Home Trending Union Budget 2019: क्या हैं सरकारी बजट पर घरेलू अपेक्षाएं?

Union Budget 2019: क्या हैं सरकारी बजट पर घरेलू अपेक्षाएं?

5 जुलाई को केंद्रीय बजट पेश होना है. बजट से हर वर्ग की अपनी-अपनी उम्मीदें रहती है. हर कोई चाहता है कि उनके लिए बजट में कुछ बेहतर प्रावधान हो. Union Budget 2019

देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश करने वाली हैं. इस बजट की तैयारियां पूरी हो चुकी है. बस अब लोगों को बजट का इंतजार है. जो कि यह आम बजट है तो इससे हर किसी को बहुत सारी उम्मीदें रहती है.

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आम बजट (Union Budget) को लेकर हर किसी के अंदर यह जिज्ञासा रहती है कि बजट में उन्हें क्या मिला. जिसमें हर वर्ग की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं. जिसमें घरेलू महिलाएं की उम्मीदें अलग हैं तो कामकाजी महिलाओं की अलग.

कोई बिजनेस मैन है तो उसकी अपनी उम्मीदों है और कोई कोई नौकरी पेशा है उसकी अपनी. जहां तक नौकरी पेशा लोगों की बात है तो वे अपने लिए किछ राहत मिलने की उम्मीदें लगाए बैठे हैं.

वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें आयकर में छूट दे. जो घरेलू महिलाएं हैं उन्हें घरेलू खर्च में छूट चाहिए. ताकि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरी करने के बाद भविष्य के लिए कुछ पूंजी बचा सकें.

1. गृहणियों की उम्मीदें – Hopes of homemakers

गृहणियों की उम्मीदें हैं कि उनके घर खर्च कम हो. यानी किचेन में काम आने वाली चीजों की कीमत पहले से ही ज्यादा है. उस पर नियंत्रण जरूरी है. इनकी उम्मीदें हैं कि बजट (Union Budget) में किचेन में काम आने वाली चीजों की मूल्य वृद्धि नहीं होगी.

2. युवाओं की उम्मीदें – Union Budget

देश के भविष्य युवा ही होते हैं और देश की इनसे बहुत सारी उम्मीदें रहती है. लेकिन आगे बढ़ने के लिए युवाओं की सरकार से बहुत सारी उम्मीदें रहती है. सरकार की तरफ से युवाओं के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाए.

आज बेरोजगारी ही सबसे बड़ी समस्या है. पढ़े लिए युवा नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं. पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उन्हें ढ़ंग की नौकरी नहीं मिल रही. मानसिक तनाव से जूझने के कारण अंत में कई बार आत्महत्या तक की घटनाएं भी प्रकाश में आती है.

बजट (Union Budget) में युवाओं की इस समस्या का समाधान करने का प्रावधान हो. ताकि देश में रोजगार बढ़े. वहीं नॉन प्रोफेशनल कोर्स क लिए स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम की व्यवस्था की जाए. शिक्षा के क्षेत्र में फंड बढ़ाने की जरूरत है. जॉब ओरिएंटेड कोर्स पर विशेष ध्यान आकर्षित किया जाए.

ताकि उन्हें अपने भविष्य निर्माण में थोड़ी आसानी हो. इनके लिए सबसे जरूरी विषय है रोजगार. अगर सरकारी तौर पर इनके लिए रोजगार की पर्याप्त व्यवस्था का प्रावधान हो तो इन्हें नौकरी के लिए अन्य जगह भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

रोजगार के लिए औद्योगिक जगत की बेहतरी भी अच्छा माध्यम है. अगर उद्योग का विकास होगा तो युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

3. चिकित्सा क्षेत्र का विकास – Development of medical field

चिकित्सा के क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं में कमी की वजह से ही स्वास्थ्य जगत आए दिन सुर्खियों में रहता है. चाहे बगैर इलाज के मरीज की मौत का मामला हो या चिकित्सकों के साथ मारपीट जैसी घटना.

यहां चिकित्सकों की कमी भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी समस्या है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार को इस विभाग के लिए बजट की रकम में इजाफा करना चाहिए. तब जाकर स्थितियों में सुधार की संभावनाएं हैं.

अन्यथा स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहने वाली है. वहीं चिकित्सकों के लिए भी कर संबंधी प्रक्रिया को सरल करने की आवश्यकता है. साथ ही जो भी उम्रदराज चिकित्सक हैं उनके लिए पेंशन का प्रावधान किया जाए तो उनके लिए काफी सहूलियत होगी.

4. शिक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी – Union Budget

सरकार चाहे कितने दावे कर ले लेकिन सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. स्कूलों में संसाधनों की कमी आज भी बरकरार है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के लिए सरकार को इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

क्योंकि किसी भी देश का विकास वहां की शिक्षा व्यवस्था पर ही निर्भर करता है. सरकार को गिने-चुने नहीं बल्कि सभी क्षेत्रों मंश वृद्धि सुनिश्चित करने वाला बजट पेश करना चाहिए.

अब जरूरी बात यह है बजट (Union Budget) तो प्रति वर्ष पेश किया जाता है. जिसमें जनता को लुभाने के लिए हर तरह के प्रयास किये जाते हैं. बजट को बस लोक लुभावना नहीं बल्कि जनहित में उन तमाम घोषणाओं का सही वक्त पर क्रियान्वयन भी होना चाहिए. #UnionBudget

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