Home Health Care बच्चे का अत्यधिक पलकें झपकाना, कोई बीमारी तो नहीं है?

बच्चे का अत्यधिक पलकें झपकाना, कोई बीमारी तो नहीं है?

एक बच्चे की पलकें प्रति मिनट कम से कम 18 बार झपकती है. लेकिन बच्चा अगर इससे अधिक बार पलकें झपकाता है तो फिर इस पर ध्यान देना जरूरी है. Excessive blinking eyes in Hindi

छोटे बच्चों में कई सारी ऐसी समस्याएं है जिसके बारे में माता-पिता को पता ही नहीं चल पाता. उन समस्याओं में से एक है बच्चे की पलकों का अधिक झपकना. इस बीमारी को निमिष कहते हैं. आमतौर पर पलकों के झपकने से आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है. एक बच्चे की पलकें प्रति मिनट कम से कम 18 बार झपकती है. लेकिन बच्चा अगर इससे अधिक बार पलकें झपकाता है तो फिर इस पर ध्यान देना जरूरी है. क्यूंकि यह आंखों की किसी समस्या का भी संकेत हो सकता है. सामान्य से अधिक बार पलकें झपकाने की वजह चेहरे पर खिंचाव और आंखों में सूखापन भी हो सकता है.

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अधिक पलकें झपकने के कारण – Excessive blinking eyes in Hindi

1. चेहरे पर खिंचावExcessive blinking eyes in Hindi

चेहरे पर खिंचाव के कारण मांसपेशियों में ऐंठन होती है. इस ऐंठन का प्रभाव आंखों के अंदर और आस-पास की मांसपेशियों पर भी पड़ता है. मांसपेशियों में ऐंठन के कारण ही पलकें बहुत ज्यादा झपकने लगती है. बच्चे में अधिक क्रोध के कारण चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है. इसका प्रभाव नकी आंखों पर भी पड़ता है.

2. तनावExcessive blinking eyes in Hindi

कई बार ज्यादा देर तक टीवी या मोबाइल फोन देखने, कम रोशनी में पढ़ाई करने और नींद पूरी नहीं होने पर भी यह समस्या उत्पन्न होती है.

3. एलर्जीExcessive blinking eyes in Hindi

बच्चों का अत्यधिक पलकें झपकाना और आंखों से पानी आना एलर्जी का भी संकेत हो सकता है.

4. शुष्कताExcessive blinking eyes in Hindi

बच्चे की आंखों में सूखापन होने से भी वह पलकें बहुत ज्यादा झपकाता है और आंखों में खुजली की भी समस्या हो सकती है. ऐसी समस्या होने पर ध्यान रखें कि बच्चा बार-बार अपनी आंखों को ना रगड़े. साथ ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

5. नजदीक की नजर का कमजोर होना

किसी व्यक्ति के पास की नजर कमजोर होने पर भी पलकें बहुत ज्यादा झपकने लगती है. आपका बच्चा भी अगर अत्यधिक पलकें झपकाता है तो उसके आंखों की जांच करवाना जरूरी है क्यूंकि हो सकता है उसके पास की रोशनी कमजोर हो रही हो.

6. ओ.सी.डी

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर एक तरह की मानसिक बीमारी जिसका पता नहीं चल पाता. बच्चे में इस बीमारी की वजह से भी चेहरे में खिंचाव आता है और वह बार-बार पलकें झपकाता है.

7. ब्लेफेराइटिस

आंखों में बैक्टिरिया या फिर डैंड्रफ की वजह से भी बच्चा बहुत अधिक पलकें झपकाता है.

इन उपायों से मिल सकती है राहत – Excessive blinking eyes

बच्चे का अत्यधिक पलकें झपकाना आंख संबंधी किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. यहां बताए जा रहे कुछ उपायों को आजमाकर इस समस्या पर नियंत्रण किया जा सकता है.

1. तनाव दूर करें

बच्चे को कभी तनाव में नहीं रहने दें. उसे तनाव मुक्त रखने के लिए बच्चे को ध्यान, विश्राम व योग आदि सिखा कर उसे तनाव मुक्त रखें.

2. आंखों को सुरक्षित रखें

आंखों को सुरक्षित रखने के लिए चश्मे का इस्तेमाल कर सकते हैं. चश्मा आंखों को बैक्टिरिया से बचाता है और बच्चे के आंखों में जलन की समस्या नहीं होती है.

3. आंखों को साफ रखें

बच्चे में बार-बार आंख धोने की आदत डालें. बच्चा अगर समय-समय पर अपनी आंखों को धोता रहेगा तो इससे भी पहलों के अत्यधिक झपकने में राहत मिलेगी.

4. आंखों में सूखापन न होने दें

आंखों को सूखापन से बचाव के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए. यह आहार अश्रु ग्रंथियों को उत्तेजित करता है. इससे आंखों में सूखेपन की समस्या नहीं होती.

5. स्वस्थ आहारExcessive blinking eyes in Hindi

पोषण युक्त आहार का सेवन करने व भरपूर पानी पीने से आंखों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है.

ऐसे बरतें एहतियात:

  • बच्चे को 8-10 घंटे तक सोने दें.
  • टीवी देखते समय, कंप्यूटर पर काम करते समय और पढ़ाई करते वक्त कमरे में पर्याप्त रोशनी रखें.
  • नियमित रूप से व्यायाम करने की आदत डालें.
  • विटामिन सप्लीमेंट्स दें.
  • मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर के सामने बैठने का समय सीमित करें.

चिकित्सक से सम्पर्क करें तो है इलाज

1. हाइड्रेटिंग आई ड्रॉप्स

2. चश्मा

3. मनोवैज्ञानिक चिकित्सा

4. एंटीबायोटिक आई ड्रॉप

5. एंटिहिस्टामाइन्स

इन सुझावों को अपना सकते हैं:

यह तो साफ है कि बच्चे का अत्यधिक पलकें झपकाना किसी घातक रोग की निशानी नहीं है. लेकिन यहां बताए जा रहे लक्षण अगर आपके बच्चे में दिख रहे हों तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें.

  • बच्चे का बार-बार आंखों को मलना और रगड़ना.
  • बच्चे को किसी बात पर तुरंत गुस्सा आना.
  • सोकर उठने पर बच्चे को आंख खोलने में कठिनाई आना.
  • बच्चे की दोनों आंखों का हमेशा लाल रहना.
  • पास रखी किताब या कुछ भी पढ़ने के लिए बच्चे का आंखों पर जोर डालना.
  • बच्चे के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना.

आंख बहुत ही संवेदनशील अंग है इसलिए इसमें किसी भी तरह की समस्या दिखते ही तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें. चिकित्सक हर 3 से 4 महीने में बच्चे की आंखों की जांच करवाने की सलाह देते हैं. चश्मा पहनने वाले बच्चे को प्रति 3 महीने में चश्मा बदलने की सलाह दी जाती है.

एक बात ध्यान रखें कि बच्चे में हो रहे बदलाव पर हमेशा ध्यान रखें. यानी बच्चा अधिक पलकें झपकाता (Excessive blinking eyes in Hindi) है या सामान्य इसका ख्याल रखें ताकि समय रहते इलाज भी शुरू कर दें. आपके बच्चे में अगर अधिक पलकें झपकाने की समस्या है तो दवा का नियमित सेवन करने से भी इस समस्या में राहत मिल जाएगी.

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