Home Annex ‘कोलकाता की कराटे गर्ल’ आयशा बन चुकी हैं प्रेरणास्रोत!

‘कोलकाता की कराटे गर्ल’ आयशा बन चुकी हैं प्रेरणास्रोत!

बीमारी व आर्थिक तंगी को मात देकर 6 गोल्ड मेडल जीतने वाली कोलकाता की आयशा नूर हम सबकी प्रेरणा है.

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कहते हैं ना हौसले बुलंद हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है. एक जमाना था जब लड़कियों को घर की चारदिवारी के अंदर रखा जाता था. अभी लड़कियां भी लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं. वह भी हर क्षेत्र में आगे हैं. तीन बार की कराटे वर्ल्ड चैंपियन कोलकाता की आयशा नूर (Karate Girl) को ही देख लीजिए. उसने साबित कर दिखाया है कि लड़कियां भी लड़कों से कम नहीं. आज आयशा करोड़ों महिलाओं की प्रेरणा बनी हुई हैं. कराटे में आयशा अब तक कुल 6 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. जिसमें 3 राष्ट्रीय व 3 अंतरराष्ट्रीय शामिल है.

Ayesha Noor
रामलीला पार्क में कराटे का प्रशिक्षण देती आयशा नूर.

आयशा (Karate Girl) ने पहला मुकाबला वर्ष 2010 में मुंबई में आयोजित प्रतियोगिता में जीता था. जिसमें उसने 16 देशों को हराया था. वर्ष 2013 में उसने थाई पिचाई इंटरनेशनल यूथ कराटे चैंपियनशीप में गोल्ड मेडल हासिक किया था. जबकि अब तक का अंतिम गोल्ड मेडल वर्ष 2015 में थाइलैंड में आयोजित प्रतियोगिता में ही जीता था. इसके अलावा भी उसे सैकड़ों पुरस्कार व संवर्धना मिले हुए हैं. 6 वर्ष की उम्र से ही आयशा ने कराटे सीखना शुरू किया था और इसकी प्रेरणा उसे अपने भाई से मिली थी.

वर्ष 2012 में निर्भया दुष्कर्म कांड की घटना के बाद ही आयशा ने महिलाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण देने का मन बनाया. एक साक्षात्कार में आयशा ने बताया कि मुझे प्रशिक्षित करने में मेरे कोच का तो भरपूर योगदान रहा. वहीं निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए भी मुझे उनका पूरा सहयोग मिला.

कराटे चैंपियन

अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियन बनने के बाद वर्ष 2013 में उसने महिलाओं को कराटे का निःशुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया। जिसमें स्कूल व कॉलेज छात्राए, स्ट्रीट व बस्ती की लड़कियां व कामकाजी महिलाएं भी शामिल हैं. उसका लक्ष्य सालाना लगभग 1 लाख महिलाओं को प्रशिक्षण देना है. कोलकाता के विभिन्न स्थानों में अब तक करीब 6 लाख को प्रशिक्षित कर चुकी है. आने वाले दिनों में इस संख्या में वृद्धि करने की योजना है.

ब्लैक बेल्ट आयशा (Karate Girl) का कहना है कि मुझे कराटे में बहुत दिलचस्पी है. जितना मुझे कराटे करना अच्छा लगता है उससे कहीं ज्यादा मुझे दूसरों को सीखाने में खुशी मिलती है. वर्तमान युग में ना सिर्फ लड़कों के लिए बल्कि लड़कियों के लिए भी कराटे सीखना बहुत जरूरी है. आत्म रक्षा के लिए यह सबसे बेहतर माध्यम है. जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है. आत्मविश्वास से ही कोई व्यक्ति आत्म रक्षा कर पाएगा.

Ayesha Noor
रामलीला पार्क में कराटे का प्रशिक्षण देती आयशा नूर.

महिलाओं को हिंसा के खिलाफ प्रेरित करने के लिए ही मैनें निःशुल्क प्रशिक्षण की क्लास शुरू की थी. महानगर के रामलीला पार्क में हर रविवार को यह ट्रेनिंग दी जाती है. जिसमें हर वर्ग की महिलाएं शामिल हैं. अल्पसंख्यक महिलाएं बुर्खे में भी इसमें हिस्सा लेती हैं. मौलाली के रामलीला पार्क में होने वाले ट्रेनिंग क्लास में वर्तमान में कुल 350 छात्राएं हैं.

डॉक्यूमेंट्री फिल्म

कोलकाता के बेनियापुकुर स्थित बस्ती अंचल में रहने वाली 22 वर्षिय इस लड़की के जज्बों की कहानी सिर्फ कोलकाता तक ही नहीं बल्कि नीदरलैंड तक पहुंची. वहां के निर्देशक कोएन स्वीडगेस्ट ने ‘गर्ल कनेक्टेड’ नामक फिल्म में आयशा को भी शामिल किया था. इंटरनेशनल टेलीविजन सर्विसेज की तरफ से यह पहल की गई थी. इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में विश्व की ऐसी पांच महिलाएं जो लिंग भेद के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं उनकी कहानियों को शामिल किया गया था.

आयशा के अलावा बाकी चार लड़कियां केन्या, जॉर्डन, बांग्लादेश व पेरू की हैं. 8 मार्च 2017 को महिला दिवस के अवसर पर इस फिल्म का प्रसारण पूरी दुनिया में किया गया था. इसके अलावा आयशा के उपर और भी कई डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई जा चुकी हैं. यह छोटी सी लड़की आज कराटे के क्षेत्र में नई बुलंदियों को छू रही है. इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उसके सामने एक नहीं बल्कि कई तरह की मुसीबतें आईं.

बीमारी व गरीबी से तंग हालात

आयशा (Karate Girl) ने बताया कि अपने सपनों को साकार करने के लिए वह मेहनत तो करती है पर गरीबी व बीमारी की वजह से उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से उसके पिताजी ने उसे कराटे सीखने से मना किया था. क्योंकि उनके लिए दो बच्चों के लिए कराटे का खर्च वहन करना संभव नहीं था. लेकिन कराटे कोच एम.ए.अली की तरफ से उसे कराटे सीखाने का विशेष आग्रह करने पर पिता ने उसे अनुमति दी थी.

जब आयशा 13 वर्ष की थी तो उसके पिता की मौत हो गई थी. जिसके बाद उसकी पारिवारिक स्थिति और भी दयनीय हो गई. फिर भी आयशा की मां उसे प्रोत्साहित करती रहीं. दूसरी तरफ आयशा बचपन से ही मिर्गी की बीमारी से ग्रस्त है. गरीबी की वजह से ना तो उसका इलाज सही से हो पा रहा है, ना ही उसे ढ़ंग का भोजन मिल पाता है. इस परिवार के लिए कई बार ऐसा वक्त भी आया जब इन्हें सिर्फ पानी पीकर सोना पड़ा था. बावजूद इसके आयशा के हौसले मजबूत हैं. खुद सक्षम होने के साथ-साथ आयशा अन्य महिलाओं को भी सक्षम बनाने में लगातार लगी है.

Ayesha Noor with Award
कोलकाता की कराटे गर्ल आयशा नूर। source: amazonaws

बीमारी को दिया मात

आयशा का कहना है कि उसकी बीमारी उसके शरीर व पढ़ाई को प्रभावित कर सकती है. लेकिन उसके अंदर कराटे के जुनून को वह कभी प्रभावित नहीं कर सकती. कराटे सिखाते वक्त उसे बिल्कुल याद नहीं रहता कि वह किसी बीमारी से ग्रस्त है.

सितंबर में वर्ल्ड मीट आयशा के नाम एक और अवॉर्ड

आगामी 28 व 29 सितंबर को बैंकॉक में ‘वर्ल्ड मीट’ का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें आयशा (Karate Girl) भी हिस्सा लेगी. इस समारोह में पूरे विश्व के मास्टर्स व ग्रांड मास्टर्स शामिल होंगे. विशेष अवसर पर ‘वर्ल्ड मिक्स्ड मार्सल आर्ट्स काउंसिल’ के अध्यक्ष ग्रांड मास्टर निशार स्माइलर के हाथों आयशा को ‘इंटरनेश्नल स्पोर्टस अवार्ड’ से नवाजा जाएगा.

मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकाता

आयशा के कोच एम.ए.अली ने आयशा के प्रति सरकारी रवैये पर असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि देश का नाम रौशन करने वाली आयशा के आर्थिक हालात से केंद्र व राज्य दोनों सरकारें वाकिफ हैं. आयशा की जीत पर केंद्र व राज्य दोनों सरकारों की तरफ से शुभकामनाएं तो दी जाती है लेकिन आयशा की सहायता के लिए कोई कदम नहीं उठाये जा रहे.

हालांकि आयशा व उसके परिवार वालों को मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें हैं. आयशा अपनी मम्मी व कोच एम.ए.अली के साथ बहुत जल्द मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे. ये लोग तमाम पुरस्कारों के साथ सीएम से गुहार लगाएंगे. इन्हें पूरी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इनकी तकलीफों को सुनेंगी व आयशा के लिए कुछ कदम उठाए जाएंगे.

ब्लैक बेल्ट का परीक्षा देंगी आयशा की छात्राएं

आयशा ने कहा कि उसके द्वारा प्रशिक्षित उसकी चार छात्राएं बहुत जल्द ब्लैक बेल्ट का परीक्षा देने थाइलैंड जा रही हैं. यह बहुत गर्व की बात है.

Ayesha with her coach
अपने कोच के साथ आयशा.

हर घर में हो आयशा

आयशा के कोच एम.ए.अली ने कहा कि आयशा जैसी लड़की हर घर में हो. चाहे वो फिल्ड कोई भी हो लेकिन हर घर में ऐसी बेटियां होनी चाहिए. जो अपने जज्बे से देश का नाम रौशन करे. अगर हर घर से एक आयशा तैयार होती है तो अपना देश नई उंचाइयों को छूएगा.

आयशा नूर की यह कहानी उन सभी महिलाओं को लिए प्रेरणा है जो जीवन में कुछ करना चाहती हैं. कुछ बनना चाहती हैं. अगर कुछ करने की मान में ठान ली जाए तो तमाम बाधाएं अपने आप दूर हो जाती हैं. साक्षात्कार के माध्यम से हमने आयशा की इस कहानी को आप तक पहुंचाने की कोशिश की है. इसे पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया ‘योदादी’ के साथ जरूर शेयर करें.#KarateGirlAyeshaNoor

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