Home Health Care जान का खतरा बन रही घर की विशुद्ध हवा!

जान का खतरा बन रही घर की विशुद्ध हवा!

घर के अंदर का प्रदूषण बाहर के प्रदूषण से कहीं ज्यादा खतरनाक है. इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण व सांस की बीमारी की आशंका भी बढ़ जाती है. Air Pollution

घर के अंदर का प्रदूषण बाहर के प्रदूषण से कहीं ज्यादा खतरनाक है. इस प्रदूषण (Air Pollution) का शिकार सबसे ज्यादा घर में रहने वाली महिलाएं ही होती हैं. खासकर किचन में काम करने वाली महिलाओं पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है. घरों के अंदर शुद्ध हवा का आदान-प्रदान नहीं होता.

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इसलिए विशेषज्ञों के अनुसार खाना पकाने के अलावा हानिकारक रसायनों व अन्य सामग्रियों के उपयोग से घर के अंदर का वातावरण खराब हो जाता है. बाहर के वायु प्रदूषण की तुलना में यह 10 गुणा अधिक नुकसानदायक है. घर के प्रदूषण (Air Pollution) की वजह से फेफड़ों में संक्रमण समेत सांस की बीमारी होने की भी आशंका बढ़ जाती है.

आज घर की हवा विशुद्ध होने का कारण यह है कि लोगों का रूझान सिर्फ और सिर्फ फ्लैट सिस्टम पर है. यहां फ्लैट में रहना और फिर ऑफिस में भी बंद कमरे में रहना. इस तरह की लाइफ स्टाइल भी विभिन्न रोगों का कारण है. क्योंकि लोगों के शरीर में शुद्ध हवा बिल्कुल नहीं लग रही है.

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया का कहना है कि लोगों के जीवन का 90 फीसद वक्त घरों के अंदर व्यतीत होता है. जबकि 50 फीसद से अधिक लोगों का समय ऑफिस में बीतता है. इन लोगों में भी सांस की बीमारी का खतरा बना रहता है. घर के अंदर की हवा (Air Pollution) किन-किन वजहों से दूषित हो रही है इसकी जानकारी हासिल करना भी है जरूरी.

ये रहे कारण –

सुगंधित कैंडल – Air Pollution

तेज सुगंध वाले कैंडल को जलाने से घर में टोलीन व बेंजीन जैसे गैस का मात्रा में वृद्धी हो जाती है. इसमें मौजूद कार्बन के कण से आपको सांस की बीमारी का खतरा रहता है. कभी-कभी तो ये सुगंधित कैंडल कैंसर का भी कारण बन जाते हैं.

रूम फ्रेशनर व फ्लोर क्लीनर भी खतरनाक – Air Pollution

रूम फ्रेशनर, फ्लोर क्लीनर, परफ्यूम व डियोड्रेंट से निकलने वाला रसायन घर के वायु को प्रभावित करता है. इन सबसे भी सांस की बीमारी का खतरा बना रहता है. दमा व अस्थमा के मरीजों के लिए यह खतरनाक साबित होता है.

धूम्रपान –

कुछ लोगों की आदत होती है कि वे घर के अंदर भी घूम्रपान करते हैं. धूम्रपान करना तो ऐसे ही सेहत के लिए हानिकारक है. लेकिन घर के अंदर करने से खतरे का आशंका बढ़ जाती है. घर में घूम्रपान करने से इसका धुआं (Air Pollution) घर से बाहर नहीं निकल पाता बल्कि यह कमरे के अंदर ही घूमता रहता है. सांस के माध्यम से यह घर के सभी सदस्यों के शरीर में प्रवेश करता है. जिससे घर के सदस्यों में कैंसर व ब्रोंकाइटिस का खतरा बना रहता है.

अपनाएं यह उपाय, होगा फायदेमंद – Air Pollution

  1. 1. घर की दीवारों पर ज्यादा वाष्पशील कार्बनिक यौगिक वाले रंगों का इस्तेमाल करने से बचें. क्योंकि इन रंगों में मौजूद विषाक्त पदार्थ सामान्य तापमान के अंदर मिलकर शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए घर की दीवारों पर कम वाष्पशील कार्बनिक योगिक वाले रंगों का इस्तेमाल करें.

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  1. 2. घर के अंदर धूम्रपान बिल्कुल ना करें. धूम्रपान करने से घर के अंदर की हवा में प्रदूषण के कण बढ़ जाते हैं. क्योंकि यह घर के अंदर की हवा को विशुद्ध करता है.
  1. 3. अगर विषाक्त उत्पादों का इस्तेमाल कम किया जाता है तो घर के अंदर की हवा में दूषित कणों की मात्रा कम हो जाती है. इसलिए कीटनाशक की जगह बायो-फ्रेंडली उत्पादों का ही इस्तेमाल करने की कोशिश करें.
  1. 4. आजकल इंडोर प्लांट लगाने का फैशन काफी चलन में है. इससे घर के अंदर का वातावरण पूरी तरह कीटाणु मुक्त रहता है. इसके लिए आप मनी नाक पौधा, मनी प्लांट आदि को घर के अंदर लगा सकते हैं.

रखें ध्यान –

  1. 5. घर में शुद्ध हवा प्रवेश करने में खिड़कियों का अहम योगदान होता है. घर की खिड़कियां रोजाना कम से कम 5-10 मिनट तक खुली रखें. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि पर्याप्त धूप व हवा (Air Pollution) नहीं लगने से घर के अंदर दूषित कणों और वायु संचालन में कमी आ जाती है. जिससे घर के वातावरण अस्वस्थ हो जाता है.
  1. 6. घर में स्थित गंदगी वातावरण को दूषित करता है. घर की सफाई करते वक्त कोने वाली जगह में विशेष ध्यान देना आवश्यक है. क्योंकि कोने वाली जगहों में अक्सर धूल जमें रहते हैं. यह धूल भी सांस की बीमारी का कारण बन सकती है.
  1. 7. कमरे के अंदर पानी टपकने की वजह से फंगस, फफूंदी जैसी समस्या शुरू होती है. इसकी वजह से अस्थमा व साइनस जैसी बीमारी को बढ़ावा मिलता है. इसलिए घर का सही रखरखाव जरूरी है. #AirPollution

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