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बेटी को पीटने पर गिरफ्तार हुए श्वेता तिवारी के पति, जानिए क्या होता है चाइल्ड एब्यूज?

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मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी इन दिनों संकट के दौर से गुजर रही हैं. बेटी के साथ मारपीट (Child Abuse Case) के आरोप में पुलिस ने श्वेता के पति अभिनव कोहली को गिरफ्तार किया है.

SHWETA TIWARI

श्वेता ने अभिनव पर बेटी पलक के साथ मारपीट व गंदी गालियां (Child Abuse) देने का आरोप लगाया है. श्वेता का आरोप है कि अभिनव शराब के नशे में हमेशा ही पलक के साथ बुरा बर्ताव करते हैं.

कई बार तो अभिनव पलक को मॉडलों की अश्लील तस्वीरें भी दिखाते थे. इन सभी हरकतों से परेशान होकर अंत में श्वेता ने थाने में शिकायत दर्ज की थी.

जिसके बाद पुलिस ने रविवार अभिनव को गिरफ्तार किया है. हर तरफ अभी यही चर्चा का विषय है. इससे पहले श्वेता ने अभिनेता राजा चौधरी से शादी की थी. लेकिन वो शादी भी नहीं चली.

घरेलू हिंसा की वजह से ही वर्ष 2007 में राजा के साथ भी उनका रिश्ता टूटा था. उन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उस वक्त उनकी एक बेटी थी पलक.

अभिनव के साथ ने श्वेता ने 13 जुलाई 2013 को शादी की थी. दो वर्ष पहले उन्हें एक बेटा हुआ है. अब फिर से उनकी दूसरी शादी भी टूटने के कगार पर है.

श्वेता ने मशहूर टीवी सीरियल कसौटी जिंदगी की से अपने करियर की शुरूआत की थी. इस सीरियल ने ही उन्हें पहचान दिलाई थी. इसके अलावा श्वेता ने कई फिल्मों में भी काम किया है. चर्चित शो बिग बॉस में भी वह नजक आ चुकी हैं.

जहां तक बच्चे के साथ मारपटी का मामला है तो, क्या आप जानते हैं कि बच्चे के साथ मारपीट करना अपराध की श्रेणी में आता है. कानून में इसके लिए सजा का भी प्रावधान है.

बच्चों को घरों में मिलने वाला दंड – Child Beating

बच्चों को घरों में मिलने वाला दंड (Child Abuse) हिंसा का सामान्य सा रूप से. यह हिंसा अधिकांश घरों में देखी जाती है. इस तरह के घरेलू हिंसा से पूरी दुनिया में 14 वर्ष तक की उम्र वाले करीब 1.3 अरब बच्चे प्रभावित हैं.

किसी भी गलती के लिए बच्चों को मारना बिल्कुल सही नहीं है. इनके साथ बचपन की गई मारपीट बच्चों के दिमाग में हमेशा के लिए बैठ जाती है.

बच्चों पर इसका मानसिक रूप से बुरा प्रभाव पड़ता है. हर बात पर बच्चे को मारने से किसी दिन बच्चा इससे दुःखी होकर कोई गलत कदम भी उठा सकता है.

हमेशा मारपीट करने वाले बच्चों के जिद्दी होने की संभावना भी बढ़ जाती है. क्योंकि उसे लगता है कि आप क्या करेंगे. बहुत होगा तो उसे पीटेंगे. बस बच्चा अपनी जिद शुरू करने लगता है.

देखा जाता है कि अक्सर वही बच्चे बिगड़ते हैं, जिसके घर वाले उसकी हर बात को नजरअंदाज करते हैं. हर बात पर उसे मारते हैं.

या फिर वे बच्चे बिगड़ते हैं जिनके माता-पिता उसे बहुत ज्यादा ही छूट देकर रखते हैं. बच्चों के साथ प्यार के साथ-साथ डांट फटकार जरूरी है. लेकिन मारपीट करना पूरी तरह गलत है.

क्योंकि इससे उनके उपर नकारात्मक प्रभाव ही पड़ता है. स्कूलों, कॉलेजों में भी बच्चे की पिटाई के कई सारे मामले आए दिन प्रकाश में आते रहते हैं.

पिटाई से अवसादग्रस्त हो सकता है बच्चा

लोग सोचते हैं कि बच्चे को अगर थोड़ी सी मार पड़ ही जाएगी तो क्या फर्क पड़ता है. उन्हें कितनी चोट लगेगी. लेकिन यह सोचना गलत है. क्योंकि बच्चे को मारा गया एक थप्पड़ भी उन्हें मानसिक रूप से गहरा सदमा पहुंचाते हैं.

मनोवैज्ञानिकों की मानें तो जिन बच्चों को गलती करने पर समझाने के बजाय पीटा जाता है, ऐसे बच्चे मानसिक रूप से परेशान रहते हैं.

ऐसे बच्चे अवसाद में जाने की वजह से या तो चुप रहने लगते हैं या फिर हिंसक हो जाते हैं. बच्चों में आत्मग्लानी की भावना बहुत जल्दी आती है.

जब बच्चा मारपीट के भय से अपनी बातों को किसी से बोल नहीं पाता तो वह चुप रहना शुरू कर देते हैं. घर-बाहर हर जगह लोगों से कटे-कटे रहते हैं.

कई बार तो अवसाद इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि बच्चा आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाता है. कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो इस तरह की सजा से आक्रामक हो जाते हैं.

धीरे-धीरे मन में गुस्सा भरने के बाद बच्चा हिंसात्मक हो जाता है. महिला व बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2007 में देशव्यापी सर्वेक्षण कराया था.

इसमें 13 राज्यों के 5-18 वर्ष के 12,447 बच्चों को शामिल किया गया था. इस सर्वेक्षण में पता चला था कि 4 में से 3 बच्चों के साथ मारपीट व शारीरिक दुर्व्यवहार किया जाता है.

परेशान करने वाली बात यह है कि 88.6 फीसदी बच्चों के साथ मारपीट उसके माता-पिता ही करते हैं.

यहां तक कि रोजाना की इक हरकत से बच्चे में तनाव. चिंता या अनिद्रा जैसी मानसिक बीमारी भी हो सकती है. माता-पिता का फर्ज है कि बच्चे की भलाई के लिए कोशिश करें कि उसे समझाकर ही समस्या का समाधान किया जाए.

भारत में कानून – Child Abuse

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 83 (7-12 साल तक के बच्चों के लिए) के मुताबिक स्कूल में होमवर्क पूरा ना करने, यूनिफॉर्म ना पहनने या किसी अन्य कारण से भी बच्चों को शारीरिक सजा (Child Abuse) नहीं दी जा सकती.

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के मुताबिक बच्चों के साथ किसी किस्म की क्रूरता नहीं की जा सकती. शिक्षा का अधिकार (आरटीआई) की धारा 17 के तहत बच्चों को किसी तरह की शारीरिक सजा देने पर पूरी तरह प्रतिबंध है.

बच्चों के साथ स्कूली अत्याचार को रोकने के लिए वर्ष 2012 में एक विधेयक पारित किया गया था. इस विधेयक के मुताबिक बच्चों को शारीरिक दंड देने पर वाले को तीन साल की जेल हो सकती है.

जहां तक बच्चों के अधिकार का सवाल है तो बच्चे मारपीट या किसी अन्य तरह की प्रताड़ना से कानून में सुरक्षित हैं. राइट टू एजुकेशन ऐक्ट के तहत टीचर भी बच्चे को डरा-धमका व पीट नहीं सकते.

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जानें जेजे ऐक्ट को – Child Abuse Case

वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता के अनुसार अगर बच्चे माता-पिता टॉर्चर करते हैं तो जेजे (जूवेनाइल) ऐक्ट के तहत थाने में शिकायत की जा सकती है.

बच्चे को अगर चोट पहुंची होती है तो आईपीसी के तहत केस दर्ज किया जाता है. जेजे ऐक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की सजा हो सकती है. यह मामला जमानती है.

आईपीसी में फंसने की संभावना – Child Abuse Case

मारपीट व आईपीसी की धारा 323 के तहत केस दर्ज होगा. यह केस गैर संज्ञेय होता है. इसमें आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती है. बच्चे को खुद ही अदालत में अपना केस लड़ना होता है.

जुर्म साबित होने पर जुर्माना या 1 साल की कैद भी हो सकती है. अगर बच्चे को धारदार हथियार से मारा जाता है तो धारा 324 लगाई जाती है.

इसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है. वहीं जानलेवा हमला करने पर 326 के तहत मुकदमा दर्ज होता है. इसमें 10 साल तक या उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है.

सिर पर चोट लगने पर 308 के तहत केस दर्ज होता है. जिसमें 3-7 साल तक की कैद हो सकती है. 326 व 308 दोनों ही धाराएं गैर जमानती हैं.

केस होने पर ये करें – Child Abuse Case

केस दर्ज होने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत लेनी होती है. अगर मामले में समझौता की गुंजाइश रहती है तो पिता-बच्चे की इच्छा से कॉम्प्रोमाइज हो सकता है.

लेकिन गंभीर धाराओं (326 व 308) में एफआईआर दर्ज होने पर मुकदमा का सामना करना पड़ेगा.

जो मामले गैर समझौतावादी होते हैं उसमें सिर्फ हाई कोर्ट से ही एफआईआर रद्द हो सकती है. अदालत में बच्चे को पीटने के पीछे का मोटिव भी देखा जाता है.

किसी भी तरह का शारीरिक दंड (Child Abuse) बच्चों के लिए हिंसक व अवसाद वाला भविष्य तैयार करता है. माता-पिता के ऐसे बर्ताव से बच्चे कुछ भी सीख नहीं पाते हैं. इसलिए बेहतर है अगर बच्चे को प्यार से समझाया जाए तो वो ज्यादा कारगर साबित होता है.

अगर आप भी अपने बच्चे को छोटी-छोटी बातों पर पीटते हैं तो अभी से ही इस आदत को भूल जाएं. क्योंकि इसमें बच्चे का कुछ भला नहीं होने वाला. #ChildBeating

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