Home Trending यहां वर्षों से मुस्लिम कारीगर बनाते हैं राधा-कृष्ण की मूर्तियां!

यहां वर्षों से मुस्लिम कारीगर बनाते हैं राधा-कृष्ण की मूर्तियां!

देश-विदेश से हिंदू-मुस्लिम एकता की कई खबरें आती रहती है. मथुरा व अलीगढ़ में भी मुस्लिम समुदाय श्रीकृष्ण-राधा की प्रतिमा व पोषाक बनाकर मिसाल पेश कर रहे हैं. Krishna Janmashtami

जन्माष्टमी की तैयारियां पूरे देश में की जा रही है. हर जगह बाजारों में श्रीकृष्ण की मूर्तियां व उनके रंग-बिरंगे पोषाक की धूम मची है. श्रीकृष्ण की लोकप्रियता पूरे देश में है.

krishna janmashtami

हर भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण को आदर्श माना जाता है. छोटे या बड़े पर्दे पर तो आपने देखा ही होगा कि किसी भी तरह के धार्मिक किरदार निभाने में कोई कलाकार हिंदू या मुस्लिम नहीं देखता.

ठीक उसी तरह मथुरा व अलीगढ़ की भी कहानी है. यहां जन्माष्टमी (krishna janmashtami) की तैयारियां जोड़ों पर है. इस तैयारी में बहुत सारे मुस्लिम कलाकार भी जुटे हुए है.

कृष्ण की नगरी मथुरा की सबसे खास बात तो यह है कि यहां मुस्लिम समाज भी बढ़चढ़ कर इस त्योहार (krishna janmashtami) में हिस्सा लेता है.

दे रहे हैं सौहार्द का संदेश – Krishna Janmashtami

यहां के कारीगर आपसी सौहार्द का संदेश दे रहे हैं. इस त्योहार को धूमधाम से मनाने के लिए श्रीकृष्ण का पोषाक मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा ही बनाया जाता है.

सिर्फ मथुरे के लिए नहीं बल्कि इनके द्वारा बनाई गई ड्रेसें देश-विदेश के विभिन्न स्थानों तक भेजी जाती है. मथुरा की बहुत सारी गलियां ऐसी है जहां भगवान श्रीकृष्ण (krishna janmashtami) की ड्रेस व मुकुट श्रृंगार का कारोबार फैला है.

इन तमाम चीजों को बनाने वाले कारखानों में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग ही काम करते हैं. इस वर्ष जन्माष्टमी (krishna janmashtami) 24 अगस्त को है. और श्रीकृष्ण व राधा रानी के पोषाक निर्माण की तैयारियां जोरों पर है.

इनकी एक से बढ़कर एक मनमोहक पोषाक का निर्माण किया जा रहा है. इसके अलावा यहां मुकुट, गले का हार, पाजेब, चूड़ियां व कान का कुंडल भी बनाया जा रहा है.

विदेशों तक जाती है श्रीकृष्ण की पोषाक

मथुरा के एक कारीगर इमरान मीर का कहना है कि मूर्तियां व कपड़े बनाने के लिए कारीगर रोजाना करीब 12 घंटे काम करते हैं.

इसे बनाने से पहले वे पेपर पर उसकी स्केच तैयार करते हैं. उसके बाद फिर उसमें जड़ी, मोती, स्टोन व मखमल लगाने का काम होता है.

पोषाक में लहंगा, ओढ़नी, पटुका व मुकुट पहनाकर भगवान का श्रृंगार किया जाता है. यहां देश-विदेश से भी मूर्तियों के बहुत सारे ऑर्डर मिलते हैं.

इस वर्ष अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, नेपाल, स्वीटजरलैंड व अफ्रीका से ज्यादातर सफेद व नीले रंग के पोषाक का ऑर्डर मिला है. इनके खूबसूरत पोषाक में जड़ी, मोती, सीसे व नग की भी सुंदर कलाकारी की जाती है.

अलीगढ़ में 20 वर्षों से पेश कर रहे मिशाल – Krishna Janmashtami

वहीं दूसरी ओर अलीगढ़ में एक मुस्लिम परिवार भी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहा है. यहां का एक मुस्लिम परिवार पिछले 20 वर्षों से राधा-कृष्ण की मूर्तियां तैयार कर रहा है.

प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी यह परिवार जन्माष्टमी (krishna janmashtami) के मौके पर राधा-कृष्ण की मूर्ति बनाने का काम जारी है. पिछले 20 वर्षों से कासिम राधा-कृष्ण की पीतल की मूर्तियां बना रहे हैं.

दिलचस्प बात तो यह है कि कासिम अकेले नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार इसी व्यवसाय के साथ जुड़ा है. इस नेक कार्य में उनकी पत्नी व पांच बच्चे भी सहायता करते हैं.

यानी पूरा परिवार ही राधे-कृष्ण की मूर्तियां बनाने के काम से जुड़ा है. धीरे-धीरे कासिम का मुख्य व्यवसाय ही मूर्तियां बनाना बन गया. इस परिवार ने साबित किया है कि कर्म के लिए हर धर्म बराबर है.

सिर्फ यही परिवार ही नहीं बल्कि इनके अलावा अलीगढ़ में करीब 5 सौ मुस्लिम परिवार राधा-कृष्ण की मूर्तियां बनाने के पेशे से जुड़े हैं. इस काम में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग मिलकर काम करते हैं.

दोनों समुदाय के बहुत सारे परिवार का यह मुख्य पेशा मूर्तियां बनाना ही है. जिसमें ना सिर्फ श्री कृष्ण की मूर्तियां बल्कि ये लोग अन्य हिंदू देवी–देवताओं की मूर्तियां भी बनाते हैं.

krishna janmashtami

अलीगढ़ में हिंदुओं का त्योहार आते ही वहां के कारीगर ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं. अभी वहां कोई कारीगर दुर्गा की प्रतिमा तैयार करने में जुटा है तो कोई राधा-कृष्ण की मूर्तियां बनाने में.

देखा जाए तो यहां की पुरानी आबादी के 80 फीसद घरों में ताला, हार्डवेयर व मूर्ति बनाने का काम होता है. यहां के अधिकांश कारीगर दुकान में नहीं बल्कि घरों में ही काम करते हैं. जयगंज, पाला रोड, सराय भूखी में मूर्तियां बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है.

जन्माष्टमी की तारीख को लेकर दुविधा बरकरार – Krishna Janmashtami

जन्माष्टमी भी हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इसकी पूजा अर्चना भी विधिनुसार की जाती है. और यह पूजा भी सही मुहुर्त में की जाती है.

इस वर्ष देश जन्माष्टमी 23 अगस्त को है या 24 अगस्त को इसको लेकर दुविधा बरकरार है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादो महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था. जो कि इस वर्ष 23 अगस्त को पड़ रही है.

वहीं ज्योतिर्विदों की मानें तो भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इसलिए जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में मनाना उत्तम माना जाता है.

पंचांग के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त 2019 की रात 11.56 बजे से शुरू हो जाएगी. इस दिन रोहिणी नक्षत्र 44 घड़ी का है.

इसलिए कृष्ण का जन्मदिन इसी समय में मनाना शुभ माना जाता है. जबकि वैष्णव व साधु-संतों की कृष्णाष्टमी 24 अगस्त को उदया तिथि अष्टमी में मनाई जाएगी. #HappyJanmashtami

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