Home Annex महाशिवरात्रि: ऐसे करें शिव-पार्वती की आराधना

महाशिवरात्रि: ऐसे करें शिव-पार्वती की आराधना

भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा दिन शिवरात्रि को ही माना जाता है. विश्वास है कि शिवरात्रि के अवसर पर शिव का सच्चे मन से व्रत एवं पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.

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भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा दिन शिवरात्रि (Shivratri Puja) को ही माना जाता है. इस दिन हर जगह शिव पार्वती की पूजा बड़े धूमधाम से होती है. महाशिवरात्रि के विषय में कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव का अंश प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात उपस्थित रहता है. मान्यता है कि अगर इस दिन आपकी पूजा से भगवान शिव खुश हो जाते हैं तो आपको सभी कार्यों में सफलता मिलती है.

ऐसा विश्वास है कि शिवरात्रि के अवसर पर शिव का सच्चे मन से व्रत एवं पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. मोक्ष की भी प्राप्ति होती है. शास्त्र के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात देवी पार्वती और भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था. इसलिए शिवरात्रि का दिन बहुत उत्तम माना जाता है. इस दिन शिव की उपासना और पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं.

Worship of Shiva
source: firstpost

भोलेनाथ को खुश करने के लिए शिवरात्रि (Shivratri Puja) वाले दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की लंबी-लंबी लाइन लगनी शुरू हो जाती है. इनमें कई भक्तों को शिव की पूजा अर्चना के बारे में जानकारी होती है. लेकिन कुछ भक्त ऐसे भी होते हैं जिन्हें इसकी जानकारी नहीं होती. तो हम आपको शिव रात्रि के दिन कैसे और किन चीजों से पूजा करनी है इसकी जानकारी देते हैं. कहा यह भी जाता है कि अगर शिव आपकी आराधना से खुश हो जाते हैं तो आपके घर में सुख व समृद्धि आती है.

>> ऐसे करें पूजा-अर्चना

1. बेल पत्र और गंगाजल ( Bel Patra and Gangajal)

सावन के महीने में भक्त भोले बाबा को प्रसन्न करने में जुट जाते हैं. शिवलिंग पर बेल पत्र और गंगाजल चढ़ाने का भी अपना विधान है. शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त इसके लिए कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है. बेल पत्र शिव का सबसे प्रिय है. मान्यता है कि बेल पत्र और जल के शिव का मस्तिष्क ठंडा रहता है. बेल पत्र और जल अर्पण करने से शिव बहुत प्रसन्न रहते हैं.

  • शिव को बेलपत्र हमेशा उल्टा अर्पित करना चाहिए. पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहना चाहिए.
  • बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए.
  • अगर बेलपत्र उपलब्ध न हो तो बेल के वृक्ष के दर्शन कर लें. उससे भी पुण्य की प्राप्ति होती है.
  • किसी ने अगर शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया है तो उसका अनादर नहीं करना चाहिए. शास्त्र के अनुसार अगर नया बेलपत्र न मिल सके तो आप किसी अन्य के चढ़ाए बेलपत्र को भी धोकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

2. हल्दी (Turmeric)

हल्दी का प्रयोग वैसे तो हर शुभ कार्य में किया जाता है. शिवरात्रि (Shivratri Puja) के दिन मंदिरों में शिव भक्त उन्हें हल्दी का टीका लगाते हैं. पर भगवान शिव की पूजा में हल्दी का व्यवहार नहीं होना चाहिए. हल्दी को स्त्री सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर व्यवहार किया जाता है. जबकि शिव पुरुष हैं इसलिए हल्दी का व्यवहार करना गलत है.

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white flower
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3. सफेद फूल (White Flower)

हर देवी-देवता के लिए फूलों का भी अपना महत्व है. शास्त्र के अनुसार भगवान शिव को सफेद फूल ज्यादा पसंद है. इसलिए उन्हें अन्य रंगों का फूल नहीं चढ़ाया जाता. कहते हैं कि अगर आप उन्हें सफेद फूल चढ़ाते हैं तो वे जल्दी प्रसन्न होते हैं.

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।। Click To Tweet

4. चंदन (Sandal)

भगवान शिव को टीका लगाने के लिए सिर्फ चंदन का ही व्यवहार करना चाहिए. कई महिलाओं को देखा जाता है कि वे शिवरात्रि (Shivratri Puja) अन्य दिनों में भी सिंदूर या कुमकुम का टीका शिव को लगा देती हैं. जो बिल्कुल गलत है क्योंकि महिलाएं कुमकुम या टीका पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं. भगवान शिव विध्वंसक के रूप में जाने जाते हैं. यही वजह है कि शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम कभी नहीं चढ़ाना चाहिए.

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shivratri puja
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5. तांबे का लोटा (Copper Lota)

ताबें के लोटे से भगवान शिव को जल चढ़ाने से वे काफी प्रसन्न होते हैं. शिव की पूजा करते वक्त उन्हें कभी भी स्टील या लोहे के लोटे का इस्तेमाल ना करें. बल्कि हमेशा उन्हें तांबे या पीतल के लोटे से ही जल चढ़ाएं.

6. शंख (Shell )

हिंदू मान्यता के अनुसार पूजा में शंख बजाना बहुत पवित्र माना जाता है. पूजा में शंख बजाना और इसके माध्यम से जल देना शुभ-शुभ माना जाता है. पर कहा जाता है कि शिवलिंग पर शंख से जल कभी नहीं चढ़ाना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना जाता है.

Shankh is important during puja
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शिवरात्रि (Shivratri Puja) के पावन अवसर पर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण करना चाहिए. इस मंत्र का उच्चारण करते हुए ही शिवजी पर जल चढ़ाना चाहिए. इसके बाद गंगाजल चढ़ाकर, फूल अर्पित करें और फिर बेलपत्र भी चढ़ाएं. बेल पत्र चढ़ाने के बाद मिठाई, नारियल आदि शिव को अर्पित करें. ये तमाम प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिव की आरती करें. यह विधान है कि आरती के बाद 108 बार “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने के बाद पूजा सफल होती है. फिर रात्रि के चारों प्रहर में शिव की पूजा कर अगले दिन सुबह ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए.

इस सदाबहार शिव भजन को जरूर सुनें –

शिव और शक्ति के सम्मिलित स्वरूप को ही हमारी संस्कृति के विभिन्न आयामों का प्रदर्शक माना जाता है. शिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि शिव जिसकी भक्ति से प्रसन्न हो जाते हैं, उस पर उनकी कृपा बनी रहती है. आपकी सुविधा के लिए हमने यहां पूजा विधि बताया है. आप भी अगर शिव शंकर की पूजा करते हैं तो ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें. #MahaShivratri

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