Home Health Care DOCTORS’ STRIKE: डॉक्टर ही जब हड़ताल पर बैठ जाएं तो ऐसे बरतें...

DOCTORS’ STRIKE: डॉक्टर ही जब हड़ताल पर बैठ जाएं तो ऐसे बरतें सावधानी

डॉक्टरों की इस तरह की हड़ताल कोई नई घटना नहीं है. इससे पहले भी डॉक्टर्स हड़ताल पर जाकर पूरी चिकित्सकीय व्यवस्था को ठप कर चुके हैं. [Doctors' Strike]

एक तरफ तो इंडिया डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है. दूसरी ओर ड्यूटी में तैनात डॉक्टर्स आए दिन हड़ताल (Doctors’ Strike) पर बैठ जाते हैं. डाक्टरों की इस हड़ताल का खामियाजा ना तो खुद उन्हें भुगतना पड़ता है और ना ही सरकार को. चिकित्सकों के इस रवैये का खामियाजा सिर्फ और सिर्फ मरीज को ही भुगतना पड़ता है.

doctors-strike

हालिया हड़ताल का मामला जानें:

कोलकाता के एनआरएस अस्पताल में जूनियर चिकित्सक की पिटाई के विरोध में गत 11 जून से शुरू हड़ताल ने तूल पकड़ लिया था. यह हड़ताल कोलकाता ही नहीं बल्कि राजधानी दिल्ली समेत अन्य शहरों में भी किया गया.

जूनियर डॉक्टरों की पिटाई के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की तरफ से भी सोमवार को हड़ताल किया गया. डॉक्टरी एक ऐसी आपातकालीन सेवा है जिसमें हर मिनट डॉक्टरों की ड्यूटी अनिवार्य है अन्यथा कुछ मिनटों की अनुपस्थिति ही किसी मरीज की जान तक ले सकती है. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चिकित्सक तो हड़ताल (Doctors’ Strike) बुला देते हैं लेकिन इस हड़ताल का मरीज व उनके परिजनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

बीते वर्षों में कई बार डॉक्टरों ने बुलाई है हड़ताल

डॉक्टरों की इस तरह की हड़ताल (Doctors’ Strike) कोई नई घटना नहीं है. इससे पहले भी डॉक्टर्स हड़ताल पर जाकर पूरी चिकित्सकीय व्यवस्था को ठप कर चुके हैं:

नवंबर 2017 – Doctors’ Strike

राजस्थान में 640 सरकारी डॉक्टरों ने अपनी कई मांगों को लेकर 6 नवंबर को हड़ताल शुरू की थी. इनका साथ देने के लिए कोटा व झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के करीब 350 रेजीडेंट डॉक्टर भी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल में शामिल हो गए थे. इस हड़ताल को केंद्र करके कोटा, बूंदी, बारां व झलावाड़ समेत कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ा था.

>> इन लक्षणों को ना करें नजरअंदाज, हो सकता है ‘चमकी बुखार’

दिसंबर 2017 – Doctors’ Strike

सरकार व डॉक्टरों के बीच के आपसी टकराव ने हड़ताल का रूप से लिया था. यह घटना राजस्थान की है. इस हड़ताल की वजह से कई मरीजों की मौत हुई थी जबकि वक्त पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई मरीजों की हालत गंभीर हो गई थी. इस मामले में 50 से अधिक डॉक्टरों की गिरफ्तारी भी हुई थी.

अगस्त 2018 – Doctors’ Strike

पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर की पिटाई के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू की थी. इनके समर्थन में पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) व दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल समेत अन्य जगहों के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए थे. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में हड़ताल के कारण करीब दर्जनभर से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई थी.

doctors-iam

अप्रैल 2018 – Doctors’ Strike

गत वर्ष अप्रैल महीने में एम्स के चीफ डॉक्टर व जूनियर डॉक्टरों के बीच आपसी विवाद को लेकर यहां के करीब 1800 रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। इस हड़ताल की वजह से अम्स के सारे ऑपरेशन रद्द करने पड़े थे. ओपीडी सेवा भी बूरी तरह प्रभावित हुआ था.

जनवरी 2019 – Doctors’ Strike

जनवर सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने आए दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल के बेटे ने एक रेजीडेंट डॉक्टर से मारपीट की थी. इस घटना से नाराज चिकित्सक हड़ताल पर चले गए थे. इस हड़ताल में आपातकालीन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई थी.

>> कैंसर के इन 7 कारणों को जानकर आप हो जाएंगे हैरान!

मार्च 2019 – Doctors’ Strike

जयपुर के कांवटिया अस्पताल में एक महिला रेजीडेंट डॉक्टर के साथ मरीज के परिजन द्वारा बदसलूकी के विरोध में चिकित्सक हड़ताल पर चले गए थे. इनके समर्थन में कई और अस्पतालों के चिकित्सक भी हड़ताल पर गए थे. जिसका खामियाजा सैकड़ों मरीजों को भुगतना पड़ा था.

मई 2019 – Doctors’ Strike

दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल में 500 रेजीडेंट चिकित्सकों ने वेतन आने में हुई देरी पर नाराज होकर कुछ घंटे के लिए हड़ताल किया था. इस अस्पताल को एनडीएमसी की ओर से चलाया जाता है.

भारत में 11 हजार की आबादी पर मात्र 1 डॉक्टर मौजूद हैं!

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ हेल्थ इंटेलीजेंस के वर्ष 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 11,082 की आबादी पर मात्र एक चिकित्सक हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानकों के अनुसार यह अनुपात प्रति हजार व्यक्तियों पर एक होना चाहिए. इस हिसाब से अगर देखें तो यह अनुपात तय मानकों की तुलना में 11 गुणा कम है.

doctors-junior-strike

वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आंकड़ों के अनुसार देश की 1.3 अरब की आबादी का इलाज करने के लिए मात्र 10 लाख एलोपैथिक डॉक्टर ही करते हैं. इनमें से 1.1 लाख चिकित्सक सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करते हैं.

मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा है कि कई अस्पतालों में तो एक बेड पर दो-दो मरीजों को रखा जाता है. इंडिया में ना तो पर्याप्त अस्पताल है, ना ही चिकित्सक और ना ही नर्स है. जिसकी वजह से चिकित्सकों पर काम का अत्यधिक दबाव रहता है.

यहां जानते हैं ताजा हड़ताल के पीछे की स्टोरी

गत 10 जून को कोलकाता के नीलरतन सरकार (एनआरएस) मेडिकल कॉलेज में इलाजरत 75 वर्षीय मरीज की मौत हो गई थी. नाराज परिजनों ने चिकित्सकों को गालियां दे दी थी. बस समस्या की शुरुआत यहीं से हो गई था.

>> 11 रामबाण नुस्खे आपके लिए, दादी मां की सलाह आज भी है कारगर!

चिकित्सक भी जिद्द पर अड़ गए कि जबकि मृतक के परिजन गालियों के लिए माफी नहीं मांगते हैं उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा. इसके बाद ही घटना ले तूल पकड़ ली. हथियार से लैस मरीज के परिजनों ने अस्पताल पर हमला कर दिया. जिसमें एक जूनियर डॉक्टर बुरी तरह जख्मी हो गए. घटना में कई और चिकित्सकों को चोटें आई थी.

इसके अगले ही दिन यानी 11 जून से जूनियर डॉक्टर सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल (Doctors’ Strike) पर चले गए. इन जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में राज्य के सभी 14 मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इस घटना की कड़ी निंदा व चेतावनी के बावजूद भी ये सभी अपनी जिद्द पर अडिग रहे.

हालांकि इस मामले को केंद्र करके एनआरएस कॉलेज के प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को इस्तीफा भी देना पड़ा. जबकि 250 से अधिक डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा दिया है। जल्द से जल्द अगर हड़ताल खत्म नहीं किया जाता है तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाएगी.

मामला कलकत्ता हाईकोर्ट तक जाने पर अदालत ने मुख्यमंत्री से चिकित्सकों के साथ बातचीत कर मसले का हल निकालने को कहा था. वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से मामले में हस्तक्षेप कर इसे सुलझाने को कहा.

डॉक्टर्स हों स्ट्राइक पर तो बरतें सावधानी

अमूमन अस्पतालों के इमरजेंसी विभाग हड़ताल ही हालत में भी खुले होते हैं. हड़ताल की घोषणा होते ही निकट के अस्पताल की स्थिति का पता लगा लेना चाहिए. साथ ही सरकार आपात स्थिति के लिए इंतजाम करती है, उसका भी अपडेट ले लें. अगर आप का कोई फैमिली डॉक्टर है तो उसे फोन कर जायजा लें. खासकर बच्चे और बूढ़े को परेशानी हो सकती है. ये तय है कि डॉक्टर्स की हड़ताल लंबे समय के लिए हो नहीं सकती है. आखिर इंसानियत सबसे बड़ी चीज है और डॉक्टर को ऐसे ही भगवान रूप नहीं कहा जाता है!#DoctorsStrike

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here