Home Education World Literacy Day: कहीं हम शिक्षा के मूल उद्देश्य भटके तो नहीं!

World Literacy Day: कहीं हम शिक्षा के मूल उद्देश्य भटके तो नहीं!

शिक्षा के बिना जिंदगी अधूरी है. अशिक्षित व्यक्ति कभी तरक्की नहीं कर सकता. ऐसे में जहां अशिक्षितों की संख्या अधिक होगी वह देश कैसे तरक्की कर सकता है. World Literacy Day

भारत की सबसे बड़ी समस्या शिक्षा है. शिक्षा (World Literacy Day) के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही सर्व शिक्षा अभियान लाया गया था. इस अभियान का फायदा भी हुआ है.

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यानी इस अभियान से पहले की तुलना में भारत में शिक्षा व्यवस्था का काफी सुधार हुआ है. हालांकि अभी इंडिया में पुरुष व महिलाओं के शिक्षा दर के आंकड़ों में काफी अंतर है.

पुरुषों की साक्षरता दर 82.14 है वहीं महिलाओं में इसका प्रतिशत सिर्फ 65.46 है। हालांकि सरकारी तौर पर महिला-पुरुष शिक्षा दर को समान करने के लिए विभिन्न तरह के कदम उठाए जा रहे हैं .

देश व समाज की तरक्की के लिए हर किसी का साक्षर (World Literacy Day) होना जरूरी है. हर घर तक साक्षरता तभी फैलेगी जब समाज के पढ़े-लिखे लोग आगे आएंगे.

साक्षरता दिवस शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने व परिवार, समाज और देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिए मनाया जाता है.

विश्व से अशिक्षा को समाप्त करने के उद्देश्य से ही वर्ष 1966 में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन) ने प्रतिवर्ष 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया था.

तभी से पूरे विश्व में इस दिन साक्षरता दिवस का पालन किया जाता है. जबकि वर्ष 2009-2010 को संयुक्त राष्ट्र साक्षरता दशक घोषित किया गया था. इस वर्ष हम 53वां ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ मना रहे हैं.

साक्षरता दिवस की आवश्यकता क्यूं?

इस बात को आप नकार नहीं सकते कि किसी भी क्षेत्र में सफलता व बेहतर जिंदगी जीने के लिए साक्षरता (World Literacy Day) महत्वपूर्ण है.

समाज के हर वर्ग के विकास के लिए, उनके अधिकारों को जानने के लिए व साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिए इस दिवस का पालन किया जाता है. साक्षरता किसी भी देश व परिवार की प्रतिष्ठा को बढ़ाने का अहम माध्यम है.

साक्षरता के फायदे – World Literacy Day

भारत में या देश-दुनिया में गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरूरी है. ये क्षमता सिर्फ साक्षरता में है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है.

जागरूकता से ही शिक्षित समाज –

साक्षरता का मतलब सिर्फ पढ़ना-लिखना या शिक्षित (World Literacy Day) होना नहीं है बल्कि यह लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों की माने तो पूरी दुनिया में चार अरब लोग साक्षर हैं. जबकि 1 अरब लोग आज भी पढ़-लिख नहीं सकते.

रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 127 देशों में 101 देश ऐसे हैं जो पूर्ण साक्षरता हासिल करने से काफी दूर हैं. इन देशों में भारत भी शामिल है.

वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 74 फीसदी नागरिक साक्षर हैं. वहीं ब्रिटिश शासन काल में मात्र 12 फीसदी लोग ही साक्षर थे.

साक्षरता दर में कमी की वजह – World Literacy Day

साक्षरता दर की कमी की मुख्य वजह विद्यालयों की कमी, स्कूल में शौचालय की कमी, गरीबी, जातिवाद, जागरूकता की कमी भी है.

जागरूक समाज में रहने के नाते हम सबको एक प्रण लेना चाहिए. वो ये कि साक्षरता की शुरूआत खुद से करनी चाहिए. हर व्यक्ति, हर घर से अगर इसकी शुरूआत की जाए तो आने वाले दिनों में भारत नई उंचाइयों को छूएगा.

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कैसे बढ़ाएं साक्षरता दर –

भारत में साक्षरता (World Literacy Day) दर बढ़ाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता के साथ-साथ उनके लिए प्रोत्साहन की भी व्यवस्था करनी होगी. गरीब बच्चों के शिक्षा हासिल करना कितना मुश्किल काम है, यह तो आप जानते ही हैं.

यहां के अधिकांश स्कूलों की टाइमिंग सुबह 9 या 10 बजे से लेकर 3-4 बजे तक होती है. ऐसे में जो गरीब बच्चे हैं यानी विभिन्न जगह काम करने वाले बच्चे उनके लिए शिक्षा ग्रहण करना मुश्किल हो जाता है.

क्योंकि स्कूल के समय में ही वे काम करते हैं. हमारे यहां गरीबी के कारण एक बड़ी आबादी के बच्चे को परिवार चलाने के लिए काम करना पड़ता है.

इनकी समस्याओं को देखते हुए अगर स्कूल के टाइमिंग को लचीला किया जाए तो बच्चे काम के साथ-साथ पढ़ाई भी कर पाएंगे.

भारत में साक्षरता दर – World Literacy Day

1. वर्ष 2011 की जनगणना को देखें तो इंडिया में अनपढ़ लोगों की संख्या 22 फीसद है.

2. वर्ष 2014 में भारत की साक्षरता दर में 10 फीसद वृद्धि हुई थी.

3. भारत का सबसे अधिक साक्षर राज्य केरल है. यहां 93.91 लोग शिक्षित हैं.

4. इसके बाद लक्षद्वीप में 92.28 फीसद लोग शिक्षित हैं.

5. वहीं मिजोरम में 91.58 फीसद, त्रिपुरा में 87.75 फीसद व गोवा में 87.40 फीसद लोग शिक्षित हैं.

6. अगर बिहार व तेलंगाना की बात करें तो सबसे कम शिक्षित लोगों की संख्या इन्हीं दो राज्यों में है. बिहार में 63.82 फीसद जबकि तेलंगाना में 66.50 फीसद लोग ही शिक्षत हैं.

7. धार्मिक आधार पर अगर आंकड़ों को देखें तो इंडिया के 42.72 फीसद मुस्लिम अशिक्षित हैं. हिंदुओं में 36.40 फीसद, सिख में 32.49 फीसद, बौद्ध में 28.17 फीसद व ईसाइयों में 25.66 फीसद लोग अशिक्षित हैं.

8. वहीं जैन में शिक्षितों की संख्या काफी है. इनमें 86.73 फीसद शिक्षत हैं.

9. इंडिया में करीब 61.6 फीसद पुरुष व 38.4 फीसद महिलाएं स्नातक स्तर से ऊपर तक पढ़े-लिखा हैं.

इस आलेख का मूल मकसद यही बताना है कि शिक्षा के बिना जिंदगी अधूरी है. अशिक्षित व्यक्ति कभी तरक्की नहीं कर सकता. ऐसे में जहां अशिक्षितों की संख्या अधिक होगी वह देश कैसे तरक्की कर सकता है. इसलिए घर-घर का शिक्षित होना जरूरी है. #WorldLiteracyDay

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