Home Health Care आपको भी है स्पांडिलाइटिस? तो हो सकती है ये खतरनाक बीमारी!

आपको भी है स्पांडिलाइटिस? तो हो सकती है ये खतरनाक बीमारी!

स्पांडिलाइटिस बहुत ही खतरनाक बीमारी है. इसके प्रति लापरवाही बरतने से यह दिल फेफड़ा व आंत की समस्या का कारण बन सकता है. Spondylitis in Hindi

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पीठ व जोड़ों में दर्द की समस्या तो मानों आजकल हर घर में है. अधिकांश लोग ही इस समस्या से पीड़ित हैं. इस दर्द में रातों को सही से नींद नहीं आती और सोते वक्त भी देर रात दर्द की वजह से नींद खुल जाती है. अगर आपको भी पीठ व जोड़ों के दर्द की वजह से ऐसी समस्या है तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल भी ना करें.

क्योंकि यह बहुत ही गंभीर बीमारी है. इसलिए समय नष्ट किये बगैर चिकित्सक से परामर्श लीजिए. इस तरह के लक्षणों का कारण स्पांडिलाइटिस हो सकता है. यह स्पांडिलाइटिस इतनी खतरनाक बीमारी जिसकी वजह से दिल, फेफड़े, आंख व आंत संबंधी कई बीमारीयों का खतरा बना रहता है.

इससे बड़ी आंत में सूजन व आंखों में संक्रमण की शिकायत हो सकती है. नौजवानों में स्पांडिलाइटिस की शिकायत ज्यादा रहती है. ज्यादातर 30 से अधिक उम्र के लोग ही इस बीमारी के शिकार होते हैं. जिसमें पुरुष व महिलाएं सभी शामिल हैं.

स्पांडिलाइटिस – Spondylitis in Hindi:

यह एक किस्म का गठिया है, जिसमें दर्द की शुरुआत कमर से होती है. फिर धीरे-धीरे पीठ, गला, थाई, घुटना व टखनों में दर्द होता है. मुख्य रूप से यह रीढ़ की हड्डी से संबंधित रोग है. इसमें रीढ़ की हड्डी में सूजन आ जाती है. हर वक्त रीढ़ की हड्डी में अकड़न महसूस होती रहती है.

स्पांडिलाइटिस (Spondylitis in Hindi) होने पर जोड़ों में इंफ्लेमेशन के कारण असहनीय दर्द होता है. स्पांडिल का मतलब है कशेरुका वर्टिब्रा व आइटिस मतलब सूजन होता है. यानी कशेरुका या वर्टिब्रा (रीढ़ की हड्डी) में सूजन की शिकायत को ही स्पांडिलाइटिस कहते हैं. इस बीमारी में मरीज को गला उपर-नीचे व दाएं-बाएं करने में काफी दर्द होती है.

कारण (Cause) :

स्पांडिलाइटिस (Spondylitis in Hindi) का सबसे मुख्य कारण खराब लाइफस्टाइल है. चिकित्सकों का कहना है कि जब आप घंटों एक ही पोजिशन में बैठ कर काम करते हैं तो इसका बुरा प्रभाव गला व कमर पर पड़ता है. इससे गर्दन की हड्डी पर दबाव बढ़ता है.

जिस कारण पूरे शरीर को नियंत्रित करने वाले ब्लड सेल्स के डैमेज होने की संभावना रहती है. इसका असर जोड़ पर भी पड़ता है. स्पाइनल कॉर्ड पर भी दबाव पड़ता है. यह मामला इतना ज्यादा संवेदनशील है कि स्पाइनल कॉर्ड पर हल्का झटका लगने से लकवा तक का खतरा बना रहता है.

लगातार कंप्यूटर पर काम करने वाले व ज्यादा देर तक सिर झुकाकर काम करने वालों में ये बीमारी ज्यादा देखी जाती है. इसके अलावा भारी बोझ उठाने व चढ़ाने का काम करने वाले कमर और कंधें में स्पांडिलाइटिस की आशंका बढ़ जाती है.

एंकिलोसिंग स्पांडिलाइटिस

एंकिलोसिंग स्पांडिलाइटिस गठिया का एक प्रकार है. यह रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है. इस पीड़ा में बेचैनी ज्यादा होती है. इस गठिया में कंधों, एड़ियों, कुल्हों, हाथों व पैड़ों में तो दर्द होता ही है. इससे आंखें, फेफड़े व हृदय भी प्रभावित होता है.

जुवेनाइल स्पांडिलो अर्थराइटिस

यह स्पांडिलो (Spondylitis in Hindi) अर्थराइटिस 16 से कम उम्र के बच्चों में पाया जाता है. लेकिन यह बीमारी जब बच्चे व्यस्क हो जाते हैं तब उनमें दिखाई देता है. इसमें भी शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है.

कुल्हे, घुटना, जांघ में दर्द होता है. इसके प्रभाव से रीढ़, आंखें, त्वचा व आंत में भी खतरे की आंशका रहती है. इसमें थकान व आलस के साथ-साथ दर्द की शिकायत रहती है. इसके दर्द में बेचैनी ज्यादा होती है.

स्पांडिलाइटिस से बचाव

बहुत सारे लोगों से सुना जाता है कि लंबे समय तक बैठे रहने की वजह से उन्हें दर्द की समस्या है. इसमें गला व कमर दर्द सबसे मुख्य कारण है. इस तरह के दर्द को ही स्पांडिलाइटिस कहा जाता है.

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस सबसे ज्यादा गला व रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है. यह समस्या 10 में से 7 लोगों में दिखती है. शुरुआत के दिनों से अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए तो उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या गंभीर होने लगती है.

स्पांडिलाइटिस ज्यादातर जेनेटिक म्युटेशन के कारण होता है. एचएलए-बी जीन शरीर के प्रतिरोधी तंत्र को वायरस व बैक्टीरिया के प्रभाव की पहचान करने में मदद करता है.

लेकिन एक बात और है कि जीन जब खास म्युटेशन में होता है तो उसका स्वस्थ प्रोटीन संभावित खतरों की पहचान नहीं कर पाता है. इस प्रतिरोधी क्षमता की वजह से ही हड्डियों व जोड़ों में दर्द की समस्या होती है. फिर यही स्पांडिलाइटिस का कारण बनता है.

जांच जरूरी

एचएलए-बी 27 जांच करवाने से स्पांडिलाइटिस (Spondylitis in Hindi) का पता चल जाता है. यह जीन की श्रेणी में आता है इसलिए खून की जांच करवाने से इसका पता चल जाता है.

स्पांडिलाइटिस पता करने के और भी कई माध्यम है. जैसे एमआरआई से भी इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है. सही वक्त पर अगर इस बीमारी का पता चल जाता है तो फिर इलाज भी आसान हो जाता है.

इलाज (Treatment for Spondylitis):

चिकित्सक के अनुसार इसके कई मामलों में दवा व फिजियोथेरेपी से बीमारी को दूर किया जा सकता है. लेकिन जो मामले गंभीर रूप धारण कर लेते हैं उसमें सर्जरी करनी पड़ती है. स्पांडिलाइटिस एक गंभीर बीमारी है.

लेकिन दिक्कत है कि इस पर अब तक ज्यादा रिसर्च नहीं हुए हैं. इंडिया में अगर आयुर्वेद व एलोपेथिक पद्धति के साथ समन्वय बनाकर इस पर रिसर्च किया जाए तो इसका लाभ मिल सकता है. कुछ खास तरह की एक्सरसाइज करके भी इस बीमारी को दूर किया जा सकता है.

स्पांडिलाइटिस (Spondylitis) के दर्द से राहत पाने के लिए एक बेहतर उपाय है. जैसे जिस जगह पर आपको दर्द हो रही हो वहां गर्म पानी के बैग या बर्फ के टुकड़ों से सेक लेना चाहिए.

इस उपाय से आपको काफी राहत मिलेगी. जब कोई इलाज काम नहीं करता. जब इसकी दर्द से ब्रेन मस्तिष्क की नसें डैमेज होने लगती है. तब जाकर इसमें सर्जरी की सलाह दी जाती है

आप भी अगर लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं तो स्पांडिलाइटिस की समस्या का आना ज्यादा दूर नहीं है. इस आलेख में स्पांडिलाइटिस से राहत के कुछ सुझाव दिए गए हैं. अगर आप हमारे इन विचारों से सहमत हैं व आपका भी अगर इस बारे में कुछ सुझाव हो तो आप ‘योदादी’ के साथ कमेंट कर जरूर शेयर करें. #Spondylitis

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