Home Health Care …तो इसलिए रोते हैं बच्चे, ऐसे करें शांत।

…तो इसलिए रोते हैं बच्चे, ऐसे करें शांत।

छोटे बच्चों का रोना तो सामान्य बात है. लेकिन कभी-कभी इनके रोने के कारणों का पता नहीं चलना आपके लिए परेशानी का सबब बन जाता है. Crying Baby

छोटे बच्चों का रोना (Crying Baby) तो सामान्य बात है पर कुछ बच्चे बहुत ज्यादा ही रोते हैं. आपने देखा भी होगा कई बच्चों की ऐसी आदत होती है कि वे बिना किसी वजह के हर वक्त रोते ही रहते हैं. जब रोना शुरू करते हैं तो जल्दी चुप भी नहीं होते.

crying baby

जबकि कुछ बच्चे विशेष परेशानी होने पर ही रोते हैं. लेकिन इन शिशुओं के रोने की वजह पता करना बहुत मुश्किल होता है. क्योंकि वे बोल नहीं पाते हैं. ऐसे में बच्चे के रोते ही मां उन्हें शांत करने के लिए स्तनपान कराने लगती हैं.

कभी-कभी वह दूध पीने के बाद चुप हो जाता है लेकिन कई बार उसका रोना (Crying Baby) लगातार जारी रहता है. क्योंकि उसके रोने की वजह कुछ और होती है. बच्चे की बेहतर परवरिश के लिए यह जानना भी जरूरी है कि बच्चे रोते क्यों हैं? उन्हें चुप कराने के तरीके क्या हैं?

यहां जानते हैं बच्चों के रोने की वजह व चुप कराने के टिप्स –

ये रहा रोने का कारण

भूख लगना (Due To Hunger)

सामान्य तौर पर शिशु को भूख लगते ही वह रोना शुरू कर देता है. शिशु के रोने का सबसे मुख्य कारण इसे ही माना जाता है. मां भी इस कारण का अंदाजा लगा लेती हैं. लेकिन अगर आप बच्चे के भूख लगने के संकेत को नहीं पहचान पा रहीं तो इसे सीखना जरूरी है.

जैसे शिशु को भूख लगने पर वह अपनी उंगलियों को मुंह में डालता है. अपने होठों को चूसता है और मां के पास जाने के लिए बेचैन रहता है. इन संकेतों से आपको पता चल सकता है कि शिशु भूख लगने की वजह से ही रो रहा है.

दांत निकलना

दांत निकलते वक्त ज्यादातर बच्चे ही रोते हैं. क्योंकि इस दौरान उनके मसूढ़ों में तेज दर्द होती है. दांत आने के दौरान बच्चों का शरीर तो गर्म रहता ही है. इसमें पेट भी खराब हो जाता है. शिशु के लिए इन दोनों तकलीफों को बर्दाश्त करना मुश्किल होता है और वह रोता रहता है. लेकिन दांत निकलने के बाद उनका दर्द कम हो जाता है और बच्चे को राहत मिलती है.

पेट में दर्द (Stomach Pain)

जब शिशु के पेट में किसी तरह की परेशानी होती है तो वह रोना शुरू (Crying Baby) कर देता है. ध्यान देने वाली बात है कि अगर आपका शिशु स्तनपान कराने के तुरंत बाद ही तेज-तेज रोना शुरू कर देता समझ लीजिए उसके पेट में दर्द है. इस पेट दर्द को ठीक करने के लिए शिशु को एंटी गैस ड्रॉप पानी में मिलाकर दें. यह गैस ड्राप जड़ी बूटियों और सोडियम बाइकार्बोनेट का बना होता है. जो कि बहुत प्रभावी होता है.

ठंड व गर्मी का प्रभाव

बच्चे को ना तो ज्यादा ठंड बर्दाश्त होती है और ना ही ज्यादा गर्मी. तेज ठंड में भी वह रोता है और अधिक गर्मी में भी. शिशु की त्वचा बहुत ही ज्यादा संवेदनशील होती है. जिस कारण सामान्य तापमान का भी उनकी त्वचा पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है.

कपड़े गीले होने पर भी वे असहज महसूस करने लगते हैं. जब बच्चा अंडरवियर में ही पेशाब कर देता है और मां देरी तक उसे नहीं बदलती है. लंबे समय तक भीगा अंडरवियर पहन कर रखने से बच्चे की त्वचा में खुजली शुरू हो जाती है और वह रोने लगता है.

डायपर गीला होने पर (Crying Baby)

शिशु का डायपर जब गंदा या गीला हो जाता है तो उसे बेचैनी होने लगती है. जब बच्चा बेचैन होता है तो वह रोना (Crying Baby) शुरू कर देता है. छोटे बच्चे की एक आदत यह भी होती है कि वे थोड़-थोड़ी देर पर ही पेशाब कर देते हैं.

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जिससे डायपर भीग जाता है. यात्रा के दौरान जब शिशु डायपर में पेशाब या मल कर देता है. इसे काफी देर तक नहीं बदलने पर शिशु को परेशानी होने लगती है. इस परेशानी की वजह से भी वह रोने लगता है.

पेट में हवा भरने पर

शिशु में बॉटल से दूध पीते समय या कभी-कभी स्तनपान करते समय पेट में हवा चली जाती है. इस हवा की वजह से उनके पेट में परेशानी होने लगती है और बच्चा रोने लगता है. देर तक हवा न निकल पाने के कारण उनकी परेशानी बढ़ जाती है. इस परेशानी को दूर करने के लिए डकार आना जरूरी होता है. इसके लिए आपको चिकित्सक की सलाह से बच्चे को कोई ड्रॉप दे सकते हैं.

सोने के लिए (For Sleep)

छोटे बच्चों के सोने का कोई वक्त निर्धारित नहीं होता है. उन्हें कभी भी और कहीं भी नींद आ सकती है. इस दौरान अगर उसे सोने के लिए सही जगह नहीं मिलती है तो वह रोना (Crying Baby) शुरू कर देता है. कई बार यह भी होता है कि शिशु को तेज नींद आ रही होती है लेकिन आप समझ नहीं पाते हैं और उसे लगातार खिलाते रहते हैं.

ऐसे में भी बच्चा जोर-जोर से रोता है. कभी-कभी तो सोने के बाद भी वह रोता है. जैसे कई बार जब शिशु को नींद आ रही होती है तो आप उसे कंधे पर चिपका लेते हैं. ज्यादा देर तक ऐसे रखने पर उसके शरीर में तनाव होता है और वह रोना शुरू कर देता है.

असजह महसूस होने पर (Crying Baby)

जब शिशु को अंदर से असहज महसूस होता है तो वे रोना शुरू कर देते हैं. ऐसा तब होता है जब शिशु किसी बीमारी से ग्रस्त होता है. मां को इससे समझ जाना चाहिए कि शिशु बीमार है. कितनी बार ऐसा होता है जब आप बच्चे को आराम से सुला देती हैं.

crying baby

बच्चा भी गहरी नींद में सो रहा होता है. लेकिन सोते हुए ही वह अचानक रोना शुरू कर देता है. तब ध्यान दें कि उसके सिर के नीचे कहीं आप कोमल तकिया रखना तो नहीं भूल गए. या फिर उसका हाथ या पैर कहीं भारी बिस्तर से दबा हुआ है. इस तरह की परेशानी में भी बच्चा रोता है.

बेचैनी होने पर (Due To Discomfort)

कई बार शिशु को बुखार की जानकारी मां को नहीं मिल पाती. लेकिन जब शरीर का तापमान बढ़ता है तो शिशु को बेचैनी होने लगती है. शरीर का तापमान बढ़ने की वजह से बच्चा लगातार रोता रहता है. ऐसे में वह ना तो दूध पीता है और ना ही सोता है. इस परिस्थिति में मां को शिशु के शरीर का तापमान मापना चाहिए, कि बच्चे को कहीं बुखार तो नहीं है.

बच्चे को कैसे करें चुप (Crying Baby)

  1. अगर आपका शिशु बेवजह लंबे समय तक रोता रहे. तमाम कोशिशों के बावजूद भी अगर वो चुप ना हो रहा हो. तो पहले उसे गोद में लेकर सीने से चिपका लें और घर के अंदर ही कुछ देर तक घुमाएं, खिलौना दें या फिर झूला झूलाएं. इसमें बच्चे को मजा आता है और वह चुप हो जाता है.
  1. बच्चा अगर काफी देर तक लगातार रो रहा हो तो थोड़ी देर के लिए उसे घर के बाहर ले जाएं. घर के पास अगर पार्क है तो वहां खेलते हुए बच्चे को उसे दिखाएं. यह देखने से बच्चे का मन बहल जाएगा और बच्चा चुप हो जाएगा.
  1. पेट में गैस बनने की वजह से हो रहे दर्द के कारण भी बच्चा रोता है. लेकिन इसके लिए आपको चिकित्सक से परामर्श लेकर उसे दवा देनी होगी. दवा लेते ही उसे आराम मिलेगा और वह चुप हो जाएगा.
  1. शिशु को रोते देख हर मां की पहली धारणा होती है कि बच्चे को भूख लगी है. बगैर देरी किए वह उसे दूध पिलाने लगती है. रोते हे बच्चे को चुप करने का यह भी एक बेहतर उपाय है. क्योंकि अधिकांशतः बच्चे भूखे होने पर ही रोते हैं.

यह भी देखें…

  1. एकदम छोटे बच्चे ज्यादा समय तक सोते रहते हैं, जिसकी वजह से उनका शरीर अकड़ जाता है. इस अकड़न के कारण भी बच्चा रोता रहता है. तो इसके लिए बच्चे के शरीर की मालिश करें. मालिश होते ही उसके शरीर का दर्द कम हो जाने से वह चुप हो जाता है.
  2. रोते हुए बच्चे को उसकी पसंद की चीजें देने पर भी वह खुश होकर चुप हो जाता है. इस उपाय से बच्चे को चुप कराने के लिए ज्यादा वक्त नहीं देना पड़ता और वह बगैर मेहनत के ही चुप हो जाता है.
  1. शिशु को शारीरिक आराम व आश्वासन की बहुत जरूरत होती है. कभी-कभी तो वे सिर्फ गोद में आने के लिए भी रोते हैं. अगर आप बच्चे को सीने से लगाकर रखेंगे तो आपके दिल की धड़कन को सुनकर उसे दिलासा मिलेगी और वह चुप हो जाएगा.

छोटे बच्चों की इस आम आदत का सामना आप जैसे सभी माता-पिता को करना पड़ता है. आप सबकी सुविधा के लिए हमने इस आलेख के माध्यम से कुछ उपाय सुझाए हैं. ताकि बच्चे को पालने में होने वाली इस परेशानियों का आसानी से सामना किया जा सके. यहां बताये गए टिप्स को जरूर आजमाइए और अपने अनुभव को ‘योदादी’ के साथ कमेंट कर शेयर भी करें. #HappyParenting

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