Home Parenting आपकी इन आदतों का बच्चों पर होता है बुरा असर!

आपकी इन आदतों का बच्चों पर होता है बुरा असर!

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ये बात सुनने में ही अजीब लगती है कि अपने बच्चे को जान से भी ज्यादा प्यार करने वाले माता-पिता की आदतें ही बच्चे की दुश्मन बन जाएंगी! लेकिन ये बात बिल्कुल सच है. 866 अभिभावकों पर हुए एक सर्वें में पाया गया था कि अपने बच्चों के होमवर्क पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने वाले अभिभावक (parents behaviour) दरअसल उनकी भलाई नहीं बल्कि बच्चे का नुकसान हीं कर रहे हैं. उनकी इस आदत की वजह से बच्चा जिम्मेदारी लेना नहीं सीख पाता.

देखा गया है कि अभिभावक के ज्यादा जिम्मेदारी ले लेने से जिंदगी की दौड़ में बच्चे लीडर बनने की बजाए पिछलग्गू बने रहते हैं. इस तरह स्कूली लाइफ में बच्चो को नंबर तो मिल जाते हैं पर जिंदगी के इग्जाम में इन्हें सिर्फ पासिंग मार्क्स ही मिलते हैं, या फिर कभी-कभी वो भी नहीं. माता-पिता का फर्ज बनता है कि वक्त रहते वे अपनी आदतों (parents bad behaviour) में सुधार लाएं ताकि उनके बच्चे का भविष्य उज्ज्वल हो.

इसी तरह की कुछ आदतें (parents bad behaviour) हैं जो बच्चों के विकास की दुश्मन मानी जाती हैं:

parents bad behaviour
source: abc

बच्चों के लिए नियम में लचीलापन जरूरी

कई अभिभावक ऐसे होते हैं जो बच्चों को नियम के मुताबिक नहीं बल्कि अपनी सुविधा के मुताबिक चलाते हैं. नियमों का पालन करने से बच्चे में जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न होती है लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो बच्चे स्वाधीन ना होकर पूरी तरह अभिभावक पर निर्भर हो जाते हैं.

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नियम ना बनने पर अक्सर कलह, नाराजगी भी होती है जो रिश्ते बिगाड़ती है, पर नियम बनाने का मतलब ये नहीं है कि नियम स्थायी बन जाए बल्कि इसे लचीला होना चाहिए. यानी वक्त और मौके के हिसाब से नियमों में ढ़ील दी जा सकती है. बच्चे की उम्र और क्षमता के मुताबिक भी नियमों में बदलाव हो सकता है. साथ ही ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि नियम घर में सभी के लिए हों ना कि सिर्फ बच्चे के लिए. यह नियम खुद बनाने वाले पर भी लागू होना चाहिए.

बच्चों को मारना, डांटना या उन्हें शर्मिंदा करना

बच्चे को हर बात पर डांटने-पीटने से उसमें हीन भावना पैदा होती है. जिसमें एक शब्द है कि तुम्हें शर्म नहीं आती जैसे वाक्यों से जब भी बच्चों का सामना होता है तो बच्चों में एक शर्म, एक हीन भावना उत्पन्न होती है. जब माता-पिता बच्चों को अक्सर ही डांटते या पीटते रहते हैं तो बच्चों में पैदा हुई हीन भावना उसे जिंदगी में आगे बढ़ने से हमेशा रोकती है. आधुनिक मनोविज्ञान में सेल्फ इमेज का बड़ा कॉन्सेप्ट है. इस कॉन्सेप्ट के मुताबिक अगर हमारे मन में हमारी खुद की छवि अच्छी है तो हम जिंदगी में अपने लिए सबसे बेहतर चीज हासिल करने की कोशिश करेंगे. अगर हमारी छवि ही खराब है तो हम हाथ आए मौके भी छोड़ देंगे क्योंकि हम ये मानेंगे कि हम इसके लायक नहीं हैं. बच्चे को मारना, पीटना और डांटना यही बड़ा फर्क पैदा करता है.

एक और बुरी चीज ये होती है कि रोजाना ऐसा होने से बच्चों का माता-पिता के साथ रिश्ता कमजोर होता जाता है. रिसर्चरों का मानना है कि ऐसी आदतें पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि ऐसी आदतों का असर सिर्फ मन पर नहीं पड़ता बल्कि बच्चों का असामाजिक गतिविधियों की तरफ बढ़ने का खतरा बना रहता है.

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parents behaviour
source: theindusparent

तुलना सही नहीं बल्कि संवाद भी करें

एक बच्चे की तुलना किसी और बच्चे के साथ करना भी एक बुरी आदत है. ऐसा देखा जाता है कि कई बार बच्चों की तुलना करके भी माता-पिता बच्चों के विकास की क्षमता को बाधित करते हैं. दूसरे बच्चे से तुलना करना या दूसरों के सामने डांटने से इसका बच्चे से बुरा प्रभाव पड़ता है और बच्चा अपनी बहुत सी चीजों से रुचि खो देता है. बराबर एक ही कमेंट सुनते-सुनते बच्चों में ये भावना घर कर जाती है कि वो दूसरों के मुकाबले हीन हैं. इसकी वजह से बच्चा दिन-प्रतिदिन निराशा की ओर जाएगा और ये उनके लिए बेहद खतरनाक है.

ऐसा देखा गया है कि अक्सर माता-पिता अपने बच्चे को आदेश देना तो अच्छी तरह जानते हैं लेकिन उनके साथ संवाद कायम करना नहीं. जबकि इनके संवाद ना करने की आदत बच्चों की कमियां दूर नहीं होने देती बल्कि वह उनमें कई नई कमियों को पैदा करती है. ऐसी बहुत सी आदतें हैं जिनको लेकर अभिभावकों को लगातार जागरूक रहना चाहिए. अन्यथा आपके लाड-प्यार में ही बच्चों का बड़ा नुकसान हो जाता है.

हर बार सख्ती से पेश ना आएं

बच्चे के साथ हर बार सख्ती से पेश आना भी इनके लिए हानिकारक सिद्ध होता है. कई अभिभावकों की ऐसी आदत (parents bad behaviour) होती है कि वे बच्चे को हर बात पर डांटते हैं. खासकर जब बच्चा बिना इजाजत के कोई काम करे तो! बच्चे द्वारा खुद से काम करना माता-पिता को पसंद नहीं आता और वे उसके साथ सख्ती से पेश आते हैं. बार-बार ऐसा करने से बच्चे के मन में भय की भावना प्रबल होती रहती है और बच्चा आत्मनिर्भर नहीं बन पाता. कुछ भी करने से पहले उसके मन में ये बात जरूर आती है कि कहीं ऐसा किया तो डांट पड़ेगी. जिसकी वजह से उसे भविष्य में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. बेहतर होगा कि आप बच्चे को खुद से भी काम करने की इजाजत हैं और ध्यान रखें कि वो सही कर रहा है या गलत.

अगर सही है तो ठीक नहीं तो फिर आप उसे प्यार से भी समझा सकते हैं कि इस काम को और बेहतर तरीके से कैसे किया जा सकता है. इस तरह का व्यवहार बच्चे के भविष्य निर्माण में बेहद लाभदायक सिद्ध होता है.

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