Home Education शिक्षा की बदलती परिभाषा देश के लिए चुनौती!

शिक्षा की बदलती परिभाषा देश के लिए चुनौती!

शिक्षक व विद्यार्थी अपने-अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से करें तो शिक्षक दिवस का मकसद पूरा हो जाएगा. अन्यथा परिस्थितियां ज्यों की त्यों बनी रहेगी. Teachers Day

र्विद्यार्थियों पर संस्कार डालने में शिक्षक की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है. लेकिन आज की शिक्षा पद्धति पाश्चात्य विचारों पर आधारित है. पहले की तुलना में शिक्षक (Teachers Day in India) की अवधारणा काफी बदली है.

dr. radhakrishnan

अगर हम वैदिक काल की बात करें तो उस वक्त गुरू ही सबसे महान थे. विद्यार्थी उनके मुख से निकले हर शब्द को स्वीकार करते थे. गुरू के बोले हुए वचन को कभी काटा नहीं जाता था.

गुरू भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी करते थे. शिक्षक को समाज की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है. क्योंकि वे हमारा चरित्र निर्माण कर देश का आदर्श नागरिक बनने में मदद करता है.

शिक्षकों के योगदान से ही हम समाज में रहने लायक बनते हैं. यही वजह है कि हमारे भारतीय समाज में शिक्षक को माता-पिता का दर्जा दिया जाता है.

आज के युग में भी बहुत सारे शिक्षक अपने आदर्शों पर कायम हैं. लेकिन इसके विपरीत भी कई शिक्षक हैं, जो शिक्षा व शिक्षक (Teachers Day in India) के नाम को बदनाम करते हैं. उन्होंने अपने पेशे को व्यवसाय बना रखा है.

शिक्षा के व्यवसायीकरण की वजह से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों तक शिक्षा नहीं पहुंच पा रही. गरीबी के कारण जब उन्हें शिक्षा नहीं मिल पाती तो पढ़ने की इच्छा रहते हुए भी उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ती है.

शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की बदली रूपरेखा! (Teachers Day in India)

शिक्षक का योगदान हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है. और शिक्षक का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को जीने की सही कला सिखाना भी है.

शिक्षा का व्यवसायीकरण देश के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. देखा जाए तो दिन प्रतिदिन शिक्षा की इस व्यवस्था में इजाफा ही हो रहा है.

“देश में सबसे अच्छा मस्तिष्क शिक्षकों का होना चाहिए – डॉ राधाकृष्णन

अगर पहले के गुरू व आज के सर मैडम की बात की जाए तो दोनों में जमीन आसमान का अंतर है. पहले के गुरू निःस्वार्थ भाव से शिक्षा देते थे. जबकि आज की परिस्थितियां ऐसी नहीं है.

आज शिक्षा के बदले विद्यार्थियों से मोटी रकम वसूली जाती है. गुरू भौतिकतावादिता के जाल से मुक्त हुआ करते थे. सामाजिक बदलाव के साथ-साथ गुरू की परिभाषा भी बदली है.

राधाकृष्णन ने शिक्षकों को समर्पित किया जन्मदिन

आज के अधिकांश शिक्षक खुद को भौतिक सुख-सुविधा से दूर नहीं रख पा रहे हैं. शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी अपने कर्तव्यों के प्रति बचनबद्ध होना होगा.

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तब जाकर शिक्षक व विद्यार्थियों के बीच के रिश्ते मजबूत होंगे. यह तो आप जानते हैं कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस (Teachers Day in India) के रूप में मनाया जाता है.

हर वर्ष 5 सितंबर को इस दिवस का पालन किया जाता है. साल 1962 में जब वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने तो इनके छात्रों ने इनके जन्मदिन को ‘राधाकृष्णन दिवस’ के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की.

लेकिन राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों के विचारों को मना करते हुए कहा कि मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय अगर इस दिन को शिक्षक दिवस (Teachers Day in India) के रूप में मनाया जाता है तो यह मेरे लिए गौरव की बात होगी. और तभी से उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा.

शिक्षक दिवस से जुड़ी कुछ रोचक बातें हम आपको बताने जा रहे हैं.

1. डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद व लेखक थे. उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षकों के लिए समर्पित किया था. इसलिए वर्ष 1962 से प्रति वर्ष 5 सितंबर को पूरे देश में शिक्षक दिवस का पालन किया जाता है.

2. इंडिया में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है. वहीं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस का आयोजन 5 अक्टूबर को होता है. इस दिवस में एक रोचक तथ्य है कि इसका पालन पूरी दुनिया में होता है लेकिन हर जगह इसके लिए एक अलग दिन निर्धारित है.

teachers day

3. अमेरिका में मई के पूर्ण सप्ताह में मंगलवार को शिक्षक दिवस (Teachers Day in India) घोषित है. शिक्षक दिवस के मौके पर वहां सप्ताह भर विभिन्न तरह का आयोजन किया जाता है.

4. यूनेस्को ने अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 सितंबर को घोषित किया था. वर्ष 1994 से इस दिवस का पालन किया जाता है. शिक्षकों को सम्मान देने के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए इस दिवस का पालन किया जाता है.

5. वर्ष 1965 से 1994 तक में रूस में अक्टूबर महीने के प्रथम रविवार को इस दिवस का पालन किया जाता था. जबकि वर्ष 1994 से विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को ही मनाया जाने लगा.

जरूरी जानकारी (Teachers Day in India)

6. थाइलैंड में प्रति वर्ष 16 जनवरी को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस का पालन होता है. यहां पहली बार शिक्षक दिवस का पालन वर्ष 1957 में किया गया था. इस विशेष अवसर पर थाइलैंड में स्कूलों की छुट्टी रहती है.

7. तुर्की में शिक्षक दिवस 24 नवंबर को मनाया जाता है.

8. मलेशिया में 16 मई को इस दिवस का पालन होता है और इस खास दिन को हरि गुरु कहते हैं.

9. ईरान में वहां के प्रोफेसर अयातुल्लाह मोर्तेजा मोतेहारी की वर्ष 1980 में हत्या के बाद उनकी याद में 2 मई को शिक्षक दिवस मनाया जाता है.

10. रूस में 1965 से 1994 तक अक्टूबर महीने के पहले रविवार को शिक्षक दिवस मनाया जाता था.

समाज के वास्तुकार शिक्षकों के सम्मान में इस दिवस का पालन करने का मतलब शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों में भी कर्तव्य निष्ठा की भावना जागृत हो. #TeachersDay

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