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Hariyali Teej in Hindi: हरियाली तीज व्रत शुभ मुहूर्त, महत्व व पौराणिक कथा

मान्यता है कि हरियाली तीज के दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने एवं व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का वर मिलता है. (Hariyali Teej in Hindi)

सावन के पवित्र महीने में तीज का त्योहार (Hariyali Teej in Hindi) बहुत ही शुभ माना जाता है. इस वर्ष यह त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा. यह त्योहार प्रतिवर्ष सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतिया को मनाया जाता है. हरियाली तीज के दिन सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए भगवान शिव शंकर और माता पार्वती की पूजा करती हैं.

Hariyali Teej in Hindi

हरियाली तीज का महत्व Hariyali Teej in Hindi

हरियाली तीज का व्रत करवा चौथ व्रत से भी ज्यादा मुश्किल होता है. हरियाली तीज में पत्नियां अपने पति की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं. हिंदू धर्म के अनुसार ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने एवं व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का वर मिलता है. साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. इसमें पति के निरोग रहने का भी आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है.

अब जानते हैं पूजन सामग्री, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

हरियाली तीज की पूजन सामग्री

  • बेल पत्र
  • केले के पत्ते
  • अंकव पेड़ के पत्ते
  • तुलसी
  • जनेऊ
  • शमी के पत्ते
  • धतूरा
  • काले रंग की गीली मिट्टी
  • धागा और नए वस्त्र

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पार्वती जी के श्रृंगार की जरूरी सामग्री – Hariyali Teej in Hindi

चूडियां,  सिंदूर, कुमकुम, महौर, खोल, बिछुआ, मेहंदी, सुहाग चूड़ा, कंघी, सुहागिन के श्रृंगार की चीजें. इसके अलावा श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, तेल, घी, कपूर, दही, चीनी, शहद ,दूध और पंचामृत आदि.

हरियाली तीज पूजन विधि

  • तीज (Hariyali Teej in Hindi) के दिन महिलाएं सुबह से लेकर रात तक व्रत रखती हैं. इस व्रत में रात भर पूजन किया जाता है.
  • इस पावन अवसर पर बालू के भगवान शिव शंकर व माता पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजन करने की परंपरा है.
  • एक चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, रिद्धि-सिद्धि समेत गणेश, पार्वती एवं उनकी सहेली की भी प्रतिमा बनाई जाती है.
  • प्रतिमा बनाते समय भगवान का स्मरण करते हुए पूजा किया जाता है.
  • पूजा के बाद महिलाएं पूरी रात भजन-कीर्तन करती हैं.
  • हर प्रहर में इनकी पूजा करते हुए बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण करके आरती भी करनी चाहिए.

माता पार्वती की पूजा करने के दौरान इन मंत्रों को बोलना चाहिए.

ॐ उमायै नम:

ॐ पार्वत्यै नम:

ॐ जगद्धात्र्यै नम:

ॐ जगत्प्रतिष्ठायै नम:

ॐ शांतिरूपिण्यै नम:

ॐ शिवायै नम:

भगवान शिव की आराधना इन मंत्रों से करनी चाहिए

ॐ हराय नम:

ॐ महेश्वराय नम:

ॐ शंभवे नम:

ॐ शूलपाणये नम:

ॐ पिनाकवृषे नम:

ॐ शिवाय नम:

ॐ पशुपतये नम:

ॐ महादेवाय नम:

हरियाली तीज पूजन शुभ मुहूर्त

हरियाली तीज व्रत की तारीख- 11 अगस्त 2021 (बुधवार)

राहुकाल- बुधवार- दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक। (राहुकाल में पूजा नहीं करनी चाहिए)

सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि मंगलवार, 10 अगस्त को शाम 06.11 मिनट से शुरू होगी और 11 अगस्त 2021 (बुधवार) को शाम 04.56 मिनट पर समाप्त होगी.

अमृत काल- सुबह 01:52 से 03:26 तक

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:29 से17 तक

विजय मुहूर्त- दोपहर 14 से 03.07 तक

गोधूलि बेला- शाम 23 से 06.47 तक

निशिता काल- रात 14 से 12 अगस्त सुबह 12:25 तक

रवि योग- 12 अगस्त सुबह 09:32 से 05:30 तक.

हरियाली तीज व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज उत्सव (Hariyali Teej in Hindi) को भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. इस कठोर तपस्या के बाद ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था.

कथा है कि माता गौरी ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया था. मां पार्वती बचपन से ही शिव को वर के रूप में पाना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने कठोर तप किया था. इसके बाद एक दिन नारद जी हिमालय जी के यहां पहुंचे और उनसे कहा कि पार्वती के तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनसे विवाह करना चाहते हैं. यह सुनकर हिमालय बहुत प्रसन्न हुए. वहीं दूसरी ओर नारद मुनि विष्णुजी के पास पहुंचे और उनसे कहा कि हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती का विवाह आपसे कराने का निश्चय किया है. इस पर विष्णुजी ने भी अपनी सहमति दे दी.

व्रत कथा

इसके बाद नारद मुनि माता पार्वती के पास पहुंच गए और बताया कि पिता हिमालय ने उनका विवाह विष्णु से तय कर दिया है. यह सुनकर माता पार्वती बहुत निराश हुईं और पिता से नजरें बचाकर सखियों के साथ एक एकांत स्थान पर चली गईं और सुनसान जंगल में पहुंचकर पार्वती जी ने एक बार फिर तप शुरू किया. उन्होंने पहले रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और उपवास रखते हुए पूजन शुरू किया. इस तप से भगवान शिव प्रसन्न हुए और मनोकामना पूरी करने का वचन दिया. इसी बीच माता पार्वती के पिता पर्वतराज हिमालय भी वहां पहुंचे. सत्य बात जानकर वे माता पार्वती की शादी भगवान शिव से कराने के लिए राजी हो गए.

इस कथा में शिव बताते हैं कि बाद में विधि-विधान के साथ उनका पार्वती के साथ विवाह संपन्न हुआ. शिव कहते हैं, ‘हे पार्वती! तुमने जो कठोर व्रत किया था उसी के फलस्वरूप हमारा विवाह संभव हो सका. इसलिए इस व्रत को निष्ठा से करने वाली स्त्री को मैं मनोवांछित फल देता हूं.’

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