Home Annex दूरसंचार के विकास में इंटरनेट की कितनी भूमिका है?

दूरसंचार के विकास में इंटरनेट की कितनी भूमिका है?

इंटरनेट के बिना मानों जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती. ज्ञान का भंडार यह माध्यम जन-जन के लिए लाभकारी है. देश की प्रगति में भी इसकी अहम भूमिका है.

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आज के युग में इंटरनेट ही हमारी तमाम समस्याओं का समाधान है. अभी लोगों की पहली प्राथमिकता इंटरनेट व मोबाइल फोन ही है. ऐसा कहना अनुचित नहीं होगा कि इसके बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल है. इसका दबदबा इतना ज्यादा है कि इसने इंसान के प्रोफेशनल जीवन से लेकर व्यक्तिगत जीवन तक पर अपना कब्जा कर लिया है.

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World Telecommunication Day । source: jagranimages

मोबाइल व इंटरनेट से हर किसी की जिंदगी आसान हो गई है. पहले किसी के साथ संपर्क साधने के लिए हमें कितनी मशक्कत करनी पड़ती थी. तब जाकर कहीं संपर्क स्थापित होने में सफलता हाथ लगती थी. यह दूरसंचार क्रांति ही है जिसन भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. इस क्रांति की वजह से ही आज भारत विकासशील देशों की श्रेणी में शामिल है. इसकी गिनती विश्व के उन देशों में होती है जिनकी अर्थव्यवस्था रफ्तार पर है.

इंटरनेट से आसान हुई जिंदगी:

इंटरनेट ऐसा माध्यम है जिसकी सहायता से हम पलक झपकते ही असंख्या जानकारियां हासिल कर लेते हैं. यह भी कह सकते हैं कि इंटरनेट मतलब सबकुछ. यानी कोई ऐसी जानकारी नहीं है जो यहां नहीं मिलती. देश-विदेश के हर क्षेत्र से जुड़ी तमाम जानकारियां इंटरनेट पर उपलब्ध है. यह नौकरीपेशा, घरेलु व विद्यार्थी हर किसी के लिए जानकारियों का भंडार है. यह ऐसा माध्यम है जहां से हर वर्ग, हर उम्र के लोगों को तमाम तरह की जानकारिंया हासिल होती है.

वर्तमान में इंटरनेट तक अपनी पहुंच रखने वाले लोगों की जिंदगी में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है. यह लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने में कारगर सिद्ध हुआ है. हर किसी तक तमाम जानकारियां देने का हकदार गूगल सर्च इंजन को जाता है. इंटरनेट सिर्फ सूचनाओं का ही माध्यम नहीं है.

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बल्कि इससे बैंकिंग, ई-शॉपिंग व सोशल नेटवर्किंग से लेकर स्टॉक एक्सचेंज तक के कार्यों में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. इसने दूरियों को समेट कर लोगों को एक दूसरे के काफी करीब लाकर खड़ा किया है. गूगल के ई-मेल, चैटिंग, वीडियो और वॉयस चैटिंग आदि से हजारों किलो मीटर की दूरियां सिमटकर अब चंद फासले में बदल गई है. यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.

क्रांतिकारी परिवर्तन (Radical Change):

दूरसंचार के मामले में इंडिया काफी आगे निकल चुका है. थ्री-जी और फोर-जी तकनीक की सहायका से आज हमारा देश तीव्र गति से विकास की ओर बढ़ रहा है. हमारे शहरी क्षेत्र तो विकासशील है ही यहां के ग्रामीण अंचल भी तकनीक के मामले में प्रगति पर हैं. तकनीकी मामले में लोग यहां भी परिपूर्ण होते जा रहा हैं.

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World Telecommunication Day । source: himachalabhiabhi

भारत का किसान भी बड़ी तेजी से हाइटेक हो रहा है. खेती करते वक्त किसी तरह की असुविधा होने पर उनहें इंटरनेट के माध्यम से फसल संबंधी तमाम जानकारी मिल रही है. इंडिया इस क्रांति को अपने आने वाले दिनों में जारी रखने की पूरी तैयारी में है. अपनी इस प्रगति को नई ऊंचाई देने के लिए इस क्षेत्र में लगातार प्रयास भी जारी है.

चुनौतियां (Challenges):

इंटरनेट का क्षेत्र बहुत ही व्यापक है और ऐसे में इसके लिए अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रखा सबसे बड़ी चुनौती है. एक तरफ को इंटरनेट ने मानव जीवन को सरल बना दिया है लेकिन इसके विपरीत इंटरनेट का लोगों पर नकारात्मक प्रभाव भी काफी ज्यादा पड़ रहा है. देश की प्रगति के साथ-साथ यह हमारे समाज को दूषित करने का भी काम कर रही है.

पर ऐसे में हम इस सूचना क्रांति के विरुद्ध नहीं जा सकते. इंटरनेट पर अच्छी चीजों के साथ-साथ बूरी चीजें भी है. ये तो व्यक्ति की समझदारी पर निर्भर करती है कि वो इसकी अच्छाई को अपनाएगा या बुराई को. इसलिए इसका दुरुपयोग नहीं बल्कि सदुपयोग करना सीखें. तभी आप उन्नति की राह पर अग्रसर होंगे.

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इंटरनेट के सामने साइबर क्राइम भी बहुत बड़ी चुनौती है. इसकी आड़ में लोग अफवाहें फैलाकर देश में साइबर युद्ध फैलाने तक की कोशिश करते हैं. ध्यान दें तो इन सब नकारात्मक चीजों के बावजूद भी भारत की प्रगति में इस इंटरनेट का अहम योगदान है.

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World Telecommunication Day । source: bmc

विश्व दूरसंचार दिवस (World Telecommunication Day):

‘विश्व दूरसंचार दिवस’ (World Telecommunication Day) को मनाने की पंरपरा ‘17 मई 1865’ से शुरू हुई थी लेकिन आधुनिक युग में इसकी शुरुआत 1969 में हुई है. जानकारी के मुताबिक टर्की में नवंबर 2006 में पूर्णाधिकारी में आयोजित सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि विश्व दूरसंचार व सूचना व सोसायटी दिवस तीनों का पालन एक साथ किया जाए.

टेलीफोन का इतिहास (History of Telephone):

वर्ष 1880 में ‘द ओरिएंटल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड’ और ‘एंग्लो इंडियन टेलीफोन कंपनी लिमिटेड’ ने भारत सरकार से यहां टेलीफोन एक्सचेंज की स्थापना करने की अनुमित मांगी थी. इस अनुमति को इसलिए अस्वीकृत कर दिया गया था कि टेलीफोन की स्थापना करना सरकार का एकाधिकार था व सरकार स्वयं इस काम को शुरू करेगी.

हालांकि उसके बाद वर्ष 1881 में सरकार ने अपने पिछले फैसले के खिलाफ जाकर ‘द ओरिएंटल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड’ को कोलकाता, मुंबई, मद्रास व अहमदाबाद में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने का लाइसेंस दिया था. जिसके बाद देश में पहली औपचारिक टेलीफोन सेवा की स्थापना वर्ष 1881 में हुई.

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इंडिया में टेलीफोन के इतिहास में 28 जनवरी 1882 को ‘रेड लेटर डे’ कहा जाता है. भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल काउंसिल के सदस्य मेजर ई. बैरिंग ने कोलकाता, मुंबई व चेन्नई में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने की घोषणा की थी.

मुंबई में भी टेलीफोन एक्सचेंज (Telephone Exchange in Mumbai):

कोलकाता के एक्सचेंज का नाम केंद्रीय एक्सचेंज था. इसे काउंसिल हाउस स्ट्रीट इमारत की तीसरी मंजिल पर खोला गया था. केंद्रीय टेलीफोन एक्सचेंज के 93 ग्राहक थे. वर्ष 1882 में मुंबई में भी इसी तरह के टेलीफोन एक्सचेंज का उद्घाटन किया गया.

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World Telecommunication Day । source: jagranimages

हर समस्या का एक समाधान इंटरनेट. इसके बगैर तो प्रगति की कल्पना ही नहीं की जा सकती. अगर आप अपनी सद्बुद्धि का व्यवहार करें तो अवश्य ही यह आपके लिए सिर्फ और सिर्फ फायदेमंद होगा. कहते हैं ना कि हर इंसान में अच्छाई व बुराई दोनों गुण होते हैं. जो ज्ञानी व्यक्ति होता है वह उन गुणों को हासिल करता है लेकिन इसके विपरीत एक अज्ञानी इंसान उन बुराइयों को अपनाता है.

सीधी सी बात है कि आप इसे कैसे व्यवहार करते हैं. इसका व्यवहार जैसे करेंगे उसका परिणाम भी वैसा ही मिलेगा. आप भी जरूर इंटरनेट की सेवा का लाभ उठाते होंगे? इस ज्ञान के भंडार का सदुपयोग करना सीखें दुरुपयोग नहीं. इंटरनेट से मिले अपने अनुभवों को आप हमारे साथ ‘योदादी’ के माध्यम से कमेंट कर जरूर शेयर करें. #WorldTelecommunicationDay

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