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घरेलू हिंसाः हसीन जहां ने शमी को यहां फंसाया, जानिए क्या है केस!

आजकल के समाज में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिनकी जिंदगी में मानसिक, शारीरिक, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, लिंग असमानता जैसी कई कुरीतियां हिस्सा बन रही है. ऐसी परिस्थियों में महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है.

टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी अपनी पत्नी हसीन जहां के साथ विवादों को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहते हैं. घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के मामले में फंसे मोहम्मद शमी को सेशन कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हसीन जहां द्वारा मोहम्मद शमी और उनके भाई के खिलाफ दायर मामले में कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी है.

ज्ञात हो कि अलीपुर कोर्ट ने इससे पहले शमी व उनके भाई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर 15 दिनों के अंदर सरेंडर करने को कहा था. हसीन जहां ने पिछले वर्ष शमी के खिलाफ घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का मामला दर्ज किया था. दोनों भाइयों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए के तहत मामला दर्ज किया गया था. इसके तहत अदालत ने शमी को सरेंडर करने का निर्देश दिया था.

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इससे पहले अदालत ने जब मोहम्मद शमी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, तो उनकी पत्नी ने चौंकाने वाला बयान दिया था. हसीन ने कहा कि जब आसाराम व राम रहीम कानून से नहीं बच पाए तो शमी कैसे बच सकते हैं. उन्हें भी अपने किए की सजा जरूर मिलेगी. उन्होंने अदालत पर भरोसा भी जताया था.

घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार –

अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर महिलाएं हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं. उंचे-उंचे पोस्ट पर नौकरियां कर रही हैं. आज के युग में देखा जाए तो हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी है. आज हर कोई अपने करियर को लेकर गंभीर है.

वहीं आजकल के समाज में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिनकी जिंदगी में मानसिक, शारीरिक, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, लिंग असमानता जैसी कई कुरीतियां हिस्सा बन रही है. ऐसी परिस्थियों में महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है. ताकि समय आने पर वह अपने उन अधिकारों का इस्तेमाल कर सके जो उन्हें भारतीय कानून द्वारा दिए गए हैं.

अगर कोई महिला घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का शिकार हो रही हैं तो इसके लिए वह शिकायत दर्ज करवा सकती है. भारतीय संविधान के अनुसार मां-बेटी, मां, पत्नी, बहू या घर में रह रही किसी भी महिला पर घरेलू हिंसा करना अपराध के दायरे में आता है.

1. मुफ्त कानूनी मदद – Domestic Violence

कानून में दुष्कर्म पीड़ित महिला को मुफ्त में कानूनी मदद मिलने का अधिकार दिया गया है. ऐसे में पुलिस थानाध्यक्ष के लिए जरूरी है कि वह लीगल सर्विस ऑथोरिटी को सूचित करके उसके लिए वकील की व्यवस्था करे.

2. नौकरी के दौरान हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार –

किसी दफ्तर में या कहीं भी काम के दौरान अगर किसी महिला के साथ उत्पीड़न होता है तो वह यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकती है.

3. नाम उजागर नहीं करने का अधिकार –

कोई महिला अगर दुष्कर्म की शिकार होती है तो उसे अपनी असली नाम कहीं भी न छपने देने का पूरा अधिकार है. संविधान में उसके नाम को पूरी तरह गोपनीय रखने का अधिकार प्राप्त है. घटना से संबंधित अपना बयान वो महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में दर्ज करवा सकती है.

4. रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार – Domestic Violence

महिलाओं की सुरक्षा के लिए सूरज डूबने के बाद या फिर सूरज निकलने से पहले उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. ऐसा एकमात्र तभी संभव हो सकता है जब प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट का आदेश होता है.

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5. संपत्ति में अधिकार – Property Rights

पुश्तैनी संपत्ति पर महिला व पुरुष दोनों का बराबर का अधिकार (Domestic Violence) होता है. जबकि शादी के बाद पति की संपत्ति पर पत्नी का मालिकाना हक होता है. पीड़ित महिला को यह अधिकार दिया गया है कि पति ही उसका भरण-पोषण करेगा.

6. छेड़खानी के खिलाफ कानून –

किसी व्यक्ति को महिला की मर्यादा को भंग करने का अधिकार नहीं है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी महिला से छेड़छाड़, कोई अभद्र इशारा या कोई गलत हरकत करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है.

7. गरिमा और शालीनता का अधिकार – Domestic Violence

कोई महिला अगर किसी मामले में अपराधी है तो उस पर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा संबंधी जांच की प्रक्रिया किसी दूसरी महिला की मौजूदगी में होना जरूरी है.

8. मातृत्व संबंधी अधिकार –

मातृत्व संबंधी अधिकार के बारे में हर महिला को जानकारी रहना जरूरी है. महिलाओं को मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत मैटरनिटी बेनिफिट्स का अधिकार (Domestic Violence) मिला है. इस एक्ट के तहत गर्भवती होने पर वह 26 सप्ताह तक मैटरनिटी लीव ले सकती है. इस दौरान उसकी सैलरी में कोई कटौती नहीं की जा सकती. लीव के बाद महिला फिर से काम शुरू कर सकती है.

9. तलाक का आवेदन – Divorce application

हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार शादीशुदा जोड़ा शादी के एक साल के अंदर तलाक के लिए आवेदन नहीं कर सकते.

10. ईमेल के जरिए भी पुलिस में शिकायत –

जब महिला किसी कारणवश खुद पुलिस स्टेशन नहीं जा सकती तो वो डिप्टी कमिश्नर या पुलिस कमिश्नर को अपनी शिकायत ईमेल या रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से कर सकती है.

आप भी अगर कभी घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं तो यहां दी गई जानकारी आपके लिए कारगर हो सकती है. तो इसकी सहायता जरूर लें व अपने अनुभव को कमेंट कर ‘योदादी’ के साथ जरूर शेयर करें. #MohammedShami #HasinJahan

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