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कार्डियाक अरेस्ट ने ली सरोज खान की जान, इससे बचने के क्या हैं उपाय?

कार्डियाक अरेस्ट और हार्ट अटैक को लोग एक ही समझते हैं. यह भी हृदय रोग का ही एक रूप है. लेकिन कार्डियाक अरेस्ट जो कि हार्ट अटैक से बिल्कुल अलग है. Cardiac arrest se bachne ke upay

बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का 71 साल की उम्र में निधन हो गया. शुक्रवार (3 जुलाई) तड़के 2 बजे उन्होंने मुंबई के बांद्रा स्थित गुरु नानक अस्पताल में अंतिम सांस ली. पिछले कुछ दिनों से वह बीमारी चल रही थीं. सांस लेने में हो रही दिक्कत के बाद उन्हें गत 17 जून को इस अस्पताल में भर्ती किया गया था. इलाज के दौरान उनकी स्थिति धीरे-धीरे पहले से बेहतर हो रही थी. लेकिन शुक्रवार अचानक उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई और कार्डियाक अरेस्ट (Cardiac arrest se bachne ke upay) की वजह से उनकी मौत हो गई.

अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनका कोविड-19 टेस्ट भी किया गया था, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी. सरोज खान (Saroj Khan) को डायबिटीज की भी बीमारी थी. जब उनका निधन हुआ उस वक्त अस्पताल में उनके पति बी सोहनलाल, बेटे हामिद खान और दोनों बेटियां हिना खान और सुकन्या खान भी मौजूद थीं. परिवार वालों ने इसी दिन सरोज खान को मलाड के कब्रिस्तान में दफना दिया और अब उनकी याद में तीन दिनों बाद प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा.

सरोज खान का जीवन सफर – Saroj Khan Life

सरोज खान भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का जाना-माना चेहरा है. सरोज खान का असली नाम निर्मला नागपाल था और भारत-पाक विभाजन के बाद वह भारत आई थीं. इन्होंने अपने डांस के शिक्षक सोहनलाल से ही शादी की थी. इस इंडस्ट्री पर इन्होंने पिछले चार दशकों से राज किया है. इनके डांस करने की शुरुआत महज तीन साल में ही हो गई थी.

तब उन्होंने पहली बार बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम शुरू किया था. वर्ष 1974 में इन्हें गीता मेरा नाम फिल्म में एक  फ्रीलांस कोरियोग्राफर के रूप में प्रथम ब्रेक मिला था. अब इन्होंने तेजाब, मिस्टर इंडिया और देवदासी समेत करीब 2000 गानों की कोरियोग्राफी की हैं और इन्हें तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है. उनकी अंतिम कोरियोग्राफी साल 2019 में आई फिल्म कलंक के गाने तबाह हो गई में देखने को मिली थी.

कार्डियाक अरेस्ट क्या है? – Cardiac Arrest Kya Hai

कार्डियाक अरेस्ट और हार्ट अटैक को लोग एक ही समझते हैं. यह भी हृदय रोग का ही एक रूप है. लेकिन कार्डियाक अरेस्ट जो कि हार्ट अटैक से बिल्कुल अलग है. दिल में एक इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के कारण कार्डियाक अरेस्ट आता है. इस गड़बड़ी के कारण दिल व्यक्ति के शरीर में सही से पंप नहीं कर पाता और खून भी पूरे शरीर में सही से नहीं जा पाती है.

रक्त के शरीर में ठीक से नहीं पहुंचने पर शरीर के विभिन्न अंग काम करना बंद कर देते हैं. हार्टबीट में गड़बड़ी होने पर सांस लेने में परेशानी के साथ ही यह रूक भी जाती है. इसकी व्यवस्था अगर पहले से नहीं हो तो रोगी की मिनटों में ही मौत भी हो जाती है. जबकि हार्ट अटैक में दिल से जुड़ी धमनियां जाम हो जाती है और खून का दिल तक पहुंचना बंद हो जाता है.

इस जाम को नहीं हटाने पर दिल काम करना ही बंद कर देता है लेकिन दिल धड़कता रहता है. लेकिन इसके विपरीत कार्डियाक अरेस्ट में दिल नहीं धड़कता है. हार्ट अटैक आने पर सीने में दर्द, घबराहट और सांस लेने में दिक्कत आनी शुरू हो जाती है. अगर किसी व्यक्ति को कार्डियाक अरेस्ट आता है तो इसमें दो तरह की घटनाएं देखने को मिलती है.

पहली घटना जैसे हृदय की धड़कन थम जाना या फिर इसका तेज गति से धड़कना, जिससे पूरा कार्डियाक चेंबर का संकुचन नहीं हो पाता. दोनों ही स्थितियों में बॉडी के महत्वपूर्ण अंगों में रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती. ऐसे में जब मस्तिष्क में खून जाना बंद होता है तो रोगी बेहोश होने लगता है, सांस लेने में कठिनाई होने लगती है.

कार्डियाक अरेस्ट का कारण – Cardiac Arrest Causes

1. हार्ट अटैक के बाद कार्डियाक अरेस्ट हो सकता है.

2. कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी धमनी की बीमारी का होना.

3. हार्ट के वाल्व में किसी तरह की समस्या आने पर.

4. दिल के बढ़ने पर हार्ट के तंतु डैमेज हो जाते हैं.

5. बचपन से ही दिल में गड़बड़ी होने पर भी.

6. शरीर में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की समस्या होने पर भी कार्डियाक अरेस्ट की संभावना रहती है.

कार्डियाक अरेस्ट का रिस्क फैक्टरRisk Factors of Cardiac Arrest

1. यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है

2. स्मोकिंग भी है बड़ी समस्या.

3. मोटापा

4. डायबिटीज

5. हाई कोलेस्ट्रॉल

6. हाई ब्लड प्रेशर

7. रोजाना दो पैग से ज्यादा शराब पीने पर

कार्डियाक अरेस्ट से बचाव – Cardiac Arrest se kaise bache

1. वजन को नियंत्रित रखें.

2. शराब और तंबाकू से दूर रहें.

3. फास्ट फूड का सेवन करने से बचें.

4. तनाव भूल कर खुश रहने की कोशिश करें.

5. ब्रेकफास्ट, दोपहर का भोजन और डीनर प्रतिदिन समय पर ही करें.

6. नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की आदत डालें.

7. ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें.

8. फल और सब्जियों का सेवन रोजाना करें.

9. सबसे जरूरी कि नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जांच कराते रहें.

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