युग में हर अभिभावक यह चाहते हैं कि उनका बच्चा सबसे बेहतर करे. सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में वह बच्चे से टॉप होने की उम्मीद रखते हैं. जहां तक पढ़ाई में अव्वल आने की बात है तो उसके लिए सही नियम का अनुसरण करना जरूरी है. अगर बच्चा नियम के तहत अपने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करे तो उसे सफलता जरूर मिलेगी. इसके लिए सिर्फ परीक्षा के दौरान ही पढ़ाई (exam preparation) करना काफी नहीं बल्कि पूरे साल मन लगाकर पढ़ाई करनी पड़ती है.

यहां हम कुछ ऐसे विषयों से आपको अवगत करा रहे हैं जिसे अपनाकर आपका बच्चा बेहतर रिजल्ट ला सकता है –

ध्यान लगाकर पढना जरूरी है. source: lindamoodbell

1. सबसे पहले पढ़ाई के लिए सही टाइम टेबल बनाना:

किसी कार्य को शुरू करने से पहले अगर उसके लिए एक टाइम टेबल निर्धारित किया जाता है तो वह काम सही वक्त पर पूरा होता है. पर जरूरी है कि इन नियमों को रोजाना फॉलो किया जाए. समय बहुत अनमोल है और विद्यार्थी अगर अपने टाइम-टेबल के अनुसार पढ़ाई करते हैं तो उनका भविष्य जरूर उज्ज्वल होगा. बच्चों के पढ़ाई के टाइम टेबल में पढ़ने के साथ लिखने का समय भी समय निर्धारित किया जाए क्योंकि पढ़ने के साथ-साथ लिखना भी जरूरी है. परीक्षा में तो लिखे हुए उत्तर पर ही नंबर मिलते हैं. इस तरह लिखते रहने से लिखने की स्पीड भी बढ़ती है और लिखावट भी सुंदर होता है. साथ ही पढ़ी हुई चीजों को लिखने से वह याद भी रहता है.

2. स्कूल के साथ घर पर भी नियमित रूप से पढ़ाई करना:

रोजाना स्कूल जाना व कक्षा में शिक्षक द्वारा पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम को ध्यान से सुनना जरूरी है. अगर क्लास में रहते हुए बच्चे का ध्यान कहीं और रहे तो यह भी गलत है. ऐसे में तो उसका क्लास में रहना और ना रहना बराबर है. अगर बच्चे स्कूल में किसी पाठ्यक्रम को पढ़ते हैं और उसे फिर घर व ट्यूशन में भी दोहराते हैं तो उस विषय को समझने में बेहद आसानी होती है और वह पाठ अच्छे से याद भी रहता है. इसलिए घर व ट्यूशन के साथ स्कूल में भी ध्यान से पढ़ाई करना महत्वपूर्ण है.

स्कूल के साथ-साथ घर पर भी रोजाना पढ़ाई करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना रोजाना खाना खाना. सिर्फ परीक्षा के दौरान दिन-रात एक करके पढ़ाई करना व स्वास्थ्य खराब करने से अच्छा है नियमित रूप से पढ़ाई करना. नियम के अनुसार रोजाना पढ़ाई करने से कोई भी विषय आसान हो जाता है.

स्कूल के साथ-साथ घर पर भी रोजाना पढ़ाई करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना रोजाना खाना खाना. सिर्फ परीक्षा के दौरान दिन-रात एक करके पढ़ाई करना व स्वास्थ्य खराब करने से अच्छा है नियमित रूप से पढ़ाई करना. नियम के अनुसार रोजाना पढ़ाई करने से कोई भी विषय आसान हो जाता है.

3. दोस्तों के साथ समय-समय पर अपनी स्टडी संबंधी विचार-विमर्श करना:

कहा जाता है ना कि कठिन से कठिन काम को भी अगर ग्रुप में मिलकर किया जाए तो वह काम बहुत जल्दी और आसानी से हो जाता है. इसी तरह ग्रुप बनाकर पढ़ने से भी बच्चे के लिए पाठ्यक्रम को समझना व याद रखना आसान हो जाता है. जानकारियों को साझा करके पढ़ने से बच्चों के अंदर एक दूसरे के प्रति सहायता की भावना उजागर होती है. पढ़ाई करते हुए बच्चे की किसी विषय में जानकारी अधूरी तो नहीं रह गई है, इसकी जांच के लिए अपने दोस्तों के साथ अपने पाठ्यक्रम से संबंधित विचार-विमर्श करते रहना बेहद जरूरी है. कई बार ऐसा होता कि हम कुछ भूल रहे होते हैं या किसी पाठ के बारे में हमारे पास पूरी जानकारी नहीं है लेकिन मेरे क्लास के साथी को वो याद रहता है तो उससे सहायता मिल जाती है.

ग्रुप बनाकर पढ़ना अच्छा अभ्यास होता है. source: istockphoto

4. रोजाना सुबह उठकर पढ़ने की आदत डालना:

सुबह का वक्त पढ़ाई के लिए सबसे सही माना जाता है क्योंकि सुबह के वक्त आस-पास का माहौल एकदम शांत रहता है. शांत माहौल में पढ़ी हुई चीजें जल्दी याद हो जाती है. पर परीक्षा के दौरान या फिर बाकी दिनों में भी अगर आप सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करते हैं तो फिर देर रात तक पढ़ाई करने की आदत में सुधार लाना होगा. अगर बच्चे देर रात तक पढ़ाई करें और फिर सुबह भी जल्दी उठ कर पढ़ने बैठे तो उसकी नींद पूरी नहीं होगी जिसका असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ेगा जिससे उसके बीमार होने की संभावना रहेगा. तो इस बात पर जरूर ध्यान रखें कि सुबह जल्दी उठना है तो फिर आप रात को जल्दी सोने की आदत डालें.

5. स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्क रहना:

पढ़ाई करने वाले बच्चे का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिस्क का विकास होता है. अगर मस्तिस्क स्वस्थ रहता है तो पढ़ी हुई चीजें जल्दी समझ आती है तो याद भी जल्दी होता है. साफ कहें तो स्वस्थ रहने पर इंसान की सोचने समझने की क्षमता अधिक विकसित होती है. इसलिए स्वस्थ रहने के पौष्टिक खाने के साथ-साथ रोजाना सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना व टहलना सेहत के लिए लाभदायक होता है. इसलिए पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है कि बच्चा पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ पर भी ध्यान दें.

6. पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रहना:

इस अत्याधुनिक युग में बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी मोबाइल फोन, फेसबुक और वाट्सऐप की लत लग चुकी है. इसके बिना मानो इनका जीना ही मुश्किल हो गया हो. इन सबकी बुरी आदतों का प्रभाव बच्चे की स्टडी पर पड़ता है. जिन बच्चों को इन सब चीजों की आदत लग जाती है उनका ध्यान पढ़ाई करते वक्त भी इन सभी चीजों पर ही रहता है और पढ़ाई करते हुए बीच-बीच में वे इसका इस्तेमाल भी करते रहते हैं. ऐसे में इनका ध्यान पढ़ाई पर स्थित नहीं रह पाता जिसकी वजह से बच्चा पढ़ी हुई चीजों को जल्दी भूल जाता है. इसलिए पढ़ाई के दौरान उनका ध्यान इधर-उधर भटकने के बजाय सिर्फ पुस्तक पर ही होनी चाहिए.

परामर्श हमेशा काम आता है. source: indianexpress

7. शिक्षक व सीनियर से परामर्श लेना:

बच्चे को पढ़ाई से लेकर सफलता पाने तक की जो अवधि होती है वह सबसे महत्वपूर्ण है. इस दौरान बच्चा सही रास्ते पर चल रहा है या गलत इसकी पहचान के लिए एक तो शिक्षक की अहम भूमिका होती है. शिक्षक के साथ-साथ बच्चों को समय-समय पर अपने से बड़ों की भी सलाह लेनी चाहिए. यह जानना बेहद जरूरी होता है कि परीक्षा के तनाव में कहीं बच्चे से कुछ भूल तो नहीं हो रही है. इसलिए अपनी पढ़ाई से संबंधी जानकारियां बड़ों के साथ भी साझा करनी चाहिए और अवश्य ही उनकी तरफ से सही मार्गदर्शन प्राप्त होगा.

8. परीक्षा के दौरान तनाव मुक्त रहना:

आप बखूबी जानते होंगे और अनुभव भी किया होगा कि टेंशन में किया गया कोई भी काम सही नहीं होता और इस तरह टेंशन में किए गए काम से सिर्फ समय की बर्बादी होती है. अधिकांशतः ऐसा देखा जाता है कि बच्चे परीक्षा को लेकर टेंशन में रहते हैं. उनके दिमाग में परीक्षा को लेकर तरह-तरह सवाल उठते रहते हैं कि पता नहीं प्रश्नपत्र कैसा होगा? क्या-क्या सवाल पूछे जाएंगे? मैं सभी के उत्तर दे पाउंगा या नहीं? अगर नहीं दिया तो नंबर अच्छे नहीं आएंगे जैसे और भी कई सवाल. बार-बार यह सोचने से उसका दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है और वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्श नहीं कर पाते हैं. विद्यार्थियों के लिए सबसे बेहतर सुझाव यह है कि वे टेंशन लिए बगैर अपना ध्यान सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई पर केंद्रित करें तो जरूर अच्छे नंबर आएंगे.

9. सभी विषयों पर ध्यान केंद्रित करना:

विद्यार्थी जब नई कक्षा में प्रवेश करते हैं तो शुरू से ही उन्हें अपने पूरे विषय पर ध्यान केंद्रित करके पढ़ाई करनी चाहिए. पुस्तक के हर चैप्टर को पढ़ने की कोशिश करनी चाहिए ना कि सिर्फ आगे से चैप्टर को क्योंकि परीक्षा के दौरान प्रश्न तो पूरे पुस्तक से ही पूछे जाते हैं. तो ऐसा ना हो क प्रश्न देखने के बाद बच्चे को पछतावा हो कि अरे मैनें तो सिर्फ आगे के चैप्टर को पढ़ा था और यह प्रश्न तो पुस्तक के पीछे के चैप्टर से दिया गया है. ऐसे बच्चा सभी प्रश्नों के जवाब देने में असमर्थ होता है जिससे नंबर अचछे नहीं आते हैं. तो इसलिए आपको पूरी पुस्तक पढ़नी चाहिए.

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रोज क्लास अटेंड करना चाहिए. source: indianexpress

10. क्लास में रोज प्रजेंट होना:

आपने देखा है कि कई बच्चों की रोजाना क्लास ऐब्सेंट करने की आदत होती है. वे स्कूली पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते. उनका मानना होता है कि वे अपना कोर्स अपने घर पर और ट्यूशन में पूरा कर लेंगे और यही सोच कर वे रोजाना स्कूल आने से बचते हैं. पर उन्हें यह नहीं मालूम कि स्कूल जाना बेहद जरूरी है क्योंकि जो चीजें हमें स्कूल में पढ़ाई जाती है उसे हम घर पर और फिर ट्यूशन में भी दोहराएंगे तो उस पाठ को समझना आसान हो जाता है और वह जल्दी याद भी होता है.

"जागो, उठो और तबतक न रुको जब तक लक्ष्य न मिल जाए." Click To Tweet

इस प्रकार आपने देखा कि जरा सा ध्यान रखने से बच्चे अच्छी तरह पढ़ाई कर सकेंगे. ऐसा करने से न केवल बेहतर रिजल्ट कर पाएंगे बल्कि इन्हें आदतों में शामिल कर लेने से आगे की राह और भी आसान हो जाएगी.

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