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Chaitra Navratri in Hindi : चैत्र नवरात्रि का महत्व और नौ देवियों की पूजा

चैत्र नवरात्रि में 9 दिनों तक विधि-विधान से मां दुर्गा के स्वरूपों की पूजा करने पर हर मनोकामनाएं पूरी होती है. (Chaitra Navratri in Hindi)

कोरोना महामारी के बीच इस साल 13 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri in Hindi) की शुरुआत हो चुकी है. हिंदू धर्म में नववरात्री का खास महत्व है. मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि में जो भी भक्त पूरे 9 दिनों तक विधि-विधान से मां दुर्गा के स्वरूपों की पूजा करता है, उसकी हर मनोकामनाएं पूरी होती है. यह तो आप जानते ही होंगे कि साल में दो बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें एक चैत्र में दूसरा दीपावली से पहले.

Chaitra Navratri

दीपावली से पहले मनाई जाने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्र (Chaitra Navratri in Hindi) कहते हैं. दोनों ही नवरात्रि में पूजा विधि और महत्व अलग-अलग हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 2021 में चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू हुई है और इसका समापन 21 अप्रैल को होगा. चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा-अर्चना होती है.

चैत्र नवरात्रि का यह त्योहार पूरे भारत में विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और उत्तराखंड में भव्य रूप से मनाया जाता है. महाराष्ट्र में यह त्यौहार गुड़ी पड़वा से शुरू होता है और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में यह उगादि से शुरू होता है.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्तChaitra Navratri in Hindi

प्रतिपदा प्रारंभ तिथि – 12 अप्रैल सुबह 08:00 बजे

प्रतिपदा तिथि समाप्त- 13 अप्रैल सुबह 10:16 बजे तक

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त- 13 अप्रैल सुबह 05:58 बजे से 10:14 बजे तक

कुल अवधि- 4 घंटे 16 मिनट

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कलश स्थापना की विधिChaitra Navratri in Hindi

  • चावल, सुपारी, रोली, सुगन्धित पुष्प, केसर,जौ
  • सिन्दूर, लौंग, इलायची, पान, दूध, सिंगार सामग्री
  • दही, गंगाजल, शहद, शक्कर, शुद्ध घी, आभूषण, वस्त्र
  • यज्ञोपवीत, मिट्टी का कलश, मिट्टी का पात्र, इत्र, दूर्वा
  • चंदन, चौकी, लाल वस्त्र, धूप, दीप, फूल, स्वच्छ मिट्टी
  • थाली, जल, ताम्र कलश, नारियल,रूई आदि

नवरात्रि व्रत करने कि विधि-

1. नवरात्रि से एक दिन पहले कलश स्थापना कर नौ दिनों तक व्रत रखने का संकल्प, लें.

2. पूरी श्रद्धा भक्ति से मां की पूजा-अर्चना करें.

3. दिन के वक्त आप फल और दूध खा सकते हैं.

4. शाम में मां की आरती उतारें.

5. सभी लोगों में प्रसाद बांटें और फिर खुद भी प्रसाद ग्रहण करें.

6. फिर भोजन ग्रहण करें.

7. संभव हो तो इस दौरान अन्न न खाएं बल्कि सिर्फ फलाहार ग्रहण करें.

8. अष्टमी या नवमी के दिन 9 कन्याकओं को भोजन कराएं. उन्हेंर उपहार और दक्षिणा भी दें.

9. संभव हो तो हवन के साथ-साथ नवमी के दिन व्रत का पारण करें.

किस दिन होगी कौन सी देवी की पूजा

  • 13 अप्रैल प्रतिपदा- घट/कलश स्थापना-शैलपुत्री
  • 14 अप्रैल द्वितीया- ब्रह्मचारिणी पूजा
  • 15 अप्रैल तृतीया- चंद्रघंटा पूजा
  • 16 अप्रैल चतुर्थी- कुष्मांडा पूजा
  • 17 अप्रैल पंचमी- सरस्वती पूजा, स्कंदमाता पूजा
  • 18 अप्रैल षष्ठी- कात्यायनी पूजा
  • 19 अप्रैल सप्तमी- कालरात्रि, सरस्वती पूजा
  • 20 अप्रैल अष्टमी- महागौरी, दुर्गा अष्टमी, निशा पूजा
  • 21 अप्रैल नवमी- नवमी हवन, नवरात्रि पारण

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