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बेटे के लिए महिलाएं खुद करवा रहीं भ्रूण जांच!

बेटा पाने की चाह में लाखों चीनी महिलाएं अपने खून का नमूना हांगकांग भेज रही हैं. ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से लोग चोरी-छिपे इसे भेज रहे हैं. Fetal test by women

आज के युग में बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं होता. क्योंकि इस अत्याधुनिक युग में लड़कियां भी वो सारा काम कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं. इसका उदाहरण आप हर फिल्ड में देख सकते हैं. चाहे वो शिक्षा हो, नौकरी हो या फिर बिजनेस. लड़कियां (Fetal test by women) भी आज लड़कों के साथ हर क्षेत्र में हाथ से हाथ मिलाकर चल रही हैं.

बावजूद इसके आज भी कुछ लोग उस पुरानी धारणा में ही जीते हैं, कि उन्हें बेटी नहीं बेटा ही चाहिए. कई लोग बेटे की चाह में कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं. ऐसा सिर्फ इंडिया में ही नहीं होता बल्कि चीन में भी लोग बेटे की चाह में कुछ भी करने को तैयार रहते हैं.

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जानकारी के अनुसार बेटा पाने की चाह (Gender checke) में कानून का उल्लंघन करते हुए लाखों चीनी महिलाएं अपने खून का नमूना हांगकांग भेज रही हैं. इसकी वजह है कि हांगकांग में 7 से 10 हफ्ते के भ्रूण की जांच की तकनीक है. ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से लोग चोरी-छिपे अपने रक्त के नमूने हांगकांग भेज रहे हैं.

चीन में 2002 से ही लिंग जांच कानून जूर्म –

जहां तक चीन की बात है तो यहां वर्ष 2002 से ही लिंग जांच कानून जूर्म करार हो चुका है. इसके विपरीत हांगकांग में यह आज भी वैध है. हांगकांग के क्लीनिकों ने नॉन-इंवेसिव पैटर्नल टेस्टिंग नामक की नई तकनीक की खोज की है. इस मशीन के माध्यम से 8-10 सप्ताह के भ्रूण की भी लिंग जांच की जा सकती है. इस टेस्ट के लिए गर्भवती (Fetal test by women) के खून का नमूना ही काफी होता है.

रक्त के नमूने को चीन से हांगकांग तक पहुंचाने के काम में कई गिरोह शामिल है. इस गिरोह मे हर उम्र के लोग शामिल हैं. इसमें बुजुर्ग से लेकर स्कूली छात्र तक भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक तस्करों को प्रति नमूना 1 से 3 हजार रूपये तक आसानी से मिल जाता है. पिछले फरवरी में कस्टम अफसर ने 200 शीशियों के साथ बच्ची को पकड़ा था.

बढ़ रही जेंडर गैप की समस्या – Gender check

जेंडर गैप के मामले में चीन की स्थिति बेहद खराब है. 149 देशों के वैश्विक जेंडर गैप इंडेक्स में चीन 103वें स्थान पर है. वर्ष 1970 में चीन में 1 बच्चा पैदा करने की नीति लागू की गई थी. जिसका पालन करवाने के नाम पर ही बड़ी संख्या में भ्रूण हत्याएं (Gender check) की गई. इसकी वजह से चीन में लिंग भेद काफी बढ़ गया. फिर वर्ष 2015 में चीन को इसे बंद करना पड़ा. हालांकि हत्याओं को रोकना उनके बस की बात नहीं थी.

भारत में 1000 पुरुष पर 930 महिलाएं-

इंडिया में 1000 पुरुषों महिलाओं की संख्या 930 है. जबकि चीन में महिलाओं की संख्या 920 है. वर्ष 1970 से 2017 के बीच भारत में 1.2 करोड़ बच्चियों की हत्या जन्म से पहले ही कर दी गई है.

क्या है भ्रूण हत्या – Gender check

गर्भ में पल रहे भ्रूण की लिंग जांच (Gender check) करवाना या फिर शिशु को जिंदा पैदा होने से रोकना भ्रूण हत्या कहलाता है. भ्रूण की जांच के लिए अल्ट्रासाउण्ड या सोनोग्राफी जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन ऐसा करना गर्भधारण पूर्व और प्रसूति-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के तहत दण्डनीय अपराध माना जाता है.

इन व्यक्तियों को मिल सकती है सजा –

1. कोई व्यक्ति अपने घर या बाहर कहीं भी अगर लिंग की जांच के लिए किसी तकनीक का इस्तेमाल करता है तो.

2. गर्भवती महिला और उसके पति द्वारा स्वयं इस तरह का कोई कार्य जिससे लड़के के जन्म को बढ़ावा मिल रहा हो. जैसे-आयुर्वेदिक दवाएं खाना या कोई वैकल्पिक चिकित्सा.

3. महिला को गर्भ में पल रहे भ्रूण की लिंग जानकारी के लिए उकसाना.

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4. अगर कोई चिकित्सक लिंग पता करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करता है तो.

5. किसी परिजन या अन्य व्यक्ति द्वारा गर्भवती महिला पर लिंग जांचने के लिए दबाव बनाना.

6. भ्रूण के लिंग चयन की सुविधा के बारे में किसी प्रकार का प्रकाशन या पत्र निकालने वाले.

7. अस्पताल, लेबोरेटरी, क्लीनिक या कोई भी संस्था जो सोनोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल भ्रूण का लिंग पता करने के लिए करते हैं.

8. भ्रूण हत्या कानून के तहत ये सारे जुर्म गैर जमानती व समझौता योग्य नहीं है.

अधिनियम के तहत दण्ड का प्रावधान – Gender check

1. लिंग पता करने के लिए भ्रूण की जांच कराना कानूनन अपराध है.

2. भ्रूण की जांच करने वाले चिकित्सक व तकनीकी सहायक को 3 साल तक जेल के साथ 10 हजार तक का जुर्माना हो सकता है.

3. लिंग चयन के लिए भ्रूण की जांच कराने पर 3 साल तक जेल व 10 हजार रूपये तक का जुर्माना हो सकता है.

4. इसी अपराध को दोहराने पर 5 साल की जेल व 5 हजार का जुर्माना.

5. भ्रूण की जांच संबंधी विज्ञापन देना अपराध है और ऐसा करने वाले को 03 साल की जेल और 10 हजार तक का जुर्माना हो सकता है.

6. भ्रूण की जांच करने वाले केन्द्रों का पंजीयन रद्द होने की संभावना.

7. अगर गर्भवती महिला की सोनोग्राफी तकनीक से जांच की जाती है तो सोनोग्राफी करने वाले को 02 साल तक जांच का पूरा ब्यौरा रखना होगा. अन्यथा उसे सजा हो सकती है.

8. इसकी जांच के लिए गर्भवती महिला की लिखित अनुमति लेना जरूरी होता है.

9. इस अनुमति की कॉपी गर्भवती महिला को भी देना जरूरी है.

सरकार व समाज ने बेटा-बेटी दोनों को ही बराबरी का दर्जा दिया है. लेकिन अभी भी कई इलाके ऐसे है जहाँ लड़कियों के साथ भेदभाव किया जाता है. इस तरह की सोच वाले लोगों को जागरूक होना जरूरी है. भविष्य में भी लड़का-लड़की दोनों समानता से विश्व में मानव जाति के विकास में योगदान देंगे. #FemaleFoeticide

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