Home Health Care सावधान…फिर पांव पसार सकता है डेंगू!

सावधान…फिर पांव पसार सकता है डेंगू!

डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए सतर्कता बहुत जरूरी है. अगर आप समय रहते इसके प्रति सावधान हो जाएं तो काफी हद तक इस घातक बीमारी से बचाव संभव है.

बारिश के मौसम में तो ऐसी कई सारी बीमारियां बिन बुलाए ही आ जाती हैं. जिसमें डेंगू (Dengue) एक मुख्य बीमारी है. बारिश के दौरान इस बीमारी का खतरा कई गुणा तक बढ़ जाता है. अभी अब जो बिन मौसम बरसात हो रही है, इसमें में डेंगू के फैलने का खतरा बना रहता है. इसलिए अगर समय रहते इसके प्रति सावधानी (dengue fever treatment) बरती जाए तो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होगा.

dengue mosquito
source: uttarakhandmirror

डेंगू मच्छर के काटने से होती है और यह एक संक्रामक बीमारी है. घरों में या आस-पास पानी जमने से इस बीमारी का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है. यह जानना बेहद जरूरी है कि मच्छरों का काटना कितना घातक होता है. डेंगू मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों से प्रति वर्ष सैकड़ों लोगों की मौत होती है. डेंगू एक जानलेवा बीमारी है इसलिए इसे हल्के में ना लें. अगर वक्त रहते इसका उपचार (dengue fever treatment) किया जाता है तो काफी हद तक इस पर नियंत्रण संभव है.

यहां हम डेंगू से जुड़ी कई अहम जानकारियों को साझा कर रहे हैं:

1. कैसे फैलता है डेंगू (How dengue spreads)

  • डेंगू के मच्छर बारिश के मौसम में बड़ी तेजी से फैलते हैं. इसके मच्छर जमे हुए पानी में ही पनपते हैं. सिर्फ घर ही नहीं बल्कि बाहर भी डेंगू के मच्छर जन्म लेते हैं. डेंगू का लार्वा प्लास्टिक बैग, फूल के गमले, कूलर में जमे पानी, प्लास्टिक के कप व सड़कों पर जमें पानी आदि में डेंगू का लार्वा पनपता है. डेंगू के मच्छर अगर एक बार ही काट ले तो व्यक्ति को बुखार आ जाता है.
  • पहले एडिज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है. इस दौरान वह मरीज का खून चूस लेता है. खून के साथ मच्छर के शरीर में डेंगू का वायरस भी प्रवेश कर जाता है. इसके बाद जब वह मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तभी वायसर उक्त व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है. इसी तरह एक मच्छर एक के बाद एक करके कई लोगों को अपना शिकार बना देता है. इस तरह कई लोग डेंगू वायरस पीड़ित हो जाते हैं.
  • जिस इंसान के अंदर रोग प्रतिरोधन क्षमता कम होती है उन्हें डेंगू जल्दी प्रभावित करता है. डेंगू के चार तरीके के वायरस होते हैं इसी में से किसी एक द्वारा काटने पर इंसान डेंगू पीड़ित हो जाता है.
  • डेंगू (Dengue) एक इंसान को कई बार शिकार बना सकता है.
  • अगर किसी को एक बार डेंगू हुआ है तो उसके शरीर में पूरी जिंदगी के लिए इस बीमारी से लड़ने की इम्यूनिटी पैदा हो जाती है. उस वायरस से ही यह इम्यूनिटी होती है जिसने मरीज को प्रभावित किया है.

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fever in dengue
source: cloudfront

2. डेंगू के लक्षण (Symptoms of dengue)

  • मच्छर काटने के 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू के लक्षण नजर आने लगते हैं.
  • ठंड के साथ तेज बुखार आना.
  • शरीर व सिर में लगातार तेज दर्द रहना.
  • भूख कम लगना.
  • पेट खराब होना.

3. उपचार (Treatment of dengue)

  • डेंगू के मरीज में ब्लड प्लेटलेट्स में तेजी से गिरावट आती है. ब्लड प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए पपीते के पत्ते के रस का सेवन करना लाभदायक होता है.
  • डेंगू पीड़ित को अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए.
  • गिलोय की जड़ और पत्तों का काढ़ा बनाकर सेवन करना भी लाभदायक होता है.
  • कभी भी बुखार आने पर बिना चिकित्सक की सलाह के कोई दवा का सेवन ना करें.
  • इससे बचाव के लिए फिजिकली व मेंटली स्ट्रॉग रहें.

4. ऐसे करें मच्छरों का खात्मा (Kill the mosquitoes)

  • घर हो या ऑफिस कहीं भी आसपास में पानी जमा होना ही डेंगू को न्योता देना है. इसलिए ध्यान रखें कि कहीं भी जल-जमाव ना होने दें.
  • डेंगू (Dengue) के मच्छरों का विस्तार साफ पानी में ही होता है. इसलिए टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें.
  • मच्छरों को घर में प्रवेश करने से रोकें. इसके लिए खिड़कियों व दरवाजों पर जाली लगवा कर रखें. ताकि मच्छरों को घर में प्रवेश करने से रोकना संभव हो सके.
  • घर में प्रति सप्ताह मच्छरनाशक का छिड़काव करें. दवा का छिड़काव करते वक्त नाक व मुंह को ढ़क कर रखें. खाने-पीने की चीजें भी बिल्कुल खुला ना रखें.
  • जहां तक जल जमाव की बात है तो पहले तो इसे जमने से रोकें. अगर यह संभव ना हो तो उक्त स्थान में पेट्रोल व केरोसिन ऑयल डाल दें.
  • कूलर, फूलों के गमले को सप्ताह में एक बार जरूर खाली करें दें. कुछ देर सूखने के बाद फिर उसमें पानी भरें.
  • मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे व कॉइल्स आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं.
Dont let water in these things
source: apnikheti

5. बरतें सावधानी (Caution)

  • डेंगू (Dengue) से बचाव के लिए शरीर का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा ढ़का रखें.
  • मच्छरों से बचाव वाली क्रीम का व्यवहार करें.
  • ज्यादा खाना खाने से सावधानी बरतें. ऐसे भोजन का सेवन करें जो आसानी से पच जाए.
  • बासी खाना खाने से बचें.
  • सोते वक्त मच्छरदानी लगाना ना भूलें.
  • भोजन में हल्दी का व्यवहार अधिक करें. सुबह पानी के साथ आधा चम्मच हल्दी या रात को दूध के साथ आधा चम्मच हल्दी का सेवन करें.
  • अजवाइन, हींग व अदरक का भी अधिक से अधिक व्यवहार करें.
  • तला हुआ खाना खाने से बचें. ज्यादा मसालेदार खाना भी न खाएं.
  • ऐसे मौसम में पत्ते वाली सब्जियों का सेवन करने से बचें.
  • कोशिश करें कि जहां तक हो सके भरपूर नींद लें.
  • पानी को हमेशा उबालकर ही पीएं.
  • तुलसी के पत्ते का रस भी फायदेमंद होता है. 8-10 तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ मिलाकर लें. 8-10 तुलसी के पत्ते को एक गिलास गरम पानी में उबालकर आधा कर लें. फिर इस पानी का सेव करें.
  • ऐसी चीजों का सेवन करें जिसमें विटामिन-सी अधिक मात्रा में हो. इससे इम्यून सिस्टम सही रहता है.

6. बच्चों में खतरा ज्यादा (Dangerous for children)

  • बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं. इसलिए उनके प्रति सावधान होने की ज्यादा आवश्यकता है. इनका इम्यून सिस्टम भी कमजोर होता है. स्कूल जाते वक्त उन्हें पूरे कपड़े पहनाकर ही भेजें. बच्चों के खालने वाली जगह चाहे वो स्कूल हो या घर वहां पानी जमा ना रहें.
  • बहुत छोटे बच्चे बीमारी के बारे में बता नहीं पाते इसलिए उनके व्यवहार पर ध्यान देना जरूरी होता है.
  • बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों व उल्टी हो तो उसे तुरंत डाक्टर के पास लेकर जाएं.
  • अगर बच्चे को डेंगू (Dengue) हो तो उसे अस्पताल में रखकर ही इलाज करवाएं. क्योंकि बच्चों में प्लेटलेट्स जल्दी गिरते हैं. उनमें डीहाइड्रेशन (पानी की कमी) भी जल्दी होता है.

7. डेंगू के प्रकार (Types of dengue)

डेंगू तीन तरह के होते हैं –

  • क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार
  • डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF)
  • डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)

8. ध्यान रखें (Keep in mind)

  • बरसात के मौसम में बुखार होने पर सिर्फ पैरासिटामोल, क्रोसिन, कैलपोल आदि दवा लें। अन्य दवाओं का सेवन बिल्कुल ना करें. डेंगू के दौरान बुखार की अन्य दवा खाने से शरीर में प्लेटलेट्स गिरने लगता है.
  • कई बार चौथे-पांचवें दिन बुखार कम हो जाता है. ऐसे में लगता है कि मरीज ठीक हो रहा है. जबकि ऐसे में अक्सर प्लेटलेट्स गिरने लगते हैं। बुखार कम होने के बाद भी एक-दो दिन में एक बार प्लेटलेट्स काउंट टेस्ट जरूर करवाना चाहिए.
  • डेंगू के मरीज को मच्छरदानी के अंदर ही रखें. ताकि मच्छर उसे काटकर फिर किसी अन्य इंसान में बीमारी ना फैलाए.
Mosquito nets for dengue patients
source: thehealthsite

9. प्लेटलेट्स (Platelets)

  • एक स्वस्थ्य इंसान के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होता है. अगर यह एक लाख से कम हो जाए तो डेंगू भी इसका कारण हो सकता है. जरूरी नहीं कि डेंगू के मरीज की प्लेटलेट्स नीचे जाए. प्लेटलेट्स एक लाख से कम होने पर मरीज को तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहिए। प्लेटलेट्स 20 हजार या उसके नीचे गिरने पर इसे चढ़ाने की जरूरत होती है.
वीडियो – डेंगू बुख़ार के लक्षण, कारण और उपचार

यह तो आप सब जानते हैं कि बरसात के मौसम में डेंगू जैसी घातक बीमारी का खतरा बना रहता है. अभी बिन मौसम बरसात भी इसके खतरे को बढ़ा सकती है. यानी इस मौसम में भी डेंगू के लार्वा पनप सकते हैं. इसलिए अगर आप पहले ही सतर्क हो जाते हैं तो डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. इसलिए सतर्क रहें, सुरक्षित रहें. क्या आप नहीं लगता है कि समय रहते इस घातक बीमारी के प्रति सावधानी जरूरी है? तो ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें.

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