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अपने बच्चे को ऐसे बनाएं आत्मविश्वासी कि जिंदगी में कुछ बड़ा कर सके!

जिस बच्चे में आत्मविश्वास की कमी होती है वह कभी भी किसी चैलेंज को लेने से घबराते हैं और घबराहट की वजह से वे अपने व माता-पिता की उम्मीदों पर खड़े नहीं उतरते.

आज की प्रतियोगिता भरी जिंदगी में बच्चों के सामने आए दिन नई-नई चुनौतियां आती है और उन्हें इसका सामना करना पड़ता है. बच्चे के सामने अगर चुनौतियां आती है और माता-पिता भी इसको लेकर दबाव बनाना शुरू कर देते हैं, तो इसके लिए बच्चे का पहले से तैयार रहना बेहद जरूरी है. जब बच्चे छोटी उम्र से ही इन चुनौतियों का सामना करना सीख लेते हैं तो यह उनके भविष्य को बेहतर बनाने में काफी मददगार होता है. पर इन सबके केंद्र में सबसे महत्वपूर्ण है आत्मविश्वास. जिस बच्चे में आत्मविश्वास की कमी होती है वह कभी भी किसी चैलेंज को लेने से घबराते हैं और घबराहट की वजह से वे अपने व माता-पिता की उम्मीदों पर खड़े नहीं उतरते.

अगर आप बच्चे को बनाना चाहते हैं आत्मविश्वासी तो जरूर अपनाएं ये 10 टिप्स:

Raising a self confident child
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1. बच्चे की हौसला आफजाई करना ना भूलें:

जब बच्चा कोई काम करता है तो वह अपने माता-पिता से तारीफ की उम्मीद रखता है और यह तारीफ उन्हें आत्मविश्वासी बनाने में बेहद मददगार होता है. चाहे बच्चा पढ़ाई के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया हो या रोजमर्रा के जीवन में ही कुछ अच्छा काम किया हो तो उसकी तारीफ करना बिल्कुल ना भूलें. याद रखें जहां तक संभव हो बच्चे को खुद से ही अपनी समस्याओं का हल निकालने दें. ध्यान रहे अगर बच्चा अपने काम को सही से नहीं कर पा रहा हो तो उसकी सहायता जरूर कर दें और बच्चे की हर हार जीत में उसकी हौसला आफजाई भी करें.

2. बनाए रखें दोस्ती का रिश्ता:

हर अभिभावक अपने बच्चे की बेहतरी की कामना करते हैं और इसके लिए उनका निरंतर प्रयास भी जरूरी रहता है. इन सबके बीच माता-पिता का बच्चे के साथ दोस्ती का रिश्ता होना भी उन्हें आत्मविश्वासी (confident child) बनाने में सहायता करती है. अगर आपका बच्चे के साथ दोस्ती का रिश्ता रहता है तो वह अपनी किसी भी परेशानी को आपके साथ साझा कर सकता है लेकिन अगर उसके अंदर आपके प्रति भय की भावना रहेगी तो वह अपनी दिक्कतों को मन के अंदर रखेगा जिससे वह मानसिक तौर पर बीमार हो जाएगा और वह अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर पाएगा.

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3. मन शांत रखने को योग सिखाएं:

दिमाग को शांत रखने का एक साधन योग भी है और यह इंसान को आत्मविश्वासी (confident child) बनाने में भी मदद करता है. बच्चे में बचपन से ही योग करने की आदत डालें. योग में इतनी शक्ति है कि वह सिर्फ बचपन में ही नहीं बल्कि बड़े होने पर भी मस्तिस्क को शांत रखता है और मन में एकाग्रता स्थापित करने में भी मदद करता है.

4. रखें सकारात्मक व्यवहार:

आपका बच्चा जब किसी मुसीबत में हो तो आवश्यक है कि उसका आत्मविश्वास बढ़ाया जाए. आत्मविश्वासी बच्चे किसी भी मुसीबत का सामना करने से पीछे नहीं हटते और वे सफल भी होते हैं। मुश्किल परिस्थिति में बच्चे को यह समझाना उचित है कि तुम इससे निकलने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश करो. जहां तक हार और जीत की बात है तो ये दोनों ही जीवन का हिस्सा है, इससे घबराने की जरूरत नहीं है. इसके बाद बच्चे का नतीजा जो भी हो आप उनके साथ सकारात्मक व्यवहार रखें. हार में भी बच्चे को दुःखी नहीं बल्कि खुशी-खुशी अगली चुनौतियों के लिए तैयार रहने की नसीहत दें.

5. जरूर दें दूसरा मौका:

बच्चा जब भी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है या पढ़ाई के क्षेत्र में ही जब कभी उसे हार का सामना करना पड़ता है तो वह हताश हो जाता है. हताशा की वजह से बच्चा अंदर से कमजोर हो जाता है. जब भी कभी आपके बच्चे को ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़े तो याद रखें कि उसे डांटें बिल्कुल नहीं बल्कि उसे समझाएं कि यह जीवन का अंत नहीं है बल्कि ऐसे मौके दोबारा भी मिलते हैं। उसका हौसला बढ़ाते हुए भविष्य की अन्य चुनौतियों के लिए अपनी तरफ से भरपूर तैयारी करने का हौसला दें. आपने देखा भी होगा कि कई असफल इंसान भी इतिहास रच देते हैं और वे सबके प्रेरणास्त्रोत बन जाते हैं.

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6. लिखकर डर निकालने का करें प्रयास:

अगर आपका बच्चा किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रहा हो तो ऐसे में उसे तनाव मुक्त रखने की कोशिश करें क्योंकि तनाव किसी भी इंसान के बेहतर प्रर्दशन को प्रभावित करता है. ऐसे में अगर आप अपने बच्चे को उनके सभी डर को एक पेपर पर लिखने को बोलें. इस तरह जब वह अपनी परेशानियों को पेपर पर लिखेगा, उसके बाद वह खुद ही उसे सुलझाने की कोशिश भी करेगा. इस तरह पेपर पर लिख कर भय निकालने का उपाय प्रभावी भी होता है.

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7. हौसला बढ़ाना भी जरुरी:

कहा जाता है ना कि हौसले बुलंद हो तो इंसान हर चुनौती का सामना कर सकता है. इसी तरह अगर आपका बच्चा किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रहा है और प्रतियोगिता शुरू होने के बाद उसके सामने कुछ नकारात्मक परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है तो वो किस तरह उसका सामना करेगा. इसके लिए बच्चे के साथ बातचीत कर उसे ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए पहले से ही तैयार रखें ताकि परिस्थितियां उसके प्रदर्शन को प्रभावित ना करे.

8. सफलता जरूर गिनाएं:

ये तो सभी जानते हैं कि सफलता खुशी देती है और यह आत्मविश्वास बढ़ाने में भी पूरी तरह सक्षम है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करता रहे तो उसके लिए बच्चे की पिछली सफलताओं को याद दिलाते रहें. समय-समय पर उसकी क्षमताओं से भी अवगत कराएं. इससे बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह सफलता की बुलंदियों तक पहुंचेगा.

9. बच्चे को डांटे नहीं:

अगर बच्चा कुछ गलती करता है तो से डांटने के बजाय प्यार से समझाने की कोशिश करें. डांटने से बच्चे में आत्मविश्वास की कमी आती है और बार-बार डांटने से उनके अंदर हीन भावना घर कर जाती है जो कि उनकी तरक्की में बाधक सिद्ध होता है.

10. मिसाल देकर समझाएं:

आपको अगर लगता है कि आपके बच्चे में आत्मविश्वास की कमी है तो किसी ऐसे व्यक्ति की मिसाल देकर समझाएं जिसके बारे में सुनना उसे पसंद हो। ऐसे में वह भी भविष्य में उसी इंसान की तरह बनने का प्रयास करेगा.

परवरिश करते हुए एक तरह से हम बच्चों का भविष्य लिख रहे होते हैं. हम अपने व्यवहार से उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं या उन्हें दिशा प्रदान करते हैं. हमेशा अपने बच्चों को सकारात्मक पक्ष की ओर ले जाएं. आत्मविश्वास से परिपूर्ण बच्चा ही आगे चलकर बेहतर प्रदर्शन करता है! #HappyParenting

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