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G4 swine flu virus in hindi: कोरोना के बाद एक और नई महामारी का खतरा

एक तरफ पूरा विश्व कोराना वायरस जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा. अब इसी बीच एक और नए वायरस का पता चला है, (G4 swine flu virus in hindi)

एक तरफ पूरा विश्व कोराना वायरस जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा. अब इसी बीच एक और नए वायरस (G4 swine flu virus in hindi) का पता चला है, जो एक इंसान से दूसरे इंसान में बड़ी आसानी से फैल सकता है. इस नए वायरस का पता चीन के वैज्ञानिकों ने लगाया है. कोरोना वायरस की ही तरह इस वायरस से भी महामारी फैलने की पूरी संभावना जताई जा रही है.

G4 swine flu virus

यह वायरस G4 EA H1N1 हाल ही में सूअर के अंदर पाया गया है. इस नए तरह के स्वाइन फ्लू वायरस के बारे में चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें इंसानों को भी संक्रमित करने की क्षमता है. डर की बात ये है कि इस वायरस में वे सभी लक्षण मौजूद हैं जो एक इंसान से दूसरे इंसान तक बहुत आसानी से फैल सकता है.

अमेरिकी साइंस जर्नल ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार यह वायरस महामारी (G4 swine flu virus in hindi) की वजह बन सकता है. जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस तुरंत खतरनाक साबित नहीं हो सकता. इस नए वायरस पर रिसर्च चीनी यूनिवर्सिटियों और चीन के बीमारी नियंत्रक और रोकथाम केंद्र के वैज्ञानिकों ने किया है.

सूअरों के 3 हजार से ज्यादा नमूनों पर हुई रिसर्च – G4 swine flu virus in hindi

वैज्ञानिकों ने साल 2011 से 2018 तक चीन के 10 अलग-अलग अंचलों में स्थित बूचड़खानों के सूअरों की नाक से 3 हजार से ज्यादा नमूने लिए थे. इसके बाद एक पशु चिकित्सालय में स्वाइन फ्लू के कुल 179 वायरसों को अलग-अलग करके रखा गया. इन अलग-अलग रखे गए वायरसों में शोधकर्ताओं को एच1 एन1 के जी4 के सबूत मिले हैं. ये ऐसे प्रमाण हैं जो महामारी फैलाने वाले वायरसों में पाया जाता है. इससे संबंधित और भी कई सारे अलग-अलग प्रयोग किए गए. यहां तक की नेवलों पर भी यह रिसर्च किया गया.

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नए फ्लू पर विशेष निगरानी की चेतावनी –

इंफ्लुएंजा की नई नस्ल उन खतरनाक बीमारियों में शामिल है जिस पर विशेषज्ञों की पैनी नजर है. साल 2009 में पूरे विश्व में फ्लू महामारी का आतंक फैला था. जिसे स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है. इस बीमारी की शुरुआत मैक्सिको से हुई थी लेकिन यह उतना घातक नहीं था.

अब चीन में जिस फ्लू वायरस का पता चला है वह वर्ष 2009 में फैले स्वाइन फ्लू जैसा है लेकिन इसमें कुछ किस्म के परिवर्तन भी देखा गए हैं. शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि वैसे तो इस वायरस से खतरा ना के बराबर है बेवजूद इसके इस बीमारी पर नजर रखना जरूरी है.

इस नए वायरस G4 EA H1N1 में अपनी कोशिकाओं को कई गुणा बढ़ाने की क्षमता है. फ्लू के इलाज के लिए उपलब्ध वैक्सीन से इस वायरस का इलाज असंभव है. ब्रिटेन की नौटिंघम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किन चो चांग का कहना है कि अभी कोरोना महामारी से घिरे होने के बावजूद इस संभावित खतरनाक वायरस पर भी निगरानी रखी जा रही है. ताकि समय रहते इसके खिलाफ पर्याप्त कदम उठाए जा सकें.

वैज्ञानिकों का सुझाव है कि इस वायरस को रोकने के लिए सुअरों के अंदर ही किसी तरह की कार्रवाई करना ठीक रहेगा. साथ ही बूचरखानों में काम करने वाले लोगों को इसके प्रति ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.

सूअर फार्म में संक्रमणG4 swine flu virus in hindi

सुअरो पर किए गए टेस्ट में शोधकर्ताओं को पता चला कि जी4 बहुत ही संक्रामक वायरस है, जो इंसानी कोशिकाओं में बड़ी तेजी से फैलता है. जबकि अन्य वायरसों की तुलना में नेवलों में इसके अधिक लक्षण पाए गए हैं. यह भी जानकारी मिली है कि सूअर फार्मों में काम करने वाले लोगों के रक्त में इस वायरस का खतरा बहुत अधिक है. आशंका है कि करीब 4.4 फीसद आबादी इन वायरसों के संपर्क में हो सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अभी वे इस अध्ययन को अच्छी तरह पढ़ेंगे. हालांकि इंफ्लुएंजा के प्रति हम सभी को पूरी तरह सावधानी बरतना होगा.

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