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बच्चे की आंखों के लिए ये आहार देना बेहद जरूरी होता है!

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आंख शरीर का वह अहम व नाजुक हिस्सा है जिसके बिना जीना मुश्किल है, पर आजकल के खानपान की वजह से बड़ों के साथ-साथ बच्चे भी आंखों में होने वाली विभिन्न तरह की बीमारियों का सामना कर रहे हैं. वर्तमान लाइफ स्टाइल का ही नतीजा है कि लोगों में आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

एक जमाना था जब चश्मा सिर्फ बुजुर्ग लोग ही लगाया करते थे. या फिर यूं कहें कि आंख कमजोर हो जाने की वजह से उनके लिए चश्मा लगाना जरूरी होता था लेकिन अभी तो स्थिति ऐसी है कि छोटे-छोटे बच्चे को भी चश्मे की जरूरत पड़ने लगी है. आपके बच्चे में भी अगर नेत्र रोग के लक्षण नजर आए तो बगैर देरी किए इस बारे में किसी डॉक्टर से सलाह लें.

आंखों में होने वाले मुख्य रोगों में रतौंधी, रेटिनोपेथी, मायोपिया, लेजी ई सिंड्रोम, भैंगापन आदि मुख्य हैं.

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नेत्र रोग के ये हैं लक्षण:

आंखों में जलन और सिर में दर्द होना भी आंखों में होने वाली किसी बीमारी का लक्षण हो सकता है और यह नेत्र रोग के शुरुआती लक्षण हैं. शुरू में अगर इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है तो धीरे-धीरे यह बच्चे की आंखों की रोशनी भी छीन सकती है.

यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि किसी बीमारी के शुरुआती दौर में ही अगर उसकी इलाज शुरू कर दी जाए तो उस पर नियंत्रण करना संभव होता है, पर अगर किसी बीमारी के प्रति आप लापरवाह होते हैं तो फिर धीरे-धीरे वह गंभीर रूप धारण कर लेती है.

अभिभावकों का फर्ज बनता है कि वे बच्चे की हर हरकत पर ध्यान रखें. शुरुआती दौर से ही अगर बच्चे पर निगरानी की जाती है तो उसे बहुत सारी बीमारियों से बचाना संभव हो सकता है. आपको अगर बच्चे की आंखों के कमजोर होने का जरा-सा भी एहसास हो तो ऐसे में बगैर देरी किए तुरंत इसकी जांच करवाएं.

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टीवी व मोबाइल भी करता है आंखों को प्रभावित

एक शोध के अनुसार आंखों के लिए सबसे ज्यादा घातक टीवी, मोबाइल फोन व लैपटॉप आदि हैं. जहां तक हो सके बच्चे को इससे दूर ही रखना चाहिए क्योंकि ज्यादा देर तक इससे चिपके रहने की वजह से बच्चे के आंखे इससे झेल नहीं पाती. जिसके परिणामस्वरूप उन्हें आंखों की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

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आंखों के लिए जरूरी विटामिन

  • विटामिन ए

आप अपने बच्चे की डाइट में विटामिन ‘ए’ की भरपूर मात्रा वाली चीजों को शामिल करते हैं तो बच्चे को नेत्र रोग से बचाना काफी हद तक संभव हो सकता है. इसका कारण यह है कि विटामिन ‘ए’ रेटिना पर पड़ने वाली रोशनी को नर्व सिग्नल में बदल देता है. जिससे बच्चे की आखों की रोशनी खराब नहीं होती.

अगर किसी बच्चे के शरीर में विटामिन ए की कमी है तो उसका असर आंखों पर पड़ता है. बच्चे को अंधेरे में साफ-साफ नहीं दिखना विटामिन ‘ए’ की कमी का मुख्य लक्षण है.

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  • ये चीजें खिलाएं

विटामन ‘ए’ की कमी को पूरा करने के लिए अपने बच्चे के आहार में गाजर व दूध को अवश्य शामिल करें. इससे अलावा हरी सब्जियों में भी विटामिन ‘ए’ की भरपूर मात्रा रहती है.

  • विटामिन ‘ई’ और ‘सी’

बच्चों के लिए विटामिन ‘ई’ और ‘सी’ दोनों ही बेहद लाभदायक सिद्ध होते हैं. यह जानना जरूरी होगा कि विटामिन ‘ई’ और ‘सी’ की कमी के कारण मोतियाबिंद जैसे रोग के होने की संभावना रहती है. पर अगर सावधानी पूर्वक बच्चे के आहार में विटामिन ‘ई’ और ‘सी’ को शामिल नहीं किया जाता है तो यही रोग गंभीर रूप धारण कर लेता है और फिर इससे बच्चे की आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा बना रहता है. बेहतर होगा बच्चे के आहार में सभी विटामिन को शामिल किया जाए ताकि उसका डाइट एकदम स्वस्थ हो.

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  • ये चीजें खिलाएं

विटामिन ‘ई’ और ‘सी’ की कमी को पूरा करने के लिए बच्चों के आहार संतरा, गोभी, सूरजमुखी के बीज, बादाम, बटर, पनीर आदि को शामिल करना बेहतर होगा. बच्चे को विटामिन से भरपूर खाना खिलाना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है. विटामिन से भरपूर चीजें खाने पर बच्चे में रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है और बच्चा किसी भी बीमारी का सामना करने को तैयार रहता है. बीमारी से दूर रहने पर बच्चे की जिंदगी भी खुशहाल रहती है.

जरूरी बातें

जब बच्चा पढ़ाई कर रहा हो तो अभिभावक को यह ध्यान रखने की जरूरत है कि बच्चा बिल्कुल किताब में घुसकर तो पढ़ाई नहीं कर रहा है. अगर ऐसा है तो बच्चे को किताब कितनी दूरी पर रखकर पढ़ना है इसकी जानकारी दें क्योंकि किताब को बिल्कुल आंखों के करीब रखकर पढ़ने से इसका बुरा असर पड़ता है और इससे बच्चे की आंखें कमजोर हो सकती है. इसके अलावा बच्चे को बचपन में मैदान में खेलने को प्रेरित करें क्योंकि हरी घासों पर खेलना आंखों के लिए बहुत लाभदायक होते हैं.

आंखों के कमजोर होने का एक कारण अनुवांशिकता भी हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार माता या पिता में से किसी एक को भी अगर नेत्र संबंधी रोग है कि बच्चे में भी इस बीमारी के होने की संभावना रहती है. आंखों में होने वाला मायोपिया रोग अनुवांशिक है और यह रोग माता-पिता से बच्चों में आ सकता है. मायोपिया आंखों में होने वाला ऐसा रोग है जिससे दूर की चीजें ठीक से दिखाई नहीं देती. इसके विपरीत इंसान को पास की चीजें बहुत साफ दिखाई देती है. बच्चे की आंखों का समय-समय पर जांच करवाना भी सबसे बेहतर उपाय है.

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