Bachon Ka Neend Mein Bolna: बच्चों के नींद में बोलने के कारण, लक्षण व बचाव

    आपने कई बच्चों को सोते हुए नींद में बड़बड़ाते देखा होगा. उनका बड़बड़ाना सुनकर माता-पिता को चिंता होने लगती है. (Bachon Ka Neend Mein Bolna)

    आपने कई बच्चों को सोते हुए नींद में बड़बड़ाते (स्लीप टॉकिंग) देखा होगा. उनका बड़बड़ाना (Bachon Ka Neend Mein Bolna) सुनकर माता-पिता को चिंता होने लगती है. वे सोचते हैं कि उनके बच्चे के साथ क्या हो रहा है? इस लेख में हम आपको बच्चों के नींद में बोलने के कारण, लक्षण व बचाव की जानकारी देने जा रहे हैं.

    Bachon Ka Neend Mein Bolna

    नींद में बोलना क्या है?

    नींद में बोलना कुछ भी नहीं बल्कि नींद संबंधी विकार है. इस समस्या से पीड़ित बच्चे रात को सोते वक्त बोलते हैं. इसको सोम्निलोक्यू नाम से भी जाना जाता है और यह विकार पैरासोम्निया नामक नींद संबंधित बीमारी के कारण भी हो सकता है. एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) पर प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक  बच्चों की नींद में बात करने की समस्या आम है. जिन बच्चों में यह समस्या होती है उनमें उम्र बढ़ने के बाद भी यह परेशानी रह सकती है. कहा जाता है कि बच्चा नींद में सपने से जुड़ी बातें बोलता है या फिर उसके दिमाग में जो बातें बैठी होती है वह उसे ही बोलता है.

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    बच्चे नींद में क्यों बोलते हैं? Bachon Ka Neend Mein Bolna

    • किसी तरह का दर्द
    • हृदय रोग
    • चिंता
    • जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकता
    • तंत्रिका संबंधी विकार
    • अवसाद की समस्या
    • हृदय रोग
    • दवाइयां
    • फेफड़े की बीमारी

    बच्चों के नींद में बोलने के चरण व लक्षण

    छोटे बच्चों के नींद में बोलने (Bachon Ka Neend Mein Bolna) सुनकर माता-पिता को चिंता होने लगती है. वे सोचते हैं कि उनके बच्चे के साथ क्या हो रहा है? बच्चों के नींद में बोलने के कुछ विशेष लक्षण नहीं होते हैं, इसका सबसे बड़ा संकेत नींद में बड़बड़ाना और बोलना ही है. बच्चा जब गहरी नींद में होता है, तब उसके बोलने की आवाज करहाने जैसी सुनाई पड़ती है. अब हम बच्चों के नींद में बात करने के चरण जानते हैं.

    1.         स्टेज 1 और 2 –  इन चरणों में नींद में बात करने वाले बच्चे 3 और 4 स्टेज की तरह गहरी नींद में नहीं होते हैं. इस समय नींद में बोली जाने वाली बातें पूरी तरह स्पष्ट होती हैं, जिन्हें बड़ी आसानी से समझा जा सकता है.

    2.         स्टेज 3 और 4 –  इस चरण में बच्चा गहरी नींद में होता है, जिस वजह से उसकी बातों को ठीक से समझना मुश्किल होता है. बच्चे की बातें करहाने जैसी होती है. नींद में बोलने की गंभीरता इस बात पर भी निर्भर करती है कि यह हफ्ते और महीने में कितनी बार होता ह.

    3. माइल्ड –   इस चरण में बच्चे की नींद में बात करने की समस्या महीने में एक बार हो सकती है.

    4. मॉडरेट – इस स्टेज में नींद में बात करने की शिकायत सप्ताह में एक से अधिक बार हो सकती है. लेकिन रोजाना रात को ऐसा नहीं होता है. इससे दूसरे कमरे में सो रहे व्यक्ति की नींद में भी ज्यादा बाधा उत्पन्न नहीं होती है.

    5. सीवियर –  इसमें बच्चा नींद में रोजाना बातें करता है, जिस कारण पास के कमरे में सोने वाले की नींद टूट सकती है.

    बच्चों के नींद में बोलने से होने वाली परेशानियां – Bachon Ka Neend Mein Bolna

    बच्चों के नींद में बोलने से उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती है लेकिन उसके साथ सो रहे दूसरे व्यक्ति की नींद खुल सकती है. बच्चे के लगातार बड़बड़ाने के कारण पास के कमरे में सोने वाले की भी नींद टूट सकती है और फिर दोबारा सोने में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है.

    बच्चों के नींद में बड़बड़ाने की समस्या का इलाज

    बच्चों को नींद में बड़बड़ाने (Bachon Ka Neend Mein Bolna) से रोकने का कोई सटीक इलाज नहीं है. इसके लिए किसी प्रकार के उपचार की आवश्यकता भी नहीं है. यदि आप बच्चे के नींद में बातें करने की वजह से ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, तो नीचे बताए गए तरीकों को अपना सकते हैं.

    • जहां बच्चा सो रहा है, वहां न सोएं.
    • बच्चे के कमरे को बंद रखें, ताकि बगल के कमरे में ज्यादा आवाज न जाए.
    • रात में बच्चे के बोलने की आवाज सुनाई न दें, इससे बचने के लिए सोते वक्त ईयर प्लग लगा सकते हैं.

    बच्चों के नींद में बात करना बंद करने के टिप्स

    1. 1. बच्चों के सोने का टाइम टेबल बनाएं और उन्हें दिन हो या रात एक नियमित समय पर ही सुलाएं.
    2. 2. बच्चों को पर्याप्त नींद मिले और जब वह सो रहा हो तब शोर होने न दें.
    3. 3. बच्चे के बिस्तर को साफ-सुथरा और कमरे के तापमान को सामान्य रखने की कोशिश करें.
    4. 4. बिस्तर के पास तेज रोशनी वाली लाइट न लगाएं.
    5. 5. बच्चे के कमरे में सुबह अच्छी रोशनी और साथ ही रात में पर्याप्त अंधेरा होना चाहिए.
    6. 6. बच्चे का रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि जैसे साइकिल चलाना, तैरना और अन्य खेल खेलना जरूरी है. इससे बच्चे की नींद की गुणवत्ता बढ़ सकती है.
    7. 7. मासूम को आरामदायक कपड़ों में ही सुलाना जरूरी है.
    8. 8. अपने बच्चों के साथ खुलकर बातें करें. ऐसा करने से उनके दिमाग में ऐसी कोई भी नहीं बैठेगी,  जिसे वे नींद में बोलेंगे.

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