Jagannath Rath Yatra 2019: यहां जानिए रथयात्रा से जुड़े रोचक तथ्य!

    बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि रथ यात्रा (Rath Yatra) के लिए निर्मित होने वाले रथों में किसी तरह की धातु का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. जानिए और भी रोचक तथ्य -

    ओडिसा के सबसे प्रसिद्ध त्योहार रथ यात्रा (Rath Yatra) इस बार 4 जुलाई को है. इसका भव्य आयोजन सिर्फ ओडिसा में ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किया जाता है.

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    इस त्योहार को हर जगह बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस भव्य आयोजन में हिस्सा लेने के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु ओडिसा के पुरी पहुंचते हैं.

    यात्रा (Rath Yatra) में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के लिए अलग-अलग तीन रथ होते हैं. शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए इनकी यह शोभा यात्रा निकलती है. इस भ्रमण के दौरान देवता अपनी मौसी के घर जाते हैं. इसके बाद 8वें दिन ये सभी अपने पुनः अपने घर की ओर प्रस्थान करते हैं.

    रथयात्रा से जुड़ी खास बातें –

    बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि रथ यात्रा (Rath Yatra) के लिए निर्मित होने वाले रथों में किसी तरह की धातु का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. इन रथो का नर्माण तीन प्रकार की पवित्र व परिपक्व लकड़ियों से किया जाता है.

    रथ निर्माण के लिए शुभ पेड़ की पहचान की जाती है. लड़कियों के पहचान करने की प्रक्रिया लंबी है. क्योंकि इन तीन रथों के लिए काष्ठ का चयन बसंत पंचमी के दिन से शुरू किया जाता है. वहीं रथ का निर्माण कार्य अक्षय तृतीया से शुरू किया जाता है.

    इन तीनों से भगवान जगन्नाथ के रथ का आकार सबसे बड़ा होता है. 16 पहियों के इस रथ में 832 लकड़ी के टुकड़े का इस्तेमाल होता है. इनके रथ का रंग लाल व पीला होता है. यात्रा के दौरान इनका रथ सबसे पीछे होता है.

    जानें क्यों एकांतवास में रहते हैं जगन्नाथ –

    इस रथयात्रा (Rath Yatra) का शुभारंभ ज्येष्ठ महीने में हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि स्नान करने के कारण भगवान जगन्नाथ, उनके भाई व बहन तीनों बीमार पड़ गए थे. जिसके बाद उन्हें एकांतवास में रखा गया था. इनके एकांतवास में रहने के दौरान मंदिर में कोई पूजा नहीं की जाती.

    15 दिनों तक एकांतवास में रहने के बाद तीनों भाई-बहनों का श्रृंगार किया जाता है. उसी दिन उन्हें नेत्रदान किया जाता है. इस कार्यक्रम के अगले दिन रथ निकाली जाती है. ऐसी मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान तीनों रथों के दर्शन करने मात्र से ही भक्तों के तमाम दुःख दूर हो जाते हैं.

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    अब जानते हैं कहां-कहां निकाली जाती है रथयात्रा –

    1. मथुरा में निकलती है भव्य रथयात्रा – Rath Yatra

    भगवान जगन्नाथ को कृष्ण का अवतार माना जाता है. श्री कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा है इसलिए मथुरा में भी बड़े धूमधाम के साथ यह उत्सव मनाया जाता है. वृंदावन के जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा निकाली जाती है. यहां भगवान जगन्नाथ चांदी के रथ पर सवार होकर यात्रा के लिए निकलते हैं.

    2. बनारस की रथयात्रा –

    शिव की नगरी बनारस में भी रथयात्रा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है. यहां भी काफी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं.

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    3. अहमदाबाद में भव्य रथयात्रा का आयोजन – Rath Yatra

    गुजरात के अहमदाबाद की रथयात्रा (Rath Yatra) भी काफी प्रसिद्ध है. यहां की रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई व बहन के साथ सरसपुर रणछोड़दास मंदिर तक जाते हैं. यहां संतों से जत्थे के साथ-साथ आम भक्तजनों की भी भारी भीड़ उमड़ती है.

    4. पश्चिम बंगाल में भी भव्य रथयात्रा –

    ओडिसा के पुरी की ही तरह पश्चिम बंगाल में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है.

    5. असम की जगन्नाथ रथयात्रा –

    असम में निकाली जाने वाली भव्य रथयात्रा में फूलों की वर्षा की जाती है. यह भी कहा जा सकता है कि भक्त अपने भगवान का स्वागत फूलों की वर्षा से करते हैं. रथ के सामने नृत्य करने वाले भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है.

    6. हैदराबाद व जम्मू में भी प्रचलित है रथयात्रा – Rath Yatra

    हैदराबाद में रथयात्रा का आयोजन इस्कॉन द्वारा किया जाता है. वहीं जम्मू को मंदिरों के शहर के रूप में जाना जाता है. यहां भी रथयात्रा का आयोजन किया जाता है. हैदराबाद व जम्मू दोनों जगह यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.

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    देश के साथ विदेशों में निकाली जाती है रथयात्रा –

    राजधानी दिल्ली, उज्जैन, इंदौर व मध्यप्रदेश के भोपाल में भी जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती है. इसके अलावा विदेशों में यह त्योहार काफी प्रचलित है. जैसे लंदन, सेन फ्रांसिस्को व बांग्लादेश में भी भक्तजन इस यात्रा का आयोजन करते हैं.

    रथयात्रा से जुड़े रोचक तथ्य –

    1. भगवान जगन्नाथ के रथ पर हनुमान जी व नृसिंह का प्रतिक चिन्ह होता है. यह स्तंभ रथ की रक्षा का प्रतिक है.

    2. इनके रथ के कई नाम हैं जैसे गरुड़ध्वज, कपिध्वज व नंदीघोष है. जबकि रथ के सारथी का नाम दारुक है.

    3. यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे पीछे होता है.

    4. जगन्नाथ के रथ का रंग लाल व पीला होता है.

    5. रथ की ध्वजा त्रिलोक्यवाहिनी कही जाती है. रथ को खींची जाने वाली रस्सी का नाम शंखचूड़ कहा जाता है.

    यहां हमने विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की है. उम्मीद है आपको पसंद आई होगी. आप भी इस उत्सव को सेलीब्रेट करें व अपने अनुभव को ‘योदादी’ के माध्यम से कमेंट कर जरूर साझा करें. #HappyRathYatra

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