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नवजात शिशुओं में प्रदूषण से बढ़ रहा मौत का खतरा!

वायु प्रदूषण बड़ों के साथ-साथ बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है. इससे सालाना करीब 70 लाख से ज्यादा बच्चे मौत के शिकार हो रहे हैं. Air Pollution Effect on child

हवा में जहर घुलने की वजह से यह जीवनदायिनी हवा लोगों की मौत का कारण बन रही है. खासकर नवजात शिशुओं (Air Pollution Effect on child) के लिए शहरों की हवा में घुला प्रदूषण भी मौत का मुख्य कारण बन सकता है. जानकारी के मुताबिक, सालाना प्रदूषण के कारण करीब 70 लाख से ज्यादा बच्चे मौत के शिकार हो रहे हैं.

ये प्रदूषण नवजात बच्चों के लिए कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019 की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वायु प्रदूषण से मौत (Air Pollution Effect on child) का आंकड़ा स्वास्थ्य संबंधी कारणों से होना वाली मौत को लेकर तीसरा सबसे खतरनाक कारण है.

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इंसान अपनी सुख-सुविधाओं को पूरा करने के लिए पर्यावरण पर खासा नुकसान पहुंचा चुका है. वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण की बात करें तो अकेले दूषित हवा के कारण भारत में एक साल में करीब 12 लाख लोग मौत की आगोश में चले गए थे.

बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि 70 लाख से अधिक छोटे बच्चे हवा में घुले प्रदूषण के कारण 5 वर्ष से कम उम्र में ही मौत के शिकार (Air Pollution Effect on child) हो जाते हैं. यह प्रदूषण बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी बहुत घातक होता है. लेकिन 1 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वायु प्रदूषण जानलेवा साबित हो रहा है.

रिसर्च की मानें तो प्रदूषण वाले इलाकों में पैदा होने वाले नवजात शिशुओं में समय से काफी पहले ही मौत का खतरा बहुत ज्यादा होता है. हाल में हुई एक स्टडी में बताया गया है कि 1 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रदूषण का असर (Air Pollution Effect on child) इतना बुरा होता है कि यह प्रदूषण उनकी जान तक ले सकता है.

फेफड़े खराब कर सकता है वाहनों से निकलने वाला धुआं

लीसेस्टर यूनिवर्सिटी में किए गए एक रिसर्च के अनुसार सड़क पर गाड़ियों से निकलने वाला धुआं भी नन्हें शिशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. रिसर्च में कहा गया है कि जन्म के तीन महीने बाद तक अगर आप नन्हें शिशु को लेकर गाड़ियों के प्रदूषण से भरी सड़क पर नियमित यात्रा करते हैं तो शिशु के फेफड़ों का फंक्शन प्रभावित हो सकता है.

इन बच्चों में बहुत छोटी उम्र में ही अस्थमा, सांस या फेफड़ों से संबंधी खतरनाक बीमारियों का खतरा बना रहता है. और एक बात ध्यान रखने वाली है कि जिनके माता-पिता में धूम्रपान की लत होती है उनके बच्चों में इन बीमारियों की संभावना बहुत अधिक होती है.

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कार्डिफ यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन समेत अन्य जगह हुए अध्ययनों में यह तो जानकारी दी गई है कि वायु प्रदूषण सांस व हार्ट से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है. और यही वजह व्यक्ति के जल्दी मौत का कारण बनती है. जबकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया था कि छोटे बच्चों के लिए कौन से प्रदूषक खतरनाक होते हैं.

शिशु की मौत का कारण 3 जहरीले तत्व

शिशुओं को सबसे अधिक खतरा हवा में घुले बेहद छोटे धूल कणों और खतरनाक गैंसों की वजह से होता है. नन्हें शिशुओं (Air Pollution Effect on child) के लिए 3 सबसे ज्यादा खतरनाक प्रदूषक हैं – PM10 (पार्टिकुलेट मैटर 10), नाइट्रोजन डाईऑक्साइड (NO2) और सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2). जिन शहरों में या किसी इलाके में इनमें से कोई एक या इन सभी की मात्रा ज्यादा होती है, उन स्थानों में जन्म के एक साल के अंदर शिशु के मरने की संभावना 20-50 फीसद तक बढ़ जाती है.

शिशुओं का प्रदूषण से बचाव

1. आपका घर अगर सड़क के पास है तो ध्यान रखें कि घर के खिड़की दरवाजे हमेशा बंद रखें. जिससे हवा के साथ प्रदूषक बच्चे के फेफड़ों तक नहीं पहुंच सके.

2. कोशिश करें कि बहुत छोटे बच्चे को लेकर अधिक ट्रैफिक वाले रास्तों में रोजाना यात्रा ना करें. क्योंकि इसके माध्यम से भी बच्चों के फेफड़े में प्रदूषित वायु प्रवेश करने से उसे बीमार कर सकता है.

3. जन्म के समय शिशु को मां का गाढ़ा पीला दूध जरूर पिलाएं. क्योंकि यह दूध बच्चे की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. मां का गाढ़ा पीला दूध शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. इससे शिशु के फेफड़े मजबूत होते हैं.

4. घर में पूजा-पाठ तो अपकी दिनचर्या में शामिल है. तो ध्यान रखें पूजा के दौरान अगरबत्ती, धूपबत्ती, हवन सामग्री आदि के धुएं से 3 साल से छोटे बच्चे को एकदम दूर ही रखें.

5. मच्छरों को भगाने वाले कॉइल भी शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. 6 महीने से कम उम्र के शिशु को मच्छरों से बचाने के लिए धुएं वाले कॉइल या इलेक्ट्रोनिक मस्कीटो रिपेलेंट की जगह मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. क्योंकि इन सभी से निकलने वाला धुआं शिशु की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.

6. नवजात शिशु को अगर सांस लेने में दिक्कत, शरीर में नीलापन या ज्यादा रोने की समस्या हो तो उसे बगैर देरी किए चिकित्सक को दिखाएं. #AirPollution

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