Home Education International Child Protection Day: आज का बच्चा, कल का भविष्य!

International Child Protection Day: आज का बच्चा, कल का भविष्य!

आज के बच्चे ही कल के सुनहरे भविष्य बनेंगे. इसकी रक्षा व सही शिक्षा-दीक्षा देना हम सबकी जिम्मेवारी है.

बच्चे ईश्वर का रूप होते हैं. उनकी खुशियां व उनके अधिकारों की रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है. देश की उन्नति के लिए बच्चों का सही विकास सबसे अहम मुद्दा है. आज के बच्चे ही कल के भविष्य हैं. इनकी तरक्की होगी तभी देश व समाज भी विकासशील होगा.

इन बच्चों की तरक्की व उनके विकास को लेकर विचार-विमर्श करने की जरूरत है. इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देना बहुत जरूरी है. पूरे विश्व में कितने नाथ बच्चे हैं, जो शोषण के शिकार है. ऐसे बच्चों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. जिस देश में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं वह देश कभी प्रगति नहीं कर सकता. अगर बच्चे सुखी हैं तो देश भी खुशहाल होगा.

बच्चों के अधिकारों व उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें!

बच्चों के अधिकारों व उनकी सुरक्षा (International Child Protection Day) के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही प्रति वर्ष 1 जून को बाल सुरक्षा दिवस का पालन किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस सबसे पुराना अंतरराष्ट्रीय उत्सव है. जिसे वर्ष 1950 से मनाया जा रहा है. इसकी शुरुआत रूस में वर्ष 1949 से हुई थी. उसके बाद विश्व के 51 देशों में अंतरराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का पालन किया जाने लगा.

इस दिवस को मनाने का मूल उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जरुरतों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है. 1 जून को रूस की राजधानी मॉस्को में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. जिसमें प्रतियोगिताएं, नृत्य, संगीत, प्रदर्शनियां व अन्य कार्यक्रम शामिल हैं. मॉस्को में इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन होने की वजह यह है कि सबसे पहले यहीं से इस दिवस की शुरुआत हुई थी.

बाल अधिकारों की रक्षा है उद्देश्य

  • बच्चो को शिक्षा दिलाना व बाल मजदूरी जैसी समस्याओं से निजात दिलाना.
  • बाल अधिकारों की रक्षा (International Child Protection Day) के लिए लोगों का इस तरफ ध्यान आकर्षित करना.
  • मुख्य रूप से अनाथ, विकलांग व गरीब बच्चों की सहयता करना.
  • विभिन्न तरह के समारोह का आयोजन व उपहार देकर बच्चों को खुश करना.
  • अनाथ, विकलांग व गरीब बच्चों बच्चों की समस्याओं की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करना.

ज्ञात हो कि बाल रक्षा दिवस (International Child Protection Day) की परंपरा वर्ष युद्ध के बाद वाले वर्ष से ही शुरू हुई थी. उस वक्त युद्ध के बाद कई बच्चे अनाथ हो गए थे. मॉस्को के अंतरराष्ट्रीय महिला लोकतांत्रिक संघ की बैठक में वर्ष 1949 में इस दिवस के पालन का निर्णय लिया गया था. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में अभी भी बाल मजदूरी होती है.

भारत में बच्चों की स्थिति

भारत में ही देख लें तो करीब 10-15 करोड़ बच्चों को स्कूली शिक्षा नहीं मिल पाती. जबकि कुपोषण से यहां करोड़ों बच्चों की मौत होती है. जो गरीब बच्चे हैं जो बाल मजदूरी करते हैं. उनके साथ जोड़-जबरदस्ती की जाती है. अधिक मेहनत करवा कर उन्हें कम से कम वेतन दिया जाता है. इस तरह के शोषण के कई मामले सामने आते हैं.

बच्चों से संबंधित एक नहीं बल्कि कई सारी समस्याएं हैं. तमाम किस्म के मानसिक तनाव से पीड़ित बच्चे आत्महत्या तक की घटना को अंजाम दे रहे हैं. बच्चों के साथ मानसिक व शारीरिक शोषण के मामले में भारत सबसे आगे है. यहां हर 10 में से तीसरा बच्चा स्कूल नहीं जाता. इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण है गरीबी. तकनीकी मामलों में तो देश काफी प्रगति पर है लेकिन बच्चों से जुड़े इस तरह के मामलों में कोई सुधार नहीं देखा जा रहा.

बाल मजदूरी के जंजीरों में जकड़ा है देश

प्रगतिशील यह देश आज भी बाल मजदूरी के जंजीरों में जकड़ा है. यहां गरीब बच्चों की हालत अभी भी दयनीय है. बाल मजदूरी यहां सबसे गंभीर समस्या है. पढ़ने की उम्र में बच्चे मजदूरी करते नजर आते हैं. यह जानते हुए की बाल मजदूरी अपराध है फिर भी हम सब इसे देखते रहते हैं.

या फिर यह कहें कि देखकर भी अनदेखी करते हैं और अपने काम में व्यस्त रहते हैं. एक शिक्षित समाज का फर्ज बनता है कि वे इस तरह के गरीब बच्चों की सहायता के लिए यथासंभव कोशिश करें. देश व समाज को इस गंदी समस्या के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ही इस दिवस का पालन किया जाता है.

गरीबी के कारण बचचे स्कूली शिक्षा नहीं ले पाते. इनके अशिक्षित होने पर देश का भविष्य भी अंधकारमय होने लगता है. इसके अलावा घरेलू समस्याओं की वजह से भी भारत में करीब 35 फीसद बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है. इस तरह की समस्याओं की ओर अभिभावकों को विशेष ध्यान देना जरूरी है क्योंकि अगर इनका आज खराब होगा तो, कल भी जरूर अंधकारमय ही होगा.

बच्चों का मानसिक व शारीरिक शोषण

भारत में बच्चों का अपहरण कर उनका मानसिक व शारीरिक शोषण किया जाता है. इन कारणों की वजह से कितने सारे बच्चों की मौत हो जाती है. हम सब अगर स्वयं ही सचेत रहें तो इस तरह की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. भविष्य को सुखद बनाने के लिए हमें अपने आज पर विशेष ध्यान देना होगा क्योंकि आज की पहल कल सुंदर भविष्य का गठन करेगा. देश व समाज को नई दिशा देने के लिए सभी को जागरूक होना होगा. आज का नेक काम कल भविष्य गढ़ सकता है.

आज के बच्चे ही कल के सुनहरे भविष्य बनेंगे. इसकी रक्षा व सही शिक्षा-दीक्षा देना हम सबकी जिम्मेवारी है. इसके प्रति सबको जागरूक होना होगा. क्या आप मेरे विचारों से सहमत हैं? तो ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर शेयर करना ना भूलें. #InternationalChildProtectionDay

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