Home Parenting बच्चे किस उम्र में बोलना सीखते हैं? – Bachche Ka Bolna

बच्चे किस उम्र में बोलना सीखते हैं? – Bachche Ka Bolna

बच्चा कब बोलना शुरू करता है और आप उसे किस तरह सहायता दे सकते हैं? बच्चे का कब नहीं बोलना (Bachche Ka Bolna) आपके लिए चिंता का कारण बन सकता है? यहां जानिए सब कुछ...

बच्चे की बोली सभी को अच्छी लगती है. हर किसी को अपने बच्चे के मुंह से निकलने वाले पहले शब्द को सुनने का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है. 3 साल तक बच्चा अपने माता-पिता द्वारा बोली जाने वाली भाषा को सीखता है. इसी समय इनका दिमागी विकास शुरू होता है. बच्चे के सीखने की क्षमता पर निर्भर है कि वह कितनी तेजी से बोलना (Bachche Ka Bolna) सीखता है. सीखने की क्षमता हर बच्चे में अलग-अलग होती है.

Bachche Ka Bolna

अगर आप तुलना करें तो कोई भी दो बच्चा एक साथ रेंगना, बोलना और चलना शुरू नहीं करते हैं, चाहे बच्चा एक ही परिवार का क्यों ना हो. बच्चा कब बोलना शुरू करता है और आप उसे किस तरह सहायता दे सकते हैं, इन सबकी जानकारी आपको यहां बताने जा रहे हैं. साथ ही यह भी बताएंगे कि बच्चे का कब नहीं बोलना आपके लिए चिंता का कारण बन सकता है.

बच्चे का बोलना – Bachche Ka Bolna

7 वर्ष की उम्र में बच्चे का दिमाग सबसे अधिक बढ़ता है और इसी समय बच्चा सबसे अधिक सीखता है, खासकर बोलना. बच्चे के आस-पास अगर अच्छे बोलचाल और साफ भाषा का माहौल हो तो, ऐसा माहौल शिशु को जल्दी बोलना सीखने में मदद करता है. इसी शुरूआती वर्ष में बच्चे का दिमाग तेजी से बढ़ता और सोचने-समझने के लिए तैयार होता है. इन्हीं वर्षों में आपका शिशु बोलना व भाषा सीखने लगता है.

जन्म लेते ही बोलना शुरू करता है नवजात – Bachche Ka Bolna

1. कोई भी बच्चा जन्म लेते ही बात करना शुरू कर देता है. बच्चा भूखा होने पर, गीला होने पर या फिर किसी तरह की बेचैनी होने पर आपसे रोकर बात करता है. लेकिन बोलने और भाषा सीखने के लिए उसे एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

2. तीन महीने की उम्र तक आपका बच्चा आवाज पहचानना शुरू कर देता है. आपने ध्यान भी दिया होगा छोटे बच्चे जानी पहचानी आवाज की तरफ आपना सिर ले जाने की कोशिश करने लगते हैं. और बोलने वाले का चेहरा भी देखने लगता है.

3. 3 से 4 महीना पूरा करते करते वह तुतलाने लगता है. इनका तुतलाना ही बोलने के शुरूआत की निशानी है. इस उम्र में शिशु हंस कर मुस्करा कर, खुशी व नाराजगी भी जाहिर करना सीख जाता है और समाज से जुड़ने की कोशिश करने लगता है. जब शिशु तुतलाना शुरू करता है तो सबसे पहले उसके मुंह से प, म, ब, मुह, पुह, बुह आदि आवाजें निकतली है.

4. 9 से 12 महीने का शिशु हाथों से बाय-बाय करना शुरू कर देता है. साथ ही वह न के अलावा का, कू आदि शब्दों के साथ बड़ों से बातें करना सीख जाता है. 12 महीना होते ही बच्चा अपना पहला शब्द जैसे दादा, पापा और मामा आदि बोलने लगता है.

ऐसे बढ़ती है बोलने की क्षमता – Bachche Ka Bolna

5. शिशु 18 महीने की उम्र में आपकी बातों को एक बार में ही समझने लायक हो जाता है. यहां तक की उसे 20 से 100 शब्दों की जानकारी भी हो जाती है.

6. 2 साल की उम्र के शिशु को 200 शब्दों तक की जानकारी हो जाती है और वो दो शब्द वाले वाक्य भी बोलने लगता है. वह सुने हुए बातों को दोहराता है, बोलने की कोशिश करते हुए कहां, क्या जैसे आपके सवालों को भी समझने लगता है.

7. बच्चे की उम्र 3 वर्ष होने पर उसे 800 से 900 शब्दों की जानकारी हो जाती है और साथ ही वह 2 से 3 शब्दों में बातें करना भी शुरू कर देता है. वह हां और ना में जवाब भी देने लगता है.

8. 4 वर्ष होते ही आपका बच्चा अच्छी तरह से बोलना सीख जाता है. वह आपके साथ बातें करना, कहानियां सुनना भी शुरू कर देता है. बच्चा आपकी हंसी-मजाक भी समझने लगता है.

बोलना सीखने में ऐसे करें अपने बच्चे की मदद – Bachche Ka Bolna

  • बच्चे के साथ हमेशा बातचीत करने की कोशिश करते रहें.
  • शिशु के साथ बात करते समय अपनी बातों को रखने के बाद उसकी प्रतिक्रिया का इंतजार करें.
  • बातचीत में हमेशा अलग-अलग तरह के शब्दों का प्रयोग करें.
  • नाटकीय खेलों में शिशु को शामिल करें.
  • बच्चे के लिए गाना गाएं, भले ही बच्चा आपने गानों ना ना समझे लेकिन वो आपकी आवाज सुनकर प्रतिक्रिया देना सीख लेगा.
  • इशारों के माध्यम से ही अपने शिशु के साथ कुछ-कुछ खेलने का प्रयास करते रहें.
  • 6 से 9 महीने का उम्रे में बच्चे को आइना दिखाकर उससे पूछे कि यह बच्चा कौन है.
  • शरीर के अंगों की जानकारी देने के लिए आप अंगों की ओर इशारा करते हुए जोर-जोर से उनका नाम लें, जैसे गाल, नाक, आंख आदि.

घरेलू उपचार – Bachche Ka Bolna

1. आपका बच्चा अगर देरी से बोलना शुरू किया है तो उसे कभी भी अन्य बच्चों का उदाहरण देना उचित नहीं है.

2. बच्चे के प्रयास को हमेशा प्रोत्साहित करते रहें.

3. सोते वक्त रात को शिशु को कहानी सुनाएं, जिससे उसमें कम्युनिकेशन स्किल का विकास हो सके.

4. कभी-कभी तो माता-पिता की व्यस्त जिंदगी के कारण भी बच्चा देरी से बोलता है. ऐसे बच्चों के लिए आप ऐसा माहौल तैयार करें. वह अपने दिन का कुछ समय अन्य लोगों के साथ बिता सकें. ऐसे में इन्हें बोलने का भरपूर मौका मिल सके.

5. अपने बच्चे को अन्य बच्चों के साथ घुलने-मिलने का मौका दें. ऐसे में बच्चा अन्य बच्चों के संपर्क में आकर. उन्हें देखकर बोलना सीखता है.

6. आप अपने शिशु को खेलने के लिए जानवर उपकरण के खिलौने दें. साथ ही बच्चे के साथ खेलते वक्त खिलौनो और जानवर की आवाज निकाले. ऐसे में बच्चा आपकी नकल करने की कोशिश करेगा. जिससे उसके अंदर कम्युनिकेशन स्किल का विकास होगा.

अगर यहां बताए उम्र के अनुसार आपका बच्चा बोलना शुरू नहीं करता है तो फिर आपको विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.

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