Lockdown: खिलाड़ियों का मानसिक तनाव दूर करने में परिवार की भूमिका अहम

    देशभर में लॉकडाउन है, ऐसे में हमारे खिलाड़ी इस स्थिति से निपटने में मानसिक रूप से कैसे मजबूत हैं? Coronavirus Lockdown Stress

    कोरोना से बचाव के लिए पूरी  दुनिया में लॉकडाउन है और यह स्थिति ऐसी है जिसके बारे में सोचकर तनाव हो सकता है. खिलाड़ियों का भी यही है क्योंकि वो भी इससे इतर नहीं हैं. खिलाड़ी भी रोजमर्रा की जिंदगी में स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं. खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य (Coronavirus Lockdown Stress) का मुद्दा अब बहुत ही गंभीर विषय बना हुआ है.

    देशभर में लॉकडाउन है, ऐसे में हमारे खिलाड़ी इस स्थिति से निपटने में मानसिक रूप से कैसे मजबूत हैं, आइए जानते हैं:

    coronavirus lockdown stress in indian players

    मनोज तिवारी, मनिंदर सिंह और इरफान पठान ने बताया कि भारत की पारिवारिक संरचना इस संकट से उबरने में कैसे सहायता करती है. मनोज तिवारी ने कई पश्चिमी देशों के साथ इस अंतर को समझाते हुए कहा, ‘मेरा मानना है कि भारत की पारिवारिक संस्कृति ऐसी चीज है जो इस दौर में हमें मानसिक दबाव (Coronavirus Lockdown Stress) से निपटने में सहायता करेगी. मैं लगातार यात्रा करता हूं लेकिन अब मुझे हर रोज अपने बेटे को दोपहर का खाना खिलाना पड़ता है.

    यह मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव है लेकिन यह बहुत अहम भी है. मनोज फिर कहते हैं आप शायद दुनिया के कुछ देशों के खिलाड़ियों को अकेले रहते हुए देखेंगे. वे आईपीएल में खेलते हैं, पार्टी करते हैं और जीवन का आनंद लेते हैं. जब आप अकेले रहते हैं तो अचानक सारी नकारात्मक चीजें आपके दिमाग में आने लगती है. जैसा कि कहा जाता है, खाली दिमाग शैतान का घर होता है.

    परिवार से आती है सकारात्मक सोचCoronavirus Lockdown Stress

    वहीं पूर्व भारतीय स्पिनर मनिंदर अलग किस्म के तनाव से गुजर चुके हैं. वे कहते हैं  ‘खाली घर में किससे बात करोगे आप? दीवारों से? अकेलापन कभी भी अच्छा नहीं है. घर में परिवार और दोस्तों के होने से मदद मिलती है. सकारात्मक वातावरण में ही रहिए. हमारी अपनी परेशानिया हैं और मुझे ऐसा नहीं लगता कि हमारे खिलाड़ियों को मानसिक मदद की जरूरत है. (Coronavirus Lockdown Stress)

    जबकि पूर्व क्रिकेटर इरफान कहते हैं कि हमारे खिलाड़ी ज्यादा मुश्किलों से गुजरते हुए मजबूत हो जाते हैं. वे कहते हैं, ‘अगर आप इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को देखें  तो, अगर आपके पास नौकरी नहीं है तो सरकार आपकी देखभाल करती है. सरकार आपको वित्तीय सहयोग मुहैया कराती है, जब तक कि आप काबिल नहीं हो जाते और यह अच्छी चीज है.

    हर मुश्किल में साथ देता है परिवार Coronavirus Lockdown Stress

    ऐसे में आपको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती. जबकि भारत में हमें काफी मुश्किल से इसे हासिल करना होता है. यहां हम बहुत कम उम्र से ही कठिनाइयों का सामना करना सीख लेते हैं. निश्चित रूप से परिवार की बात पर वह भी मनोज से सहमत हैं. उन्होंने कहा, ‘परिवार हमेशा आपके साथ रहता है क्योंकि वे आपसे बहुत प्यार करते हैं और ऐसा नहीं है कि जब आप खेल के शिखर पर हों, तभी वे परिवार आपके साथ होगा.

    बाकी देशों के खिलाड़ियों की तुलना में हमारे पास यह पारिवारिक साथ होता है. मेरे घर में मेरा बड़ा भाई, उसका परिवार, मेरा परिवार, मेरे माता पिता, सभी इसके लिए हैं और काम खत्म करके आप अपने परिवार के पास आते हैं. जबकि दीप दासगुप्ता इतने निश्चित नहीं है लेकिन उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में रिश्तों की दिलचस्प परीक्षा होगी.

    हर कोई बेहतर समय बिताने के बारे में बात तो कर रहा है लेकिन बेहतर समय है क्या? हम अपनी जिंदगियों में व्यस्त हैं, इसी बीच हमें जो समय मिलता है, उसे हम बेहतर समय कहते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अब यह सामान्य हो गया है, हम चौबीसों घंटे ऐसा कर रहे हैं. लेकिन सवाल है कि हम कैसे निकलते हैं क्योंकि हमारे परिवार वाले भी इसी अनुभव से गुजर रहे हैं.

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