Home Annex धरती को बचाए रखना मानव समाज के लिए चुनौतीपूर्ण!

धरती को बचाए रखना मानव समाज के लिए चुनौतीपूर्ण!

सृष्टि का आधार पर्यावरण से ही जीवन संभव है. इसकी सुरक्षा के लिए किसी एक विशेष दिन नहीं बल्कि हर दिन चिंतन करना चाहिए.

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पर्यावरण ही सृष्टि का आधार है और इसी से हमारा जीवन है. पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है. पर्यावरण का दायरा बहुत विस्तृत है. इसलिए इसकी रक्षा के लिए साल में एक विशेष दिन का होना ही काफी नहीं है. बल्कि हमें रोजाना इसकी सुरक्षा की ओर ध्यान देना होगा.

आज मानव प्रकृति को नष्ट करने के लिए तमाम तरह के क्रियाकलाप को अंजाम दे रहा है. विश्व पर्यावरण दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा उत्सव है. जीवन और पर्यावरण के बीच अटूट संबंध है. बावजूद इसके पर्यावरण की रक्षा हेतु किसी एक विशेष दिन का पालन किया जाता है. जो कि चिंताजनक विषय है.

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकृति को समर्पित विशेष दिन है. वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉकहोम (स्वीडन) में पूरे विश्व के देशों का पहला सम्मेलन आयोजित किया था. सम्मेलन में कुल 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य हुआ. यहीं से संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की शुरुआत हुई.

पर्यावरण संरक्षण को प्रेरित करना जरूरी

साथ ही प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस (World Environment Day) का आयोजन कर लोगों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निर्णय लिया गया. इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता लाते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करना था.

पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इस सम्मेलन में पर्यावरण की दयनीय स्थिति व लोगों के भविष्य पर प्रभाव पर व्याख्यान दिया था. पर्यावरण रक्षा की दिशा में यह भारत का शुरूआती कदम था. इसके बाद से ही प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) का पालन किया जाने लगा.

19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम क लागू किया गया. पर्यावरण के अंतर्गत जल, वायु, भूमि इन तीनों से संबंधित कारक व मानव, पौधे, सूक्ष्म जीव के अलावा अन्य जीवित पदार्थ आदि शामिल हैं.

पर्यावरण बिगड़ने के प्रमुख कारण

वृक्षों की कटाई और वायु प्रदूषण:

इंसान अपनी जिंदगी को आरामदायक बनाने के लिए रोजाना हरे-भरे वृक्षों की कटाई करता जा रहा है. इसका नतीजा बिल्कुल हमारे सामने है. जैसे अनियमित बारिश व तपती धरती है. जंगलों की कटाई कर उद्योग लगाए जाने से स्वच्छ हवा नहीं मिल रही. सांस लेने के लिए ताजी हवा नहीं बल्कि प्रदूषित वायु ग्रहण करना पड़ रहा है. जिसकी वजह से हम कई तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं.

जल प्रदूषण के ये रहे कारण

सभी जानते हैं कि जल ही जीवन है बावजूद इसके हम इसे महत्व नहीं दे रहे. यहां तक की गंगा जैसी शुद्ध व पवित्र नदी को भी प्रदूषित करने से बाज नहीं आ रहे. गंगा के प्रदूषित होने के कई कारण हैं. कभी धर्म, कभी सफाई तो कभी मन्यताओं के नाम पर इसमें गंदगी फैलाई जा रही है. जिसकी सफाई करना भी सरकार के लिए एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आता है.

ध्वनि प्रदूषण (Sound Pollution):

हमारे चारों तरफ घर से लेकर बाहर तक ध्वनि प्रदूषण फैला हुआ है. शहरों में वाहनों की आवाज, घरों में इलेक्ट्रोनिक्स सामान व समारोह में बजने वाले बाजों की वजह से हमने प्रकृति की मधुर ध्वनि को खो दिया है. यह ध्वनि प्रदूषण विभिन्न प्रकार के मानसिक रोग व शारीरिक विकृतियों का कारण है. ध्वनि प्रदूषण से सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि अन्य जीव-जंतु भी प्रभावित हैं.

भूमि प्रदूषण (Earth Pollution):

जंगलों का नष्ट होना, खदानें, भू-क्षरण व कीटनाशक दवाओं के ज्यादा प्रयोग ने भूमि को प्रदूषित कर दिया है. खेती व अन्य कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोग पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अधिकांश कीटनाशकों को विषैला घोषित किया है. बावजूद इसके हम इन कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं.

ऐसे बचाएं प्रकृति को –

वृक्षरोपण (Planting):

  • प्रकृति का महत्व समझें व धरती के सौंदर्य हरियाली को बचाए रखने का प्रण लें. अगर संभव हो तो अपने आस-पास वृक्ष लगाएं. साथ ही पहले से लगे पौधों को संरक्षित रखने का संकल्प लें.
  • अपने यादगार पलों को चिरस्थाई बनाने के लिए भी आप पौधारोपण कर सकते हैं. जैसे आपका या बच्चे का जन्मदिन हो या शादी का सालगिरह उस खास दिन को यादगार बनाने के लिए पौधा लगाया जा सकता है.
  • सड़कें या घर बनाते समय वृक्षों की कटाई की जाती है. इसे करने से बचना भी प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी पहल होगी.
  • पेड़-पौधे हरियाली देते हैं, तापमान कम करते हैं, पानी की भी व्यवस्था करते हैं. जिससे जिंदगी में प्रसन्नता बनी रहती है. इसलिए अगर आपके घर व आंगन में थोड़ी सी भी जगह हो तो वहां पेड़-पौधे लगाने की कोशिश करें.

पानी का संरक्षण करें –

  • पानी का हर बूंद कीमती है. इसका संरक्षण करना तो सभी का कर्तव्य होना चाहिए.
  • नहाने के लिए शॉवर की जगह बाल्टी का प्रयोग करें.
  • अगर आपको कहीं सार्वजनिक नलों से पानी बेवजह बहता हुआ दिखे तो उसे बंद कर दें.
  • ब्रश करते समय ध्यान रखें कि कहीं नल खुला ना रहे.
  • आंगन व फर्स को धोने के बजाय उसकी पोंछा लगाकर सफाई करें.
  • घर में पोंछा लगाने के बाद उस पानी यूं ही नहीं फेकें बल्कि उसे गमलों व पौधों में डाल दें.
  • बर्तन धोते वक्त पानी की बर्बादी रोकें. यानी पानी का इस्तेमाल किफायत से करें.
  • दाल, चावल, सब्जी धुले हुए पानी को इकट्ठा कर उसे गमलों व क्यारियों में डाल दें.
  • बहुत बार ऐसा देखा जाता है कि लोगों के घरों में नल से पानी टपकता रहता है. इस तरह बूंद-बूंद करके भी पानी की बर्बादी होती है इसलिए इसे रोकें.

बिजली का उपयोग –

  • आप घर पर रहें या फिर ऑफिस में बिजली की फिजूल खर्ची बिल्कुल ना करें. जितनी जरूरत हो उतना ही इस्तेमाल करें.
  • जब भी आप कमरे से बाहर जा रहें हों तो पंखें व लाइर्ट जरूर बंद कर दें.
  • एक ही कमरे में एसी व टीवी का प्रयोग करें.
  • विद्युतीय उपकरणों का समय-समय से रख रखाव करें.

चिंतन जरूरी –

वैसे तो पर्यावरण संरक्षण (World Environment Day) के लिए विश्व स्तर पर विभिन्न तरह के कदम उठाये जा रहे हैं. लेकिन हमलोगों को भी चिंतन करने की जरूरत है कि क्या ईश्वर के इस प्राकृतिक उपहार के मूल स्वरूप को बरकरार रहने दिया है. आपको उत्तर मिलेगी नहीं. अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए इंसान प्राकृतिक संसाधनों को लगातार नष्ट करने में जुटा है.

जिसका खामियाजा हम सभी भुगत रहे हैं. अभी से भी अगर हम पर्यावरण क प्रति जागरूक हो जाएं तो भविष्य के खतरों को नियंत्रित किया जा सकता है. क्या आप हमारे विचारों से सहमत हैं? तो अपने अनुभव को ‘योदादी’ के साथ कमेंट कर जरूर शेयर करें. #WorldEnvironmentDay

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