Home Annex World Population Day: जनसंख्या बढ़ने से क्या धरती समाप्त हो जाएगी?

World Population Day: जनसंख्या बढ़ने से क्या धरती समाप्त हो जाएगी?

भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में तेज रफ्तार से बढ़ती आबादी चिंता का विषय है. समय रहते अगर हम इसके प्रति सचेत नहीं होते हैं तो इसका खामियाजा हमें ही भुगतान पड़ेगा. World Population Day

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सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में तेज रफ्तार से बढ़ती आबादी (World Population Day) चिंता का विषय है. अलग-अलग देशों के लिए जनसंख्या से संबंधित अपनी समस्याएं हैं. जिसमें कुछ देश अपनी घटती जनसंख्या को लेकर परेशान है तो कुछ बढ़ती जनसंख्या को लेकर. जिसमें भारत अपनी निरंतर बढ़ती आबादी को लेकर परेशानी में है.

World Population Day

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की आबादी भी लगभग 1.41 अरब है जबकि भारत की 1.34 अरब. विश्व की कुल आबादी में चीन की 19 फीसद व भारत की 18 फीसद की हिस्सेदारी है. इस आंकड़े को देखें तो 2024 तक भारत चीन की आबादी को पार कर लेगा. वर्ष 2030 तक भारत की आबादी 1.5 अरब होने की पूरी संभावना है.

एक तो हमारी धरती का आकार सीमित है और दूसरा इस पर स्थित मौजूदा संसाधन भी. जैसे पानी, खेती के लायक जमीन. बढ़ती आबादी (World Population Day) इंसानों के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है. आबादी में अगर इसी तरह इजाफा होता रहा तो सवाल खड़ा होता है कि धरती आखिर कितने बोझ को अपने कंधे पर उठा पाएगी? बढ़ती जनसंख्या धरती के लिए खतरा है?

2100 तक 11 अरब होगी धरती की आबादी

हमारी धरती का आकार नहीं बढ़ने जा रहा. यहां मौजूद संसाधन भी अब बढ़ने वाले नहीं, जैसे पानी, खेती के लायक़ ज़मीन. जानकार अक्सर चेतावनी देते हैं कि बढ़ती आबादी, इंसानों के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि धरती, कितने इंसानों का बोझ उठा सकती है? क्या वाक़ई, बढ़ती आबादी, हमारी धरती को तबाह कर देगी?

जानकारी के मुताबिक दस हजार साल पहले तक धरती की आबादी (World Population Day) बहुत ज्यादा नहीं थी. तब धरती पर इंसानों की संख्या महज कुछ लाख ही थी. अठारहवीं सदी के आखिर में आकर धरती की आबादी ने सौ करोड़ का आंकड़ा छूआ था. वहीं 1920 तक धरती पर दो सौ करोड़ लोग हुए. अगर वर्तमान की बात की जाए तो अभी दुनिया की आबादी करीब 7 अरब से ज्यादा है.

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जानकारों का मानना है कि 2050 तक ये आंकड़ा लगभग 10 अरब छू जाएगा. वैश्विक स्तक पर पिछली एक सदी में आबादी इतनी तेजी से बढ़ी है कि सन् 2100 जाते-जाते धरती की आबादी 11 अरब होगी. अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि तब धरती व उस पर रहने वाले इंसानों की स्थिति कैसी होगी.

अधिक जनसंख्या के फायदे – World Population Day

जिस देश की जनसंख्या (World Population Day) अधिक होती है वह देश मानव संसाधन का इस्तेमाल विकास के कर सकती है. बाजार पर भी अधिक जनसंख्या का प्रभाव देखने को मिलता है. ज्यादा जनसंख्या वाले देश में विश्व की अधिकांश कंपनियां निवेश करने को इच्छुक रहती है. युवाओं की संख्या बढ़ने पर किसी भी देश की प्रगति में मदद मिलती है.

अधिक जनसंख्या के नुकसान –

  • इसके विपरीत अधिक जनसंख्या से देश को नुकसान भी होता है. सबसे प्रमुख बात यह है कि जनसंख्या की सीधा प्रभाव किसी भी देश के कृषि पर पड़ता है. जहां तक लोगों के जीवन स्तर की बात है तो अधिक आबादी का इस पर भी प्रभाव देखने को मिलता है. रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी उक्त देश के लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है.
  • इसका उदाहरण भारत स्वयं है. यहां की गरीबी ही बढ़ती जनसंख्या से होने वाले नुकसान को दर्शाती है. इसके अलावा यहां रोजगार की समस्या भी देख लीजिए. ज्यादा बच्चों का भरण-पोषण करना मुश्किल भरी ड्यूटी है. आबादी अगर कम हो तो देश में हो रहे विकास का लाभ सभी को बराबर मिलेगा.
  • जनसंख्या (World Population Day) अधिक होने पर प्रतिस्पर्धा बढ़ती है व दुनिया भर में असमानता व भेदभाव को बढ़ावा मिलता है. यह भी कहना गलत नहीं होगा कि नक्सलवाद जैसी समस्याओं का मूल कारण भी जनसंख्या वृद्धि ही है. क्योंकि इसी की वजह से समाज में अमीरी-गरीबी के बीच फासले बढ़ते हैं. जनसंख्या वृद्धि देश व समाज की तरक्की में भी बाधक है.
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  • वैश्विक स्तर पर खराब स्वास्थ्य गर्भवती महिलाओं की मृत्यु का एक प्रमुख कारण है. इसलिए जनसंख्या दिवस के माध्यम से लोगों का ध्यान प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी दिलाना है. इंडिया व चीन समेत दुनिया के कई देश बढ़ती जनसंख्या पर निगरानी रखने लगे हैं. जो-जो देश विकास की राह पर अग्रसर हैं, उन सभी देशों के सामने बढ़ती आबादी एक अहम मुद्दा बनी हुई है.

जनसंख्या वृद्धि के कारणों को जानना है जरूरी

  • जनसंख्या वृद्धि की एक बड़ी वजह शिक्षा के अभाव को भी माना जाता है.
  • कई बुजुर्ग ऐसे भी हैं जिनका मानना होता है कि अपनी पुश्तैनी संपत्ति संभालने के लिए अधिक से अधिक लड़के का होना जरूरी है. इस कारण कई बार ऐसा देखा जाता है कि ऐसी मानसिकता वाले लोग शादीशुदा जोड़ों पर बच्चे पैदा करने के लिए दबाव बनाते हैं.
  • भारत में आज भी कई ऐसे पिछड़े इलाके हैं जहां बाल विवाह की परंपरा आज भी प्रचलित है. बाल विवाह होने पर कम उम्र से ही बच्चे पैदा होना शुरू हो जाता है. जिसकी वजह से अधिक से अधिक बच्चे पैदा होने की संभावनाएं रहती है.
  • पुरुष प्रधान समाज व रूढ़ीवादी सोच के चलते लड़के की चाह में लोग एक या दो नहीं बल्कि कई बच्चे पैदा कर लेते हैं.
  • युवाओं की शादी करते वक्त परिवार नियोजन के महत्व की जानकारी नहीं देना भी जनसंख्या वृद्धि का एक मुख्य कारण है.
  • अशिक्षित लोगों की आज भी यही सोच रही है कि अधिक बच्चे खासकर लड़के बुढ़ापे का सहारा होते हैं.
  • गर्भ निरोधक की सही जानकारी के अभाव में भी जनसंख्या में वृद्धि होती है.

विश्व जनसंख्या दिवस – World Population Day

जनसंख्या वृद्धि जैसी गंभीर समस्या के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से ही 11 जुलाई 1989 से प्रति वर्ष जनसंख्या दिवस का पालन किया जाता है. इस दिन को मनाने का मूल उद्देश्य लोगों को जनसंख्या वृद्धि के प्रति जागरूक करना है. हर सेकेंड बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिए सबका जागरूक होना जरूरी है.

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इस दिन को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की शासी परिषद द्वारा पहली बार 1989 में तब हुई थी जब आबादी का आंकड़ा लगभग पांच बिलियन के करीब पहुंच गया था. संयुक्त राष्ट्र की गवर्निंग काउंसिल के फैसले के अनुसार वर्ष 1989 में विकास कार्यक्रम में विश्व स्तर पर समुदाय की सिफारिशों के आधार पर हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया.

जागरूकता जरूरी – World Population Day

जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए सरकार की तरफ से विशेष पहल करने की आवश्यकता है. सरकार की ओर से घर-घर जाकर जनसंख्या रोकने के तरीके व विकल्प की जानकारी दी जानी चाहिए. लोगों को बताना चाहिए कि 25-30 की उम्र के पहले शादी ना करने व 2 बच्चों के बीच कम से कम 5 वर्ष का अंतर रखें.

अगर कोई अधिक बच्चे पैदा करता है तो उसे सामाजिक स्तर से बहिष्कार करें. क्योंकि अगर हर कोई इसी तरह ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने लगे तो इसका असर हम सब के भविष्य पर देखने को मिलेगा.

इंसान को रहना तो धरती पर ही. कुदरती सुंदरता को बचाए रखते हुए हम सबको मिलकर अच्छे ढ़ंग से रहने के तरीके अपनाने चाहिए. अपने जीने के तरीके यानी रहन-सहन में बदलाव लाकर हम संसाधनों की कम से कम खपत कर सकते हैं. इसकी बदौलत ही हम सबको सुखी व संपन्न जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो सकता है. अगर आप मेरे विचारों से सहमत हैं तो ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें. #WorldPopulationDay

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