परिश्रम का कोई दूसरा विकल्प नहीं, जानिए मजदूर दिवस का इतिहास!

    मजदूर वर्ग समाज की महत्वपूर्ण इकाई है. हम सबका फर्ज बनता है कि मेहनतकशों की जीत का सभी सम्मान करना चाहिए.

    मजदूर का मतलब सिर्फ खेती करने वाला या धूप में पसीना बहाने वाला ही नहीं होता. मजदूर मतलब हर वह इंसान जो किसी कंपनी के लिए काम करता है. मजदूर मतलब सिर्फ गरीब नहीं बल्कि यह वह शब्द है जो देश व समाज की हर सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसकी परिभाषा कुछ भी हो सकती है. चाहे वो खेतों में या इमारत निर्माण करने का काम करता हो या फिर किसी दफ्तर में ही कार्यरत हो सकता है.

    Labour Day
    International Labour Day । source: sch

    सीधा उदाहरण यही है कि हर वह व्यक्ति जो किसी कंपनी के लिए काम करके उसके बदले मजदूरी लेता है. वह मजदूर है. मजदूर ही हैं जो समाज को मजबूत व परिपक्व बनाता है. यही समाज को सफलता की ओर ले जाता है. इन्ही श्रमिकों व मजदूरों के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (International Labour Day) या मई दिवस का पालन किया जाता है. यह पूरे विश्व के मेहनतकशों की जीत का दिवस है.

    क्या है श्रमिक दिवस –


    अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत (International Labour Day) लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा किया गया था। इसका पालन इंडिया में पहली बार मद्रास (चेन्नई) में 1 मई 1923 को हुआ था. भारत में आजादी के पहले इस आयोजन में पहली बार लाल झंडे का उपयोग किया गया था. इस पार्टी के मुख्य लीडर सिंगारावेलु चेत्तिअर थे. उन्होंने मजदूर दिवस का पालन करने के लिए दो जगह कार्यक्रम का आयोजन किया था.

    कार्यक्रम (Program):

    पहला कार्यक्रम ट्रिपलीकेन बीच व दूसरा मद्रास हाईकोर्ट के सामने वाले बीच में आयोजित हुई थी. सिंगारावेलु ने भारत सरकार के समक्ष एक आवेदन रखा था। जिसमें 1 मई को मजदूर दिवस (International Labour Day) घोषित करने के साथ ही इस दिन नेशनल होलिडे रखा जाए. इस दिन राजनीतिक पार्टियों को अहिंसावादी होने पर बल दिया गया था.

    1 मई को मजदूर दिवस (International Labour Day) पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय तौर पर मनाया जाता है. यूरोप में इसे पारंपरिक तौर पर बसंत की छुट्टी घोषित किया जा चुका है. दुनिया के करीब 80 देशों में इस दिन नेशनल होलीडे घोषित है. बहुत सारी जगह इस दिवस का पालन करने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. मजदूर दिवस अमेरिका व कनाडा में सितंबर महीने के प्रथम सोमवार को होता है.

    इतिहास (History):

    पहले श्रमिक वर्ग से रोजाना 10-16 घंटे काम करवाया जाता था. एक इतनी ज्यादा देर तक काम लिया जाता था। फिर मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान भी नहीं रखा जाता था. काम के दौरान मजदूरों को चोटें आती थी. कई बार वे बुरी तरह जख्मी होते थे और उनकी मौत तक हो जाती थी. इस तरह काम करते वक्त घटी दुर्घटनाओं में बच्चे, महिलाएं समेत पुरुषों के मौत की संख्या में तेजी से वृद्धि होने लगी थी.

    majdoor divas samaroh
    International Labour Day । source: wp

    ऐसी नकारात्मक परिस्थितियों को देखते हुए ही 1 मई 1986 में अमेरिका के तमाम मजदूर संघ एक हो गए. फिर इन लोगों ने मोर्चा खोला. इन लोगों ने साथ मिलकर अपने अधिकारों की लड़ाई शुरू की. परिस्थिती के खिलाफ इन लोगों का विरोध प्रदर्शन आरंभ हो गया था. फिर अपनी मांगों को लेकर इन लोगों ने हड़ताल आरंभ किया. जिसमें इन लोगों ने 8 घंटे से अधिक काम नहीं करने की मांग रखी. इसके लिए मजदूरों ने हड़ताल शुरू किया.

    “कठोर परिश्रम का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता”

    बम विस्फोट (Bomb explosion):

    हड़ताल चलने के दौरान ही 4 मई को शिकागो के हेमार्केट में बम ब्लास्ट हुआ था. परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थी. जिसमें 7 मजदूरों की मौत हो गई थी. जबकि 100 से ज्यादा लोग जख्मी होते हैं.

    हड़ताल चलने के दौरान ही 4 मई को शिकागो के हेमार्केट में बम ब्लास्ट हुआ था. परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थी. जिसमें 7 मजदूरों की मौत हो गई थी. जबकि 100 से ज्यादा लोग जख्मी होते हैं.

    इसके बाद ही वर्ष 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में घोषणा हुई थी कि हेमार्केट नरसंघार में मारे गए निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस(International Labour Day) का पालन किया जाएगा. इस दिन सभी श्रमिकों व कामगारों का अवकाश होगा. अमेरिका में तो इस विरोध का जल्दी परिणाम नहीं मिला.

    जबकि कर्मचारियों व स्वयंसेवी संगठनों की पहल से कुछ ही दिनों बाद भारत समेत अन्य देशों में यह 8 घंटे वाली पद्धति शुरू हो गई थी. भारत में मजदूर दिवस की शुरूआत चेन्नई में 1 मई 1923 से हुई थी. तब इस दिवस को वहां मद्रास दिवस के तौर पर मनाया जाता था.

    may day

    International Labour Day । source: ohioaflcio

    समारोह (Ceremony):

    वर्ष 1960 में बम्बई को भाषा के आधार पर 2 भागों में विभाजित किया गया था. गुजरात व महाराष्ट्र को इसी दिन (1 मई) को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिला था. इसलिए मई दिवस के दिन महाराष्ट्र व गुजरात में महाराष्ट्र दिवस व गुजरात दिवस के रूप में मनाया जाता है.

    मजदूर दिवस के अवसर पर पूरी दुनिया मजदूर वर्ग की भावना को समझकर खुशी मनाते हैं. मजदूर को छोटा व गरीब समझना बहुत बड़ी भूल है. मजदूर वर्ग समाज की महत्वपूर्ण इकाई है.

    असंगठित क्षेत्र (Unorganized sector):

    भारत में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति आज भी दयनीय है. इस क्षेत्र के मजदूर अभी भी 12 से 14 घंटे मजदूरी करने को मजबूर हैं. उनकी मजदूरी भी तय नहीं है. उन्हें सही मेहनताना भी नहीं मिलता. इनकी स्थिति ऐसी है कि जिस दिन वह काम पर नहीं जाएंगें उस दिन उन्हें भूखे ही सोना पड़ता है.विडंबना यह है कि मजदूरों के सैकड़ों संगठन मौजूद हैं. पर इनकी तुलना में विश्व के पूंजीपति एकजुट हैं.

    भारत में करीब 11 संगठन ऐसे हैं जिन्हें केंद्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है. इन यूनियनों का दावा मजदूरों की भलाई करना है. पर सच्चाई ऐसी बिल्कुल भी नहीं है. मजदूर दिवस के अवसर पर भी कुछ कार्यक्रमों को छोड़ दें तो सामाजिक स्तर पर हो या मीडिया में अब मजदूर दिवस पर नाम मात्र की चर्चा होती है.

    May Day
    International Labour Day । source: ytimg

    याद रखें (Remember):

    हमें मजदूरों के संघर्ष को कभी भूलना नहीं चाहिए. उनके आंदोलन की बदौलत ही आज हम 8 घंटे के सीमित काम का सुख भोग रहे हैं. आज का दिन मेहनतकशों की जीत का दिन है. इस दिन को सदैव याद रखना ही हमारा फर्ज है.

    क्या आपको नहीं लगता कि अंसगठित क्षेत्र के मजदूरों को भी सही मेहनताना मिले? संगठित क्षेत्र के मजदूरों की तुलना में उनके और अधिक घंटे ही काम लिया जाता है. तो फिर उन्हें सही मजदूरी मिलने का अधिकार है या नहीं? अगर आप मेरे विचार से सहमत हैं तो ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें. #InternationalLabourDay

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