Home Education ‘हिन्दी में हैं प्रवीण तो मौजूद हैं अनगिनत अवसर’

‘हिन्दी में हैं प्रवीण तो मौजूद हैं अनगिनत अवसर’

सूचना तकनीक के प्रसार होते ही भाषाओं का महत्व बढ़ चला है. ऐसे कई अवसर बने हैं जो कि पारंपरिक कार्यों से हटकर हैं.

ज्यादातर युवाओं का झुकाव उन क्षेत्रों में हो रहा है, जहां प्रचारित रूप से कैरियर की सम्भावना दिखती है. खासकर प्रोफेशनल कोर्स युवाओं को आकर्षित करते हैं. ऐसे में चाहे जितनी भी वैकेंसी हो कम पड़ जाती है. बेरोजगारी के आंकड़े बढ़ते जाते हैं. यही कारण है कि बड़ी डिग्री और बड़े खर्चे के बावजूद युवा अवसर की तलाश में भटक रहे हैं. बता दें कि ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहाँ भले ही लाइमलाइट नहीं है, लेकिन अवसर मौजूद हैं. इसे समझने और परखने की जरूरत है.

पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति के भारतीय दौरे के समय इस हिन्दी के विज्ञापन होर्डिंग ने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरीं.

आप यहाँ गौर से देखें:

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इस विज्ञापन होर्डिंग को किसी बड़ी कम्पनी ने ‘नमस्ते ट्रम्प‘ कैम्पेन के दौरान बनाया था. जिसे किसी बड़े डिज़ाइनर ने बड़े पैमाने पर बनाया है लेकिन हिन्दी के गलत इस्तेमाल से इस सीरियस कैम्पेन का मजाक उड़ाया गया. जाहिर है ये एक तकनीकी खामी है लेकिन यहाँ हिन्दी जानने वाले किसी व्यक्ति से सलाह ली गई होती तो ये बड़ी गलती न होती. यहाँ एक हिन्दी जानने वाले के लिए अवसर सृजित होता है, जिसे समझने की जरूरत है!

बढ़ा है भाषाओं का महत्व

सूचना तकनीक के प्रसार होते ही भाषाओं का महत्व बढ़ चला है. ऐसे कई अवसर बने हैं जो कि पारंपरिक कार्यों से हटकर हैं. इनमें ऑनलाइन-ऑफलाइन सभी क्षेत्र शामिल हैं. भाषा संवाद की प्रमुख कड़ी के रूप में प्रतिष्ठित है. हिन्दी में तो देश ही नहीं, विदेशों में भी अवसर सृजित हो रहे हैं. यहाँ ये कहते हुए कोई दिक्कत नहीं हो रही है कि हिन्दी में जितने अवसर हैं उतने प्रोफेशनल लोग तैयार नहीं हो रहे हैं.

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इसको देखते हुए पिछले दिनों हिन्दी में इंटरेस्ट रखने वाले युवाओं और विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए भारतीय भाषा परिषद में दो दिवसीय हिन्दी कार्यशाला का आयोजन किया. इस कार्यशाला में 35 युवाओं ने भाग लिया था. हिन्दी विषय का महत्व और मातृभाषा कैसे निजी जीवन में प्रभावकारी है, उन्हें बताया गया. कार्यशाला में उन्हें यह भी जानने को मिला कि कैसे वह हिन्दी के माध्यम से अपना भविष्य निर्माण कर सकते है. यह कार्यशाला हिन्दी के क्षेत्र के जाने-माने चेहरों के संरक्षण में हुआ. बता दें कि इस आयोजन के संयोजक सुशील पांडेय थे. यह कार्यशाला 15-16 फरवरी को आयोजित थी.

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विषय विशेषज्ञों द्वारा कार्यशाला

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दो दिवसीय कार्यशाला में शुद्ध हिन्दी लेखन, व्यक्तित्व विकास, गद्य लेखन, पत्रकारिता, साहित्य चर्चा, कविता आवृत्ति, कविता लेखन, अनुवाद की कला, भाषण कला सहित कैरियर को लेकर प्रशिक्षण सत्र हुए. विभिन्न सत्रों में डॉ. अवधेश प्रसाद सिंह, मृत्युंजय, विनय बिहारी, डॉ. शंभुनाथ, कल्पना झा, प्रियंका पालीवाल आदि विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया.

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बताते चलें कि ऐसे वर्कशॉप की अहमियत और भी बढ़ चला है. इससे युवाओं को बढ़ने के लिए नए क्षेत्र और नई दिशाओं के बारे में जानकारी मिलती है. हिन्दी में पारंपरिक अवसरों के अलावे में कई नए द्वार खुले हैं. हिन्दी भाषा में अवसरों से जुड़ा ये आलेख कैसा लगा, हमें कमेन्ट कर जरूर बताएं!

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