Home Health Care सर्दियों में ऐसे करें नवजात बच्चे की देखभाल!

सर्दियों में ऐसे करें नवजात बच्चे की देखभाल!

यहां हम जानते हैं कि कैसे सर्दियों के दौरान नवजात बच्चे की देखभाल करनी चाहिए!

सर्दी का मौसम जितना सुहाना होता है, उतना ही सतर्क रहने की भी जरूरत है. खासकर बच्चे को इस समय अधिक केयर करने की जरूरत होती है. अगर आपका बच्चा नवजात है या फिर कुछ महीनों का ही है तो आपको अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता है. आखिर छोटे बच्चे अपनी समस्याओं के बारे में बोल भी तो नहीं सकते हैं. ऐसे में आपको अतिरिक्त ध्यान रखने के साथ ही हमेशा अलर्ट रहना होता है.

यहां हम जानते हैं कि कैसे सर्दियों के दौरान नवजात बच्चे की देखभाल करनी चाहिए!

माता-पिता के लिए छोटा बच्चा भगवान का दिया अमूल्य उपहार होता है. उस बच्चे से प्यारा और कोई नहीं हो सकता है. लिहाजा वे अपने बच्चे की देखभाल को लेकर खासे चिंतित रहते हैं. खासकर सर्दी के मौसम में बच्चे अधिक बीमार पड़ते हैं लिहाजा सही जानकारी रखना आवश्यक हो जाता है.

ठंढ के समय शिशुओं के पूरे शरीर को ढककर रखना चाहिए. अमूमन माताएं बच्चों की छाती को तो ढक देती हैं लेकिन पैर और सर खुला रह जाता है. लिहाजा बच्चों को ठंढ लगने का ख़तरा हो जाता है. ये महज गलत विश्वास है कि शिशु को ठंढ छाती के माध्यम से लगता है. जबकि सच्चाई ये है कि शिशु को पैरों व सिर से सर्दी लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. साथ ही ये भी बता दें कि शिशु की छाती को अधिक ढककर रखना सही नहीं होता है.

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विशेषज्ञों की मानें तो हमारे शरीर में ब्राऊन तथा वाइट ये दो प्रकार के सेल्स होते हैं. शरीर में 75 प्रतिशत ब्राऊन पार्ट जन्म से ही होते हैं जो हमारी छाती व पीठ का हिस्सा होता है। यह भाग हमारे शरीर को हर हाल में सुरक्षित रखने में सक्षम होता है. वहीं अगर शिशु की बात करें तो उनका शरीर अधिक संवेदनशील होता है. तापमान में होने वाले परिवर्तन के कारण उनके बीमार होने के चांसेज बढ़ जाते हैं.

गौरतलब है कि पूरे विश्व में लगभग 30 प्रतिशत शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारण लूज मोशन, निमोनिया व सांस की बीमारी है। भारत में तो स्थिति थोड़ी नाजुक है और शिशुओं में मृत्यु का यह आंकड़ा 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

आप रखें अपने शिशु का ख्याल –

सर्दियों में बच्चों की देखभाल करते हुए पेट से नीचे के भाग व पैरों को हमेशा ढंक कर रखना चाहिए। साथ ही छाती को उतना ही ढंकें, जितनी जरूरत हो. शिशु के शरीर को आवश्यकता अनुरूप ढंककर रखें. ठंड के समय बच्चे को नहलाना आवश्यक नहीं होता है, साफ-सफाई के लिए किसी साफ कपड़े को गर्म पानी में भिगो कर शरीर को पोछ दें. बच्चों को भरपूर नींद लेने देना चाहिए जो कि उसकी वृद्धि के लिए आवश्यक होता है.

बच्चे को समुचित आहार देते रहें, मां का दूध हर हाल में सर्वोत्तम होता है. सर्दियों में बच्चे को बाहर ले जाने से बचें तथा घर के हीटर को भी सामान्य रखें. अचानक तापमान परिवर्तन बच्चों के लिए बहुत हानिकारक होता है. सर्दियों में संक्रमण से बचाने के लिए बच्चे और मां को सर्दी-जुकाम वाले व्यक्ति से दूर ही रखें. बच्चे को गीलेपन से बचाकर रखें.

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अगर बच्चे को किसी प्रकार की स्वास्थ्यजनक समस्या हो तो तुरंत दिखाएं. डायरिया या हाइपोथर्मिया की समस्या बेहद नुकसानदेह हो सकता है. बच्चें को रोज 15 से 20 मिनट तक सुबह की धूप में टहलाना सेहतमंद हो सकता है. साथ ही नहलाने से पहले उसके शरीर की मालिश करना न भूलें.

एकदम छोटे बच्चे समस्या होने पर बोल नहीं पाते हैं, ऐसे में साए की तरह उनका देखभाल करें!

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