Home Education फिशरीज साइंस में है रोजगार के शानदार विकल्प- Fisheries Science in Hindi

फिशरीज साइंस में है रोजगार के शानदार विकल्प- Fisheries Science in Hindi

बेहतर करियर के लिए मछली पालन एक उभरता हुआ क्षेत्र माना जाता है. युवाओं के लिए यह एक बेस्ट ऑप्शन है. (Fisheries Science in Hindi)

मछली पालन (Fisheries Science in Hindi) के क्षेत्र में करियर बनाना सुनने में बहुत ही आसान सी बात लगती है. लेकिन अभी के जमाने में मछली पालन बेहतर करियर के लिए उभरता हुई क्षेत्र माना जाता है. प्रशिक्षित युवा इस क्षेत्र में अच्छी कमाई कर रहे हैं. आप अगर मछली पालन या फिर फिशरीज साइंस में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो जरूर बनाएं. यह आपके लिए बहुत ही बेहतर ऑप्शन है.

Fisheries Science

इस क्षेत्र में जाने के लिए डिप्लोमा, बैचलर और पीजी तक के तमाम कोर्स उपलब्ध हैं. मछली पालन का क्षेत्र बहुत ही बड़ा है. केंद्रीय मछली, पशुपालन व डेयरी मंत्रालय की तरफ से हाल ही में एक आंकड़ा जारी किया गया है, जिसमें भारत मछली उत्पादन में दुनिया का सबसे बड़ा देश बन चुका है. जबकि पूरे विश्व में चीन मछली उत्पादन में प्रथम पर है.

साल 2016-17 की तुलना में 2017-18 में मछली उत्पादन में 10 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. आगामी पांच वर्षों में सरकार का लक्ष्य मछली व मत्स्य उत्पादों के आयात को दोगुना करना है. यानी इस व्यापार को 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाना है. अभी यह आंकड़ा 45,000 करोड़ है और इसके लिए सरकार आगामी पांच सालों में इस क्षेत्र में 25,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की तौयारी में है.

मछली पालन…

फिशरीज साइंस (Fisheries Science in Hindi) यानी व्यावसायिक एवं मनोरंजन के उद्देश्य से मछली उत्पादों का संवर्धन अध्ययन को फिशरीज साइंस कहते हैं. इस अध्ययन के तहत मछलियों के जीवन चक्र जैसे मछली के अंडे कब और कहां उत्पन्न होता हैं, मछलियां कितनी तेजी से बढ़ती है व एक्वाकल्चर की पढ़ाई कराई जाती है.

इसमें पढ़ाए जाने वाले तमाम विषय रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं. अगर हम पिछले एक दशक की बात करें तो मछली पालन के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है. एक समय था जब लोग सिर्फ खानपान या फिर अपना शौक के लिए मछली पालन किया करते थे. जबकि भारतीय और मल्टीनेशनल कंपनियां इस क्षेत्र में विशाल इंवेस्टमेंट के साथ उतर रही हैं. अफरीकन एवं गल्प देशों में मछली पालन से संबंधित प्रोफेशनलों की मांग बहुत ज्यादा है.

कोर्स और योग्यताFisheries Science in Hindi

मछली पालन के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बैचलर ऑफ साइंस (बीएफएस) इन फिशरीज कोर्स कर सकते हैं. फिशरीज से संबंधित जॉब ओरिएंटेड कुछ शॉर्ट टर्म कोर्सेज भी हैं जिसे करने के बाद नौकरी मिलने में आसानी होती है. आप अगर फिशरीज कोर्स करना चाहते हैं तो इसमें एडमिशन के लिए उच्च मांध्यमिक (10+2) में बायोलॉजी सब्जेक्ट में न्यूनतम 55 फीसद अंकों का होना अनिवार्य है. इसके लिए डिप्लोमा से लेकर बैचलर और पीजी तक विभिन्न तरह के कोर्स हैं.

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फिशरीज साइंस (Fisheries Science in Hindi)के कोर्स में मछली पकड़ने से लेकर मछलियों की प्रोसेसिंग और बिक्री करने तक की जानकारी दी जाती है. कोर्स के तहत मछलियों का जीवन, उनकी ब्रीडिंग, इकोलॉजी समेत अन्य विषय भी शामिल हैं. विद्यार्थियों क विभिन्न किस्म की मछलियों के साथ-साथ तरह-तरह के पानी के बारे में भी बताया जाता है. स्टूटेंड्स को मछली के मामले में पूरी तरह एक्सपर्ट बनाया जाता है.

ज्यादातर लोगों को सिर्फ बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस के बारे में ही जानकारी है. जबकि इसमें और भी कई सारे कोर्स उपलब्ध हैं. जैसे बैचलर ऑफ साइंस इन इंडस्ट्रीयल फिश एंड फिशरीज, एडवांस्ड डिप्लोमा इन फिशिंग गियर टेक्नोलॉजी, एमएससी इंडस्ट्रीयल फिशरीज, मास्टर ऑफ फिशरी साइंस और फिशिंग वेसल इंजीनियरिंग भी शामिल है.

मछली पालन…

बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस का कोर्स 4 वर्ष का होता है. इस कोर्स में एडमिशन के लिए बायोलॉजी से 12वीं पास करना जरूरी है. बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस के तहत विद्यार्थियों को एक्वाकल्चर, फिश प्रोसेसिंग, मेरीकल्चर, स्टोरेज टेक्नोलॉजी और मछलियों की बीमारियों का इलाज समेत इससे संबंधित अन्य विषय भी पढ़ाए जाते हैं. फिशरीज साइंस की पढ़ाई का मुख्य हिस्सा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग है. इस पढ़ाई में मछली से संबंधित आंकड़े इकट्ठा करना भी शामिल है. बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस में मास्टर डिग्री कोर्स 2 वर्ष का होता है.

माइक्रोबायोलॉजी में मछलियों का सूक्ष्म रूप से अध्ययन किया जाता है. इसमें मछलियों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां दी जाती है. फिश प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी में मछलियों के संरक्षण को विभिन्न तरीकों, उपायों के साथ-साथ मछलियों से बनने वाले उत्पादों की विस्तृत जानकारी दी जाती है.

अक्वाटिक्स एंवारनमेंट साइंस के तहत जल में रहने वाले जीवों की शारीरिक बारिकियों के बारे में पढ़ाया जाता है. फिशरी इंजीनियरिंग विषय में मछली पकड़ना और इससे संबंधित उपकरणों का रखरखाव और निर्माण के बारे में भी इसमें पढ़ाया जाता है. जबकि फिशरी इकोऩॉमिक्स और मार्केटिंग में प्रोडक्शन, सप्लाई और मार्केटिंग से संबंधित हर पहलू के बारे में पढ़या जाता है.

नौकरी के लिए प्रतिष्ठित संस्थान और पद

फिशरी साइंस (Fisheries Science in Hindi)की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी संस्थानों जैसे एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन एजेंसी (ईआईए), मरीन प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमपीईडीए), कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी ऑप इंडिया (सीएए), इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन एंड इंफॉर्मेशन सर्विस (आईएनसीओआईएस), फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड, अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई), फिशरीज सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी आदि में टेक्निकल ऑफिसर या फिर असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी कर सकते हैं.

जबकि राज्य सरकार के फिशरी विभाग में असिस्टेंट फिशरीज डेवलपमेंट ऑफिसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, रिसर्च असिसटेंट, डिस्ट्रिक्ट फिशरीज डेवलपमेंट ऑफिसर, टेक्निशियन व बायोकेमिस्ट आदि पदों पर नौकरी मिल सकती है.

वेतनFisheries Science in Hindi

फिशरीज से ग्रैजुएट कोर्स करने पर शुरूआती वेतन प्रति माह 10 से 12 हजार रुपये हो सकती है. फिशरीज के क्षेत्र में रिसर्चर के पद पर नियुक्ति अखिल भारतीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होती है. इनका वेतन एक जूनियर लेक्चरर के जितना होता है.

संभावनाएं

इंडिया की करीब 8 मिलियन आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र पर निर्भर है. मछली निर्यात के मामले में भारत सातवें स्थान पर है. संभावना है कि भविष्य में फिशरीज उद्योग 16 फीसद की दर से बढ़ेगा. प्रशिक्षित युवाओं की इस क्षेत्र में अभी बहुत ज्यादा मांग है. फिशरीज एक्सपर्ट शिक्षण-प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग एंड प्रोडक्शन, मेरिनकल्चर, प्रीजर्वेशन, फिश फार्म से सेबंधित कार्पोरेट सेक्टर, नाबार्ड, रिसर्च क्षेत्र में काम कर सकते हैं. इस क्षेत्र में स्वरोजगार करने के लिए सरकारी और निजी किसी भी बैंक से लोन आसानी से मिल जाता है.

ये रहे शिक्षण संस्थानFisheries Science in Hindi

1. नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

2. कॉलेज ऑफ फिशरीज, धोली, बिहार

3. राजस्थान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, बीकानेर, राजस्थान

4. सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, पश्चिम बंगाल

5. सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन, मुंबई, महाराष्ट्र

6. जी.बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रिकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर, उत्तराखंड

7. पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना, पंजाब

8. सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजी, कोच्ची, केरल

9. सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर, भुवनेश्वर, ओडिसा

10. असम एग्रीकल्चर यूनिंवर्सिटी, असम

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