Home Health Care National Doctors’ Day: इस वजह से डॉक्टर को थैंक्यू कहना ना भूलें!

National Doctors’ Day: इस वजह से डॉक्टर को थैंक्यू कहना ना भूलें!

डॉक्टर्स डे की शुरुआत दुनिया में सबसे पहले अमेरिका के जॉर्जिया से हुई थी. 30 मार्च 1933 में फिजिशियन यानि डॉक्टरों के सम्मान के लिए ये दिन निश्चय करने का आइडिया डॉ. चार्ल्स बी एलमंड की पत्नी यूडोरा ब्राउन एलमंड ने दिया था.

76
0

डॉक्टर को धरती पर ईश्वर का रूप माना जाता है. वैसे तो इंसान का जन्म व मृत्यु भगवान के हाथों में है. लेकिन कई मामलों में देखा जाता है कि ये चिकित्सक मरीज को मौत के मुंह से भी बचाकर ले आते हैं. (National Doctors Day)

national-doctors-day

इसकी वजह यह भी है कि आज विज्ञान के चमत्कारों की वजह से डॉक्टरों ने चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की है. मरीजों की सेवा के प्रति चिकित्सकों के समर्पण, अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान, ईमानदार व लगन को देखते हुए ही उनके सम्मान में 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस का पालन किया जाता है.

इस दिवस को मनाने का मूल उद्देश्य डॉक्टर्स की उपलब्धियों और चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम हासिल करने वाले डॉक्टरों को सम्मान देना है. जबकि दूसरा मेडिकल के विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए किया जाता है. इस दिवस का पालन हर देशों में अलग-अलग तारीख में किया जाता है. भारत में इसका पालन 1 जुलाई को होता है.

कैसे हुई चिकित्सक दिवस की शुरुआत

डॉक्टर्स डे की शुरुआत दुनिया में सबसे पहले अमेरिका के जॉर्जिया से हुई थी। 30 मार्च 1933 में फिजिशियन यानि डॉक्टरों के सम्मान के लिए ये दिन निश्चय करने का आइडिया डॉ. चार्ल्स बी एलमंड की पत्नी यूडोरा ब्राउन एलमंड ने दिया था.

30 मार्च 1958 में यूएस के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यूडोरा ब्राउन एलमंड के आइडिया को अपनाया था. जबकि भारत सरकार द्वारा वर्ष 1991 में चिकित्सक दिवस की स्थापना हुई थी.

एक अच्छा चिकित्सक बीमारी का इलाज करता है, जबकि एक महान चिकित्सक उस मरीज का इलाज करता है.

भारत में 1 जुलाई को क्यों मनाया जाता है चिकित्सक दिवस

प्रसिद्ध चिकित्सक बिधान चंद्र रॉय की जयंती व पुण्यतिथि दोनों ही 1 जुलाई को होती है. उन्हें सम्मान देने के उद्देश्य से ही 1 जुलाई को चिकित्सक दिवस का पालन किया जाता है. 4 फरवरी 1961 में डॉ. बिधान चंद्र रॉय को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया था. वे पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.

बिहार से थे बिधान चंद्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy)

Bidhan Chandra Roy

बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना में हुआ था. इन्होंने अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई कलकत्ता से पूरी की थी. अपनी एमआरसीपी व एफआरसीएस की डिग्री लंदन से वर्ष 1911 में पूरी की थी. उसी वर्ष उन्होंने भारत में एक चिकित्सक के रूप में चिकित्सा जीवन का शुभारंभ किया था.

फिर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में वे शिक्षक नियुक्त किए गए. डॉ. बिधान चंद्र रॉय एक नामी शिक्षाविद् थे. इसके अलावा उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सविनय अवज्ञा आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ हिस्सा लिया था. जिसके बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता बने. वर्ष 1948 में वे पश्चिम बंगाल के द्वितिय प्रधानमंत्री बने.

80 वर्ष की उम्र में वर्ष 1962 में जन्मदिवस के दिन ही उनकी मृत्यु हो गई थी. उन्हें श्रद्धांजलि व सम्मान देने के उद्देश्य से वर्ष 1976 में उनके नाम पर डॉ. बी.सी.रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत की गई थी. चिकित्सकों की बहुमूल्य सेवा, भूमिका व महत्व के संबंध में आम जन को जागरुक करने के लिए ही इस दिवस का पालन किया जाता है.

डॉक्टर का महत्व

डॉक्टर का महत्व शुरू से ही रहा है. बगैर चिकित्सा व्यवस्था के जिंदगी बहुत कठिनाई भरी होती. हर इंसान के जीवन में डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. हर किसी को यह सेवा लेनी पड़ती है और इसका महत्व सदैव ही रहेगा. इसीलिए भारत सरकार ने एक जागरुकता अभियान के लिए शुरू किया है. ताकि लोगों को चिकित्सकों के प्रति जागरूक किया जा सके.

दूसरी तरफ यह दिन उन चिकित्सकों के लिए भी खास है जो अपने पेशा के प्रति ईमानदार नहीं हैं. कई बार ऐसी घटनाएं प्रकाश में आती है जहां चिकित्सक द्वारा मरीज के साथ बदसलूकी की जाती है, उन्हें परेशान किया जाता है.

एक ऐसे डॉक्टर की वजह से इस पेशे से जुड़े बाकी चिकित्सक भी बदनाम हो जाते हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि सभी एक जैसे नहीं होते. इस तरह के बूरे डॉक्टरों की तुलना में अच्छे डॉक्टरों की संख्या बहुत ज्यादा है.

इस विशेष दिन को मनाने का मूल उद्देश्य डॉक्टरों को अपने पेशे के प्रति जागरूक करना व लोगों को डॉक्टरों के इस पेशे का सम्मान करना है. डॉक्टरों में पेशे के प्रति समपर्ण की कमी नहीं बल्कि किसी की जिंदगी बचाने वाले इस पेशे को जिम्मेदारी पूर्वक निभाना चाहिए.

नेशनल चिकित्सक डे समारोह

इस विशेष उत्सव को मनाने के लिए प्रति वर्ष स्वास्थ्य सेवा संगठन के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. मौके पर चिकित्सा सेवा से जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा की जाती है.

कब और कहां मनाया जाता है डॉक्टर्स डे

भारत

इंडिया में चिकित्सक दिवस का पालन 1 जुलाई को किया जाता है. इस दिन महान चिकित्सक बिधान चंद्र रॉय की जयंती के साथ ही उनकी पुण्यतिथि भी है.

ब्राजील

ब्राजील में 18 अक्टूबर को हर वर्ष डॉक्टर्स डे का पालन किया जाता है. ब्राजील के महान डॉक्टर कौथोलिक चर्च सेंट ल्यूक के जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है.

अमेरिका

अमेरिका में 30 मार्च को इस दिन का पालन किया जाता है.

वियतनाम

वियतनाम में 28 फरवरी 1955 को डॉक्टर्स डे की स्थापना की गई थी. लेकिन यहां इसकी तारीख निर्धारित नहीं है. इसलिए या तो 28 फरवरी को या फिर इसके आस-पास वाले किसी दिन इसका पालन किया जाता है.

क्यूबा

क्यूबा के चिकित्सक व वैज्ञानिक कार्लोस जुआन फिनले जिन्होंने पीले बुखार पर शोध किया था. उनके जन्म दिवस के अवसर पर प्रति वर्ष 3 दिसंबर को छुट्टी के रूप में इस दिवस का पालन किया जाता है.

ईरान

ईरान के महान चिकित्सक एविसेना के जन्मदिवस के अवसर पर 23 अगस्त को यह दिवस मनाया जाता है.

thank-you-doctor

नेपाल

नेपाल मेडिकल एसोसिएशन की स्थापना के बाद नेपाल में हर साल 4 मार्च को यह दिवस मनाया जाता है.

डॉक्टर के प्रति हर किसी के मन में श्रद्धा की भावना होती है. डॉक्टरों का भी कर्तव्य बनता है कि वे अपनी ड्यूटी का निर्वहन सही तरीके से करें, ना कि इस पेशे की छवि को धूमिल करें. क्योंकि चिकित्सक को ईश्वर का रूप माना जाता है.

हर बीमारी व्यक्ति की चिकित्सक से उम्मीदें जुड़ी रहती है. पर जाने-अनजाने हुई कुछ गलतियों की वजह से लोगों के मन में इस पेशे को लेकर सवाल उठने लगते हैं. इसलिए चिकित्सकों की जिम्मेवारी है कि वे अपने को धूमिल होने से बचाएं. अगर आप हमारे विचारों से सहमत हैं तो ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें. #NationalDoctorsDay

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here