Home Education भारत-पाक के अलग-अलग स्वतंत्रता दिवस को लेकर सही तथ्य क्या है?

भारत-पाक के अलग-अलग स्वतंत्रता दिवस को लेकर सही तथ्य क्या है?

भारत व पाकिस्तान के एक ही दिन आजाद होने के बाद भी दोनों की आजादी की अलग-अलग तारीख को लेकर सही तथ्य किसी के पास नहीं है. HappyIndependenceDay

15 अगस्त का दिन कौन भूल सकता है. भारत के लिए 15 अगस्त (Happy Independence Day) तारीख के साथ-साथ आजादी के जश्न का दिन है. वर्ष 1947 को इसी दिन अपना देश आजाद हुआ था. आजाद भारत के लिए न जाने कितने देशभक्तों व वीरों को अपनी आहुति देनी पड़ी और कितनों की जिंदगी जेल की चार दिवारी में बीती थी.

इस वर्ष हम सब 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं. सोचिए जिस वक्त देश आजाद हुआ था उस वक्त लोगों की क्या स्थिति रही होगी. इतने लंबे समय तक गुलामी की जंजीरों से मुक्त होने वालों के लिए आजादी का मतलब क्या होगा.

लंबे समय तक गुलामी सहने व न जाने कितने नागरिकों का जीवन खोने के बाद तब जाकर भारत को आजादी मिली थी. 15 अगस्त 1947 को ही भारत का दो भागों में विभाजन किया गया था. उसी समय पाकिस्तान अस्तित्व में आया था.

15 अगस्त (Happy Independence Day) का दिन हम भारतवासियों के लिए बहुत बहुमूल्य है. क्योंकि यह सभी के लिए एक नई शुरुआत का दिन है. उस वक्त हर भारतवासी का एक ही सपना था देश की आजादी का.

स्वतंत्रता दिवस का महत्व आज भी उतना ही है जितना पहले था. यह दिवस पूरी निष्ठा, समर्पण व देशभक्ति के साथ मनाया जाता है. इस दिन प्रधानमंत्री दिल्ली में लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराते हैं. इस दौरान राष्ट्रगान गाया जाता है.

भारत व पाक की आजादी की तारीख पर कई अटकलें – Happy Independence Day

भारतीय इतिहास की 15 अगस्त (Happy Independence Day) 1947 की तारीख जब हमारे देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली थी. इसी तारीख को पाकिस्तान भी आजाद हुआ था. लेकिन वहां की जनता अपनी आजादी का जश्म 14 अगस्त को मनाते हैं.

दोनों देशों की आजादी एक ही दिन मिलने के बावजूद इनकी तारीख अलग-अलग कैसे हो गई. लेकिन इसके पीछे कारण है. 14 अगस्त को पाकिस्तान के रूप में एक अलग राष्ट्र की स्वीकृति हो गई थी.

ब्रिटिश लॉर्ड माउंटबेटन ने पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देकर सत्ता सौंप दिया था. इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट के तहत भारत-पाक को वर्ष 1947 में 14 व 15 अगस्त के बीच की रात को आजादी मिली थी.

रात्रि 12 बजते ही दोनों देशों का वजूद स्थापित हो गया था. अब आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि जब दो देशों का बंटवारा रात्रि 12 बजे किया गया तो फिर भारत पाक के स्वतंत्रता दिवस की तारीख अलग-अलग कैसे हो गई?

वर्ष 1948 में पाकिस्तान की आजादी को 14 अगस्त की तारीख दी गई थी. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उस महीने में रमजान चल रहा था. 14 अगस्त को रमजान का 27वां दिन था. यह दिन इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से बहुत ही पवित्र दिन माना जाता है.

इसलिए पाकिस्तान ने अपनी आजादी की तारीख 14 अगस्त ही रखी. जबकि पाकिस्तान का पहला डाक टिकट वर्ष 1948 को जारी किया गया था. उस डाक टिकट में आजादी की तारीख 15 अगस्त 1948 अंकित है.

आज भी जिन्ना की आवाज में सुनाया जाता है 15 अगस्त की आजाद सुबह वाला संदेश –

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान के जन्म की घोषणा 15 अगस्त को ही किया था. रेडियो पाकिस्तान प्रति वर्ष 14 अगस्त को मोहम्मद अली जिन्ना की आवाज वाला बधाई संदेश सुनाता है.

हालांकि उस संदेश में वो यह बोल रहे होते हैं कि 15 अगस्त की आजाद सुबह पूरे राष्ट्र को मुबारक हो. पाकिस्तान की आजादी के बाद वर्ष 1948 से इसकी तारीख परिवर्तित कर 14 अगस्त तो कर दी गई लेकिन इसका कारण किसी को नहीं मालूम.

पाकिस्तान को आजादी मिलने के 13 महीने बाद ही मोहम्मद जिन्ना की मौत हो गई थी. उनकी मौत होने के बाद ही वहां के स्वतंत्रता दिवस की तारीख एक दिन पीछे कर दी गई. जब देश बंटवारे की बात आई तो इसके नाम पर ही हर जगह हिंसा की शुरुआत हो गई.

माउंटबेटन के लिए हिंदू-मुसलमान की हिंसा रोकना था चुनौतीपूर्ण –

देश में हिंदू-मुसलमान के बीच फैली यह हिंसा लॉर्ड माउंटबेटन के लिए चुनौतीपूर्ण था. इसलिए उसने तय तारीख से पहले वर्ष 1947 में ही सत्ता सौंपने का फैसला लिया.

ताकि किसी भी तरह इस दंगे को रोका जा सके. लॉर्ड माउंटबेटन की जानकारी के आधार पर ही ब्रिटेन से भारत को जल्द स्वतंत्र करने का फैसला लिया था. माउंटबेटन को 20 फरवरी 1947 को भारत का अंतिम वायसराय बनाया गया था.

उन्हीं का कहना था कि कहीं का भी औपनिवेशिक शासन खत्म होने पर वहां हत्याएं, दंगे होते हैं और भारत में भी यही हो रहा है. इनकी बातों पर अमल करते हुए ब्रिटिश संसद में 4 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पेश किया गया था.

फिर 15 दिनों के अंदर इसे पारित भी कर दिया गया. इस अधिनियम में लिखा था कि ब्रिटिश शासन का अंत 15 अगस्त 1947 को हो जाएगा. माउंटबेटन भारत की आजादी के बाद 10 महीने तक इंडिया में ही रहे थे. इन 10 महीनों तक भारत के गवर्नर जनरल यही रहे.

आजादी से संबंधी कुछ रोचक जानकारियां – Happy Independence Day

1. 15 अगस्त 1945 के दिन ही दक्षिण कोरिया ने जापान से, 1971 में बहरीन ने इंग्लैंड से और 1960 में कांगो गणराज्य ने फ्रांस से स्वाधीनता हासिल की थी.

2. भारत के अंतिम गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा इसी दिन को आजादी का दिन घोषित करने की वजह यह थी कि 15 अगस्त के दिन ही जापान ने मित्र देशों का सेना के सामने समर्पण किया था.

3. इंडिया में ब्रिटिश शासन के अंतिम वायसराय होने के कारण लॉर्ड माउंटबेटन को भारत व पाकिस्तान दोनों देशों के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेना था. इस बारे में कहा यह भी जाता है कि किसी तरह की दिक्कत ना हो उससे बचने के लिए ही उन्होंने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की तारीख 14 अगस्त व भारत की तारीख 15 अगस्त करने की घोषणा की थी.

4. पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ही 14 अगस्त की मध्यरात्रि को अपना प्रसिद्ध भाषण दिया था. जिसका नाम था ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’. देश के प्रथम प्रधानमंत्री वे 15 अगस्त की सुबह बने थे.

जब आजादी के जश्न में डूबा था देश, अनशन पर बैठे थे राष्ट्रपिता –

5. जब पूरे देश में 15 अगस्त (Happy Independence Day) 1947 को आजादी का जश्न मनाया जा रहा था. लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इस जश्न से बिल्कुल दूर थे. यानी उन्होंने इस जश्न में हिस्सा नहीं लिया था.

6. उन्होंने अनशन करके इस दिन को अलग तरीके से मनाया. आजादी वाले दिन वे कलकत्ता (कोलकाता) में थे और उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि हिन्दु व मुसलमानों के बीच शांति व सौहार्द कायम हो सके.

7. पंडित जवाहरलाल नेहरू व सरदार वल्लभभाई पटेल ने आजाद से महज कुछ दिनों पहले दूत के हाथों एक पत्र भेजा था. उस पत्र में लिखा था कि “बापू आप राष्ट्रपिता हैं. 15 अगस्त 1947 पहला स्वाधीनता दिवस होगा. हम चाहते हैं कि आद दिल्ली आकर हमें अपना आशिर्वाद दें.”

8. इस पत्र के जवाब में गांधीजी ने कहा कि “जब हिंदू व मुस्लिम कलकत्ता में एक दूसरे की हत्याएं कर रहे हैं, तब ऐसे में मैं दिल्ली में जश्न मनाने कैसे जा सकता हूं. यहां शांति स्थापित करने के लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूं.”

9. स्वतंत्रता दिवस (Happy Independence Day) के उपहार के रूप में गांधीजी ने दूत के हाथों नेहरू व पटेल को एक सूखा पत्ता भिजवाया था. वेस्ट बंगाल सरकार के मंत्री आजादी वाले दिन गांधीजी का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे. अपने आशीर्वाद में गांधीजी ने उन्हें गरीबों की सेवा करने व विनम्र रहने को कहा था.

10. आजादी से जुड़े रोचक तथ्यों में यह हिस्सा और मजेदार है. क्योंकि देश में गणतंत्र स्थिर रखने के लिए उज्जैन के ज्योतिष सूर्यनारायण व्यास ने पंचाग देखकर आजादी का मुहूर्त निकाला था. ज्योतिष ने बताया था कि अगर 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि 12 बजे आजादी ली गई तो हमारा गणतंत्र अमर रहेगा.

आजादी मिलते ही देर रात संसद की सफाई की गई – Happy Independence Day

11. ब्रिटिश शासकों के बाद अब संसद में भारतीय बैठने वाले थे. इसलिए ज्योतिष के कहने पर आजादी के बाद देर रात को संसद को धोया गया था. उन्हीं के बताए हुए मुहूर्त पर गेस्वामी गिरधारीलाल ने संसद का शुद्धिकरण भी किया था।

12. स्वतंत्रता के वक्त भारत में 662 रियासतें थीं. जिसमें से 565 रजवाड़े ब्रिटिश शासन के अंतर्गत थे. 565 रजवाड़ों में से 552 रियासतों ने स्वेच्छा से भारतीय परिसंघ में शामिल होने की स्वीकृति दी थी. जूनागढ़, हैदराबाद, त्रावणकोर व कश्मीर को छोड़कर बाकी की रियासतों ने पाकिस्तान के साथ जाने की स्वीकृति दी थी.

13. भारत का बंटवारा माउंटबेटन योजना (3 जून प्लान) के आधार पर तैयार भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर हुआ था. अधिनियम में कहा गया था कि 15 अगस्त 1947 को भारत व पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बनेंगे व उन्हें ब्रितानी सरकार सत्ता सौंपेगी.

भारत व पाकिस्तान के एक ही दिन आजाद होने के बाद भी दोनों की आजादी की अलग-अलग तारीख को लेकर सही तथ्य किसी के पास नहीं है. पर सबसे बड़ी बात तो यह है कि आज हम आजाद हैं. इस आजादी के लिए अपनी जान गंवाने वाले देशभक्तों की कुर्बानी को याद रखें. HappyIndependenceDay

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