Home Education Akbar-Birbal ki kahaniyan: बच्चों के लिए अकबर-बीरबल की 5 मजेदार कहानियां

Akbar-Birbal ki kahaniyan: बच्चों के लिए अकबर-बीरबल की 5 मजेदार कहानियां

अकबर-बीरबल की कहानियां सभी को गुदगुदाने के साथ-साथ सीख भी देती है. ये बच्चे और बड़े सभी के लिए प्रेरणादायी है. (Akbar-Birbal ki kahaniyan)

जब भी कभी बुद्धिमानी, चतुराई और हाजिर-जवाबी की बात होती है तो सबसे पहले बीरबल का नाम आता है. अकबर-बीरबल (Akbar-Birbal ki kahaniyan) की जुगलबंदी तो किसी से छुपी नहीं है. बीरबल को बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक अनमोल रत्न माना जाता है. अकबर-बीरबल से जुड़ी कई सारी ऐसी कहानियां हैं, जो सभी को गुदगुदाती है. इनकी कहानियां मनोरंजन के साथ-साथ खास सीख भी देती है. ये कहानियां बच्चे और बड़े सभी के लिए प्रेरणादायी है.

अपनी चतुराई से बीरबल ने बादशाह अकबर के दरबार में आए कई सारे पेचीदे मामलों के सुलझाया था. इसके अलावा वे हमेशा ही अकबर की ओर से दी गई चुनौतियों को खुशी-खुशी स्वीकार कर उसका हल भी निकाला करते. सदियों पुरानी ये कहानियां वर्तमान में भी अपना महत्व कायम रखता है.

आप अगर अपने बच्चे को मानसिक रूप से मजबूत बनाना चाहते हैं या फिर उसे दिमाग का इस्तेमाल करके शांत रहते हुए किसी भी समस्या का हल निकालना सिखाना हो तो अकबर-बीरबल की कहानियों से बेहतर और कोई ऑप्शन नहीं है.

यहां बताते हैं अकबर-बीरबल की वो कहानियां, जो बच्चों के जीवन को सही मार्ग देंगेAkbar-Birbal ki kahaniyan

1. मुर्गी पहले आई या अंडा?

एक दिन बादशाह अकबर की राजसभा में एक ज्ञानी पंडित आया. वह बादशाह से कुछ सवालों के जवाब जानना चाहता था, लेकिन बादशाह के लिए उस पंडित के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो गया. तब जाकर उन्होंने पंडित के सवालों के जवाब देने के लिए बीरबल को आगे कर दिया. बीरबल की चतुराई से सभी परिचित थे. सभी को उम्मीद थी कि बीरबल पंडित के हर सवाल का जवाब आसानी से दे देंगे.

पंडित ने बीरबल से कहा कि मैं तुम्हें दो विकल्प देता हूं. पहला या तो तुम मुझे मेरे 100 आसान से सवालों के जवाब दे दो या फिर मेरे एक मुश्किल सवाल का जवाब दो. बीरबल ने कुछ देर सोच-विचार करने के बाद कहा कि मैं आपके एक मुश्किल सवाल का ही जवाब देना चाहता हूं.

तब पंडित ने बीरबल से पूछा कि, बताओ मुर्गी पहले आई या अंडा? बीरबल ने पंडित को तुरंत ही उत्तर दिया कि मुर्गी पहले आई. फिर पंडित ने पूछा कि तुम इतनी आसानी से कैसे बोल सकते हो कि मुर्गी ही पहले आई. इसका जवाब देते हुए बीरबल ने पंडित से कहा कि यह तो आपका दूसरा सवाल है और मुझे आपके एक सवाल का ही जवाब देना था.

यह सुनने के बाद तो पंडित, बीरबल के सामने कुछ बोल नहीं पाया और बिना बोले ही दरबार से चला गया. इस दिन भी अकबर, बीरबल की चतुराई और अक्लमंदी को देखकर हमेशा की तरह ही बहुत खुश हुए. बीरबल ने साबित कर दिखाया कि बादशाह अकबर के दरबार में सलाहकार के रूप में बीरबल का रहना कितना जरूरी है.

कहानी से शिक्षा

संयम रखते हुए और सही तरह से दिमाग लगाने से हर सवाल का जवाब और हर समस्या का हल निकाला जा सकता है.

2. चोर की दाढ़ी में तिनकाAkbar-Birbal ki kahaniyan

बहुत समय पहले की बात है, बादशाह अकबर की सबसे प्यारी अंगूठी गुम हो गई. काफी ढ़ूंढ़ने के बाद भी जब अंगूठी नहीं मिली तो बादशाह चिंतित हो गए. उन्होंने इसका जिक्र बीरबल से किया. इस पर बीरबल ने अकबर से पूछा, महाराज आपने अंगूठी कब उतारी थी और उसे कहां रखा था. बादशाह कहते हैं, ‘मैंने नहाने से पहले अपनी अंगूठी को अलमारी में रखा था और जब नहा कर वापस आया, तो अंगूठी अलमारी में नहीं थी.’

फिर बीरबल ने अकबर से कहा कि तब तो अंगूठी गुम नहीं चोरी हुई है और यह सब महल में साफ-सफाई करने वाले किसी कर्मचारी ने ही किया होगा. यह सुनते ही बादशाह ने सभी सेवकों को हाजिर होने को कहा. उनके कमरे की साफ-सफाई करने के लिए 5 कर्मचारी तैनात थे और पांचों हाजिर हो गए. सेवकों के हाजिर होने के बाद बीरबल ने सभी से कहा कि ‘महाराज की अंगूठी चोरी हो गई है, जो अलमारी में रखी थी.

अकबर-बीरबल…

यदि आप में से किसी ने उठाई है तो बता दे नहीं तो मुझे अलमारी से ही पूछना पड़ेगा. इसके बाद बीरबल अलमारी के पास जाकर कुछ फुसफुसाने लगे और फिर मुस्कुराते हुए पांचों सेवकों से कहा, ‘चोर मुझसे बच नहीं सकता है, क्योंकि चोर की दाढ़ी में तिनका है.’ यह सुनकर वहां उपस्थित पांचों सेवकों में से एक ने सबसे नजर बचाकर दाढ़ी में हाथ फेरा और जैसे कि वह तिनका निकालने की कोशिश कर रहा था कि बीरबल की नजर उस पर पड़ गई और सिपाहियों को तुरंत चोर को गिरफ्तार करने का आदेश दिया.

बादशाह अकबर ने जब उससे सख्ती से पूछा, तो उसने अपना गुनाह कबुल कर लिया और बादशाह की अंगूठी वापस कर दी और बादशाह अकबर अपनी अंगूठी पाकर बहुत प्रसन्न हुए.

कहानी से शिक्षा

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि ताकत की जगह दिमाग का इस्तेमाल करने से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है.

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3. रेत से चीनी अलग करनाAkbar-Birbal ki kahaniyan

एक दिन बादशाह अकबर, बीरबल समेत सभी मंत्रीगण दरबार में बैठे हुए थे और सभा की कार्यवाही चल रही थी. एक-एक करके राज्य के सभी लोग अपनी समस्याएं लेकर दरबार में उपस्थित हो रहे थे. इसी बीच वहां एक व्यक्ति दरबार में पहुंचा, जिसके हाथ में एक मर्तबान था. सभी लोग उस मर्तबान की ओर देख रहे थे, तभी अकबर ने उस व्यक्ति से पूछा- ‘क्या है इस मर्तबान में?’

उस व्यक्ति ने कहा कि महाराज इसमें चीनी और रेत का मिश्रण है. अकबर ने फिर पूछा ‘क्यों?’ तब दरबारी ने कहा–‘गलती माफ हो महाराज, लेकिन मैंने बीरबल की बुद्धिमता के कई किस्से सुने हैं. इसलिए मैं उनकी परीक्षा लेना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि बीरबल इस रेत में से बिना पानी का इस्तेमाल किए ही चीनी का एक-एक दाना अलग कर दें.’ यह सुनते ही सभी हैरानी से बीरबल की ओर देखने लगे.

अकबर-बीरबल…

तभी अकबर ने बीरबल की ओर देखा और कहा कि ‘देख लो बीरबल, अब तुम कैसे इस व्यक्ति के सामने अपनी बुद्धिमानी का परिचय दोगे. बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, महाराज हो जाएगा, यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है. सभी लोग हैरान थे कि बीरबल ऐसा क्या करेंगे कि रेत से चीनी अलग-अलग हो जाएगी? बीरबल उठे और उस मर्तबान को लेकर महल में मौजूद बगीचे की ओर बढ़ चले. उनके पीछे-पीछे वह व्यक्ति भी था.

बीरबल (Akbar-Birbal ki kahaniyan) बगीचे में एक आम के पेड़ के नीचे पहुंचकर मर्तबान में मौजूद रेत और चीनी के मिश्रण को एक आम के पेड़ के चारों तरफ फैलाने लगे. तभी इसे देख उस व्यक्ति ने पूछा, ‘अरे यह क्या कर रहे हो?’ इस पर बीरबल ने कहा ये आपको कल पता चलेगा और इसके बाद दोनों महल में वापस आ गए. अब हर किसी को कल सुबह का इंतजार था. अगली सुबह दरबार लगने पर अकबर और सारे मंत्री एक साथ बगीचे में पहुंचे. साथ में बीरबल और रेत व चीनी का मिश्रण लाने वाला वह व्यक्ति भी था. सभी आम के पेड़ के पास पहुंचे.

अकबर-बीरबल…

वहां मौजूद लोगों ने देखा कि अब वहां सिर्फ रेत पड़ी हुई है. रेत में मौजूद चीनी को चीटियों ने निकालकर अपने बिल में इकट्ठा कर लिया था और कुछ बची चीनी को कुछ चीटियां उठाकर अपने बिल में ले जा रही थीं. इस पर उस व्यक्ति ने बीरबल से पूछा, ‘चीनी कहां गई?’ तो बीरबल ने कहा, ‘रेत से चीनी अलग हो गई है.’यह सुन कर सभी जोर-जोर से हंसने लगे. बीरबल की यह चतुराई देख अकबर ने उस व्यक्ति से कहा, ‘अब अगर तुम्हें चीनी चाहिए तो फिर तुम्हें चीटियों के बिल में घुसना पड़ेगा. ’ इस पर सभी ने फिर से ठहाका लगाया और बीरबल की तारीफ करने लगे.

कहानी से शिक्षा

किसी को नीचा दिखाने की कोशिश आपके लिए हानिकारक हो सकती है.

4. बीरबल की खिचड़ी

ठंड के मौसम में बादशाह अकबर अपने बागीचे में बीरबल व एक अन्य मंत्री के साथ टहल रहे थे. टहलते हुए अकबर ने अपने मंत्री से कहा, इस साल कुछ ज्यादा ही ठंड पड़ रही है. महल से बाहर निकलते ही ठंड से हालत खराब हो रही है? मंत्री ने बादशाह को जवाब देते हुए कहा, “जी हुजूर, बिल्कुल सही फरमाया आपने. इस साल तो ठंड इतनी पड़ रही है कि जनता ने घर से बाहर निकलना बहुत कम कर दिया है.”

टहलते-टहलते बादशाह बगीचे में बने तालाब के किनारे पहुंचे. जैसे ही उन्होंने अपना हाथ पानी में डाला तो उन्हें एहसास हुआ कि पानी बर्फ जैसा ठंडा है. पानी से हाथ बाहर निकालते हुए अकबर ने कहा “बिल्कुल सही कह रहे हैं आप, इतनी ठंड में कौन घर से बाहर निकलेगा.”

बीरबल को चुपचाप देख बादशाह ने उससे पूछा, “इस बारे में आपका क्या ख्याल है, बीरबल?” बीरबल ने सिर झुकाते हुए बोला, “माफी चाहता हूं हुजूर, इस बारे में मेरा ख्याल थोड़ा अगल है. मैं आप दोनों की बातों से सहमत नहीं हूं.”

अकबर-बीरबल…

अकबर ने आश्चर्यचकित होकर बीरबल से पूछा, “अच्छा, तो बताइए, क्या ख्याल है आपका.” बीरबल ने कहा, “हुजूर मेरा मानना है कि एक गरीब व्यक्ति के लिए पैसा ही सबसे ज्यादा जरूरी है. उसे इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता कि मौसम कितना ठंडा या गर्म है” बादशाह ने हैरान होकर बीरबल से कहा, “तो आप यह कह रहे हैं कि इस कड़ाके की सर्दी में भी एक गरीब आदमी कोई भी ऐसा काम करने को तैयार हो जाएगा, जिससे उसे पैसा मिल सके.” बीरबल ने उत्तर दिया, “जी हुजूर, मैं यही कह रहा हूं.”

अकबर ने बीरबल को चुनौती देते हुए कहा, “तो ठीक है, अगर आपने बर्फ जैसे पानी से भरे इस तालाब में किसी को रात भर खड़ा रखकर इस बात को प्रमाणित कर दिया, तो हम आपके लाए हुए गरीब व्यक्ति को 20 सोने के सिक्के इनाम में देंगे.”बादशाह की बात से सहमत होते हुए, बीरबल ने अगले दिन एक गरीब व्यक्ति को पेश करने का वादा किया.

अकबर-बीरबल…

अगले दिन सभा में बादशाह ने बीरबल ने पूछा कि क्या वो किसी को लेकर आए हैं, जो तालाब में खड़ा रहकर पूरी रात बिता सके. तभी बीरबल ने गंगाधर नामक एक गरीब व्यक्ति को दरबार में मौजूद किया और कहा कि यह 20 सोने के सिक्कों के लिए तालाब में पूरी रात बिताने को तैयार है. बादशाह अकबर ने सभा समाप्त करते हुए कहा कि ठीक है, दो सिपाही इस व्यक्ति की रातभर निगरानी करेंगे.

अगले दिन सुबह फिर दरबार लगा और बादशाह ने बीरबल से गंगाधर के बारे में पूछा, “बीरबल, कहां है आपका मित्र? कितनी देर टिक पाया वो उस बर्फीले पानी में?” बीरबल ने कहा, महाराज वो यहीं है. मैं अब उसे दरबार में पेश करने की इजाजत चाहता हूं.” इजाजत मिलते ही बीरबल ने गंगाधर को दरबार में बुलाया.

बादशाह ने गंगाधर को शाबाशी देते हुए कहा, “हमें इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि तुम पूरी रात उस बर्फ जैसे पानी में रहे और आज हमारे सामने सही-सलामत खड़े हो. पूरी सभा को बताओ कि ये तुमने कैसे किया?

अकबर-बीरबल…

गंगाधर ने कहा, महाराज, शुरू में तो यह बहुत मुश्किल काम था, लेकिन कुछ समय बाद, मुझे महल की एक खिड़की पर एक दीया जलता नजर आया. उस दीये को देखते हुए ही हमने सारी रात बिता दी. यह सुनते ही बादशाह अकबर ने चौंककर कहा, “यह तो धोखा है, तुमने हमारे महल के जलते दीये की गर्मी से सारी रात बिता ली. फरेबी! तुम्हारे इस धोखे के लिए हम तुम्हें सजा नहीं दे रहे हैं, लेकिन तुम अब इस इनाम के हकदार भी नहीं हो।” यह कहते हुए अकबर ने अपने सिपाहियों से गंगाधर को महल से बाहर ले जाने को कह दिया और सभा समाप्त करके अपने कमरे में चले गए.

अगले दिन फिर सभा लगी, जब बादशाह अकबर सभा में आए, तो उन्होंने देखा कि सभी दरबारी अपनी-अपनी जगह पर मौजूद थे, सिवाय बीरबल के. अकबर ने एक सिपाही से पूछा कि बीरबल कहां है, तो उसने बताया कि वो आज महल नहीं आए हैं. बादशाह ने सिपाही को निर्देश दिया कि वो तुरंत बीरबल के घर जाए और उन्हें लेकर आए.

कुछ समय बाद, सिपाही अकेले दरबार लौट आया. बादशाह के पूछने पर सिपाही ने बताया, “बीरबल अपने घर में खाना पका रहे हैं और उन्होंने कहा है कि खाना पूरी तरह पक जाने के बाद ही वो दरबार आएंगे.” सिपाही की यह बात सुनकर बादशाह सोच में पड़ गए, क्योंकि इससे पहले कभी भी बीरबल ने महल आने में देर नहीं की थी. तब अकबर को कुछ संदेह हुआ और उन्होंने बीरबल के घर जाने का निर्णय लिया.

अकबर-बीरबल…

जब अकबर, बीरबल (Akbar-Birbal ki kahaniyan) के घर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बीरबल ने एक ऊंची खूंटी पर एक हांडी टांग रखी है और उसके नीचे जमीन पर लकड़ियां जला रखी है. वो आश्चर्यचकित हो गए और बीरबल से पूछा कि वह क्या कर रहे हैं. इस पर बीरबल ने जवाब दिया कि वह अपने भोजन के लिए खिचड़ी पका रहे हैं. बादशाह अकबर ने कहा, “तुम क्या पागल हो गए हो? यह खिचड़ी कैसे पक सकती है. क्योंकि तुमने हांडी को इतने ऊपर टांग रखा है और आग नीचे जल रही है. ऐसे खिचड़ी पकने के लिए हांडी तक गर्मी कैसे पहुंचेगी?

इस बात पर बीरबल ने बादशाह से कहा, “क्यों नहीं पहुंचेगी हुजूर? जब महल की खिड़की पर रखे एक दीये से गंगाधर को गर्मी मिल सकती है, तो मेरी खिचड़ी की हांडी तो फिर भी आग के बहुत नजदीक है.”

बीरबल की बात सुनकर बादशाह हैरान हो गए और मुस्कुराते हुए कहा, “हम तुम्हारी बात अच्छी तरह समझ गए बीरबल.” इसके बाद उन्होंने गंगाधर को महल में बुलवाया और उसे 20 सोने के सिक्कों का इनाम दिया. साथ ही बीरबल की चतुराई के लिए उन्होंने बीरबल को भी इनाम दिया.

कहानी से शिक्षा

बीरबल की खिचड़ी की कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों की सफलता के पीछे किए गए परिश्रम को जाने बगैर उनके बारे में राय नहीं बनानी चाहिए.

5. गलत आदतAkbar-Birbal ki kahaniyan

एक बार बादशाद अकबर (Akbar-Birbal ki kahaniyan) किसी बात को लेकर बहुत परेशान रहने लगे थे. जब दरबारियों ने उनसे परेशानी का कारण पूछा, तो बादशाह बोले, ‘हमारे शहजादे को अंगूठा चूसने की बुरी आदत पड़ गई है, कई कोशिश के बाद भी हम उनकी यह आदत छुड़ा नहीं पा रहे हैं.’

बादशाह की परेशानी सुनकर किसी दरबारी ने उन्हें एक फकीर के बारे में बताया, जिसके पास हर मर्ज का इलाज था. फिर क्या था, अकबर ने उस फकीर को दरबार में आने का निमंत्रण भेजा.

फकीर जब दरबार में आया तो बादशाह अकबर ने उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताया. फकीर ने बादशाह की परेशानी को दूर करने का वादा किया और इसके लिए एक हफ्ते का समय लिया.

एक हफ्ते के बाद फकीर दरबार में आया, तो उन्होंने शहजादे को अंगूठा चूसने की बुरी आदत के बारे में प्यार से समझाया और उसके नुकसान भी बताए. फकीर की बातों का शहजादे पर प्रभाव पड़ा और उसने अंगूठा न चूसने का वादा किया.

अकबर-बीरबल…

तब दरबारियों ने बादशाह से कहा, ‘जब यह काम इतना आसान था, तो फकीर ने इतना समय क्यों लिया. आखिर उस फकीर ने क्यों दरबार का और आपका समय खराब किया.’ बादशाह दरबारियों की बातों में आकर फकीर को दंड देने की ठान ली.

सारे दरबारी बादशाह अकबर का समर्थन कर रहे थे, लेकिन बीरबल चुपचाप था. बीरबल को चुप देख, अकबर ने पूछा, ‘तुम क्यों शांत हो बीरबल?’ बीरबल ने कहा, ‘जहांपनाह गुस्ताखी माफ हो, लेकिन फकीर को सजा देने के स्थान पर उन्हें सम्मानित करना चाहिए और हमें उनसे कुछ सीखना चाहिए.’

तब अकबर ने गुस्से में कहा, ‘तुम हमारे फैसले के खिलाफ जा रहे हो. आखिर तुमने ऐसा सोच भी कैसे लिया, जवाब दो.’

अकबर-बीरबल…

तब बीरबल ने बादशाह से कहा, ‘महाराज पिछली बार जब फकीर दरबार में आए थे, तो उन्हें चूना खाने की बुरी आदत थी. आपकी बातों को सुनकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ था. इसलिए उन्होंने पहले अपनी इस गंदी आदत को छोड़ने का फैसला लिया फिर शहजादे की गंदी आदत छुड़ाई.’

बीरबल की बात सुन दरबारियों और बादशाह अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ और सभी ने फकीर से क्षमा मांगकर उसे सम्मानित किया.

कहानी से शिक्षा

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