Home Trending इन जगहों की होली क्यों है अनोखी, यहां जानिए इनके अंदाज

इन जगहों की होली क्यों है अनोखी, यहां जानिए इनके अंदाज

कई जगहें ऐसी हैं यहां की होली सबसे अलग और कुछ खास अंदाज की होती है. बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें अलग-अलग जगहों का त्योहार देखने का शौक रहता है.

होली रंगों का त्योहार है और इस दिन हर कोई एक दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं. होली के दौरान तो हर जगह माहौल लगभग समान ही रहता है. यानी हर तरफ गुजिया, ठंडाई, गुलाल, पानी के गुब्बारे और तेजी से बजते संगीत की धुन. लेकिन कई जगहें ऐसी हैं यहां की होली सबसे अलग और कुछ खास अंदाज की होती है. बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें अलग-अलग जगहों का त्योहार देखने का शौक रहता है.

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अगर हम मथुरा और वृंदावन की होली की बात करें तो यहां की होली देश-विदेश तक मशहूर है. यहां लठ्ठमार से लेकर फूलों की होली खेली जाती है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोगों की भीड़ जुटती है. दक्षिण भारत में कई स्थान ऐसे हैं जहां लोग शानदार होली खेलते हैं. विश्वास कीजिए कुछ खास तरीके से मनाई जाने वाली होली आपको उत्साह को दुगुना कर देगी.

आइए बताते हैं उन खास जगहों के बारे में जहां की होली है सबसे हटकर:

मणिपुर

मणिपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है. यहां की होली बहुत ही शानदार होती है. मणिपुर में योसंग त्योहर व होली उत्सव 6 दिनों तक चलता है. इस दौरान आप वहां खाने पीने के पारंपरिक स्वाद का आनंद भी ले सकते हैं. ऐसे देखी जाए तो होली यहां का पारंपरिक त्योहार नहीं है बावजूद इसके यहां होली की रौनक देखते ही बनती है.

असम

उत्तर भारत की तरह असम में होली दो दिनों तक मनाई जाती है. जिस तरह उत्तर भारत में होलिका दहन होता है वासे यहां पहले दिन लोग होली में मिट्टी की झोपड़ी जलाते हैं. फिर दूसरे दिन रंग, अबीर व पानी से होली खेलते हैं.

कर्नाटक

कर्नाटक को होली मनाने के लिए बेस्ट गंतव्य माना जाता है. कर्नाटक अपनी संपन्न संस्कृति और शांति के लिए मशहूर है. कर्नाटक में खासकर हंपी की होली का अनुभव को भूला पाना बहुत मुश्किल है. यहां तेज म्यूजिक, ढ़ोल, नगाड़ों व ढ़ेर सारे रंगों वाली होली तो देखने लायक होती है.

केरल

केरल अपनी खूबसूरत सभ्यता के लिए प्रसिद्ध है. वहीं रंगों का त्योहार होली भी यहां बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. अगर आप होली में कुछ हटकर अनुभव करना चाहते हैं तो फिर आपके लिए केरल सबसे बेस्ट स्थान है. यहां की होली को मंजुल कुली और उक्कुली के रूप में जाना जाता है.

वृंदावन

वृंदावन फूलों की होली के लिए विश्व विख्यात है. होली से पहले पड़ने वाली एकादशी को यहां फूलों की होली होती है. यहां के बांके बिहारी मंदिर के पुजारी लोगों पर फूलों की वर्षा करते हैं. करीब आधे घंटे तक खेली जाने वाली इस होली का आनंद ही अलग है. होली में गुलाब और गेंदे के फूलों से पूरा माहौल खिल उठता है.

मौज-मस्ती के इस त्योहार में हर किसी को शामिल होने का अधिकार है. यही वजह है कि वृंदावन में विधवा होली की परंपरा शुरू हुई है. आप भी चाहें तो वृंदावन के पागल बाबा विधवा आश्रम में आकर होली के इस खूबसूरत नजारे का आनंद ले सकते हैं.

बरसाना और नंदगांव

यहां के होली की शुरुआत राधा-श्रीकृष्ण के प्यार और शरारत से हुई थी. भगवान कृष्ण अपने सखा के संग नंदगांव से राधा के गांव बरसाना आते थे. वहां से राधा संग अलग-अलग रंगों से होली खेलते थे. जिसके बाद राधा अपनी सखियों संग कृष्ण और उनके मित्रों की लाठियों से पिटाई करती थी. यह पंरपरा उसी समय की देन है.

ब्रज की होली

अनोखे होली उत्सव के लिए मथुरा देश-विदेश के लोगों तक मशहूर है. यही कारण है कि यहां प्रति वर्ष हली के हुडदंग में बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या ज्यादा रहती है. यहां लोग एक दूसरे को रंग लगाकर आपसी प्यार जताते हैं.

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