Home Education खेल-खेल में ऐसे बच्चों को दे सकते हैं एडुकेशन!

खेल-खेल में ऐसे बच्चों को दे सकते हैं एडुकेशन!

हर बच्चे को खेलना बेहद पसंद होता है और आप अपने बच्चे को खेल-खेल में ही उसे इस प्रकार बहुत सारी जानकारियां दे सकते हैं.

बचपन में हर किसी का दिमागी विकास तेजी से होता है. यह वो उम्र होती है जब बच्चों के अंदर किसी भी बात को जानने व सीखने की जिज्ञासा होती है. इस उम्र में उन्हें जो कुछ भी सिखाया जाता है, जो भी जानकारियां दी जाती है उसे वे हमेशा याद रखते हैं. भविष्य में वह चीजें उपयोगी सिद्ध होती है. अब यह माता-पिता पर निर्भर करता है कि वो अपने बच्चे के साथ कितनी जानकारियां साझा कर रहे हैं. छोटे बच्चे जब भी किसी चीज को देखते हैं तो वे उसके बारे में जानना चाहता है जैसे वो चीज क्या है, इसकी उपयोगिता क्या है. वे इस बारे में सवाल पूछते हैं. तब आपका बच्चे के हर सवाल का जवाब देना बेहद महत्वपूर्ण होता है.

ध्यान रखें बच्चा जब भी कोई सवाल करे तो उसका जवाब अवश्य दें ना कि उसे टाल-मटोल करें. बच्चे को डांट कर शांत कर दें क्योंकि ऐसा करना बिल्कुल गलत है. माता-पिता ही बच्चे के असली गुरु होते हैं और बच्चे अपने अभिभावक से घर पर ही बहुत कुछ सीखते हैं. इसके लिए अलग से वक्त निकालने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती. बच्चे रोजाना की जीवनचर्या से ही बहुत सारा ज्ञान अर्जन कर लेते हैं, जो उनके दिमागी विकास में बेहद कारगर सिद्ध होता है. एक बच्चे के विकास के लिए हर दिन कीमती होता है और वह एक दिन में ही बहुत सारी जानकारियां हासिल करता है.

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हर बच्चे को खेलना बेहद पसंद होता है और आप अपने बच्चे को खेल-खेल में ही उसे इस प्रकार बहुत सारी जानकारियां दे सकते हैं:

बच्चे के साथ सही भाषा का प्रयोग

बच्चे के साथ सही भाषा का प्रयोग करना बेहद जरूरी है. आप अपने बच्चों में सबके साथ आप करके बातें करने की आदत जरूर डालें क्योंकि बचपन में ही इनमें संस्कारों का भी विकास होना बेहद महत्वपूर्ण है. बच्चों को यह सीखाना तब और आसान हो जाएगा जब आप अपने उपर भी इसे लागू करेंगे. यानी आप भी अपने बच्चे के साथ आप करके ही बातें करें तो यह बेहद प्रभावी सिद्ध होगा क्योंकि बच्चा जो देखता उसे वह जल्दी सीखता है.

सही खिलौनों का चयन

सही खिलौनों का चयन (एजुकेशनल टॉय) करने से बच्चे खेलते हुए बहुत कुछ सीख सकते हैं. आज कल बहुत सारे एजुकेशनल टॉय उपलब्ध भी हैं जिससे बच्चे खेलने के साथ ही ज्ञान भी अर्जन करते हैं. खिलौने तो हर बच्चे की पसंद है. खिलौना देखते ही उनके चेहरे पर खुशी खिल उठती है और अगर उस खिलौने से बच्चा ज्ञान भी अर्जन करे तो यह और भी बेहतर है.

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ध्यान रहे कि हम ऐसे खिलौने का चयन करें जो बच्चे को सोचने-समझने पर मजबूर करे. जब बच्चे सोचेंगे तभी उनका मस्तिस्क विकास करेगा। बच्चों के खिलौने ऐसे होने चाहिए जो उन्हें विकास और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने वाले क्षेत्र में उन्नत करे. ऐसे खिलौनो से बचना चाहिए जो बच्चे को काल्पनिक ज्ञान देने पर बल दे. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा ऐक्टिव हो और उसका निरंतर मानसिक विकास हो तो खिलौनो का चयन सोच-समझकर करना उचित होगा. खिलौनों से भी बच्चे रंग की पहचान, हिंदी व अंग्रेजी के स्पेलिंग के साथ-साथ गणित का भी ज्ञान अर्जन करते हैं.

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बच्चों को खिलौना देते वक्त यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि खिलौना सिर्फ उनका मनोरंजन करने मात्र के लिए ना हो बल्कि वह बच्चे में स्वस्थ और प्रतिस्पर्धात्मकता का भी प्रवाह करे. वहीं अगर बच्चे परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ खेलते हैं तो बच्चे में एक-दूसरे के प्रति सहयोग की भावना विकसित होती है. खेलना हर बच्चे को पसंद है और जब बच्चे दोस्तों के साथ खेलते हैं तो जरूरी नहीं कि हर बच्चे के पास खेलने की हर चीजें उपलब्ध हो तो ऐसे में वे खेलते वक्त अपनी चीजें साझा करना सीखते हैं. सिर्फ यही नहीं, कई खेल ऐसे होते हैं जो बच्चे की रचनात्मक शक्ति को बढ़ाने में भी मदद करते हैं.

किताबी ज्ञान भी आवश्यक

खिलौने के साथ-साथ बच्चों के लिए किताबी ज्ञान भी आवश्यक होता है और आप अपने बच्चे के साथ ऐसी किताबें व मैग्जीन साझा करें जिसे आप भी बच्चे के साथ पढ़ पाएं. जहां तक वीडियो गेम व कम्प्यूटर गेम की बात है तो अपने बच्चे को जहां तक संभव हो उससे दूर रखना ही बेहतर है. यह ऐसा माध्यम है जो बच्चों में अकेला रहने, हिंसा व जातीयता की भावना को विकसित करता है. इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित दायरे में करना ही सही होगा.

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आप जब भी अपने बच्चे के लिए खिलौना लेते हैं तो आपके मन में सबसे पहले यही बात आएगी कि कौन सा खिलौना मेरे बच्चे को ज्यादा खुशी देगा. पर बच्चे को खिलौना देते वक्त यह जरूर ध्यान रखें कि वह खिलौना नुकिला ना हो जिससे खेलते वक्त बच्चे के जख्मी होने की संभावनाएं रहे. बच्चे को खिलौना देकर बिल्कुल निश्चिंत ना हो जाएं बल्कि उस पर ध्यान रखें कि वह खिलौने का कैसे व्यवहार कर रहा है और कितने समय तक खेल रहा है.

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खिलौना खरीदते वक्त इसका ध्यान रखें कि वह खिलौना मानसिक गतिविधि के साथ-साथ शारीरिक सक्रियता को बढ़ाने में भी सहयोगी हो. ध्यान रखें कि खिलौने से आपका बच्चा क्या सीखेगा, शारीरिक और मानसिक रूप से उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा. खिलौने के साथ-साथ आपका अपने बच्चे के साथ अधिक से अधिक समय बिताना ज्यादा अच्छा रहेगा और वही उसे एक अच्छा इंसान बनने में मदद करेगा.

आज के बच्चे मोबाइल व्यवहार करना पसंद करते हैं लेकिन ये उपकरण बच्चों को किताबी ज्ञान से मोहभंग करने का भी साधन है. ऐसे में जब उन्हें पढ़ने के लिए पुस्तकें दी जाती है तो उनका ध्यान उस पर नहीं जाता और वे पढ़ने में कमजोर हो जाते हैं. पर हां, छोटे बच्चे जब मोबाइल लेने की जिद करें तो आप उसे रंगों की पहचान व अक्षर ज्ञान कराने वाले वीडियो देखने को प्रेरित करें. इससे आपके बच्चे का मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धन भी होता है. इससे आप भी खुश और बच्चा भी खुश. पर ध्यान रहे कि वह सिर्फ ज्ञान बढ़ाने वाले वीडियो ही देखे.

कोलकाता स्थित टॉप 10 टॉय शॉप की सूची –

1. विनस

2. पपेट्स

3. हेमलेज

4. मट्टेल डॉट कॉम शॉप

5. किड्ज विला

6. गुड लक एजेंसीज

7. फर्स्ट क्राई

8. इंटरनेशनल टॉयज डॉट कॉम

9. स्टार मार्क

10. वंडरलैंड मॉडल्स

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