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Helicopter parents in hindi: क्या आप भी हैं हेलीकॉप्टर पैरेंट्स?

बच्चे पर ध्यान देना अच्छा है लेकिन जरूरत से ज्यादा इन्वॉल्वमेंट उसके बेहिवियरल डेवलपमेंट के लिए खतरनाक है. (Helicopter parents in hindi)

क्या आपको काजोल की फिल्म हेलीकॉप्टर इला (Helicopter parents in hindi) याद है, जो साल 2018 में आई थी? इस फिल्म में काजोल ने इला का किरदार निभाया था. अपने बच्चे पर हमेशा नजर रख सकें इसके लिए इला कॉलेज में दाखिला ले लेती हैं. इस तरह के माता-पिता आपको असल जिंदगी में भी मिल जाएंगे. बहुत सारे अभिभावक अपने बच्चे को लेकर कुछ ज्यादा की प्रैक्टिकल होते हैं. बच्चे की हर छोटी-छोटी चीज का डिसीजन वे खुद लेते हैं. इन्ही को हेलीकॉप्टर पैरेंट्स कहा जाता है. आगे जानते हैं हेलीकॉप्टर पैरेंट्स के फायदे और नुकसान क्या हैं?

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हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग क्या है? Helicopter parents in hindi

इस टर्म को पहली बार 1969 में छपी एक बुक ‘पेरेंट्स एंड टीनएजर्स’ में इस्तेमाल किया गया था. इसमें टीनएजर्स ने कहा था कि उनके माता-पिता उनके इर्द-गिर्द हेलीकॉप्टर की तरह मंडराते रहते हैं. इसके बाद ही यह शब्द इतना फेमस हुआ कि साल 2011 में इसे डिक्शनरी में भी शामिल कर लिया गया.

हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग (Helicopter parents in hindi) यानी ऐसे माता-पिता जिनका पूरा ध्यान हमेशा अपने बच्चे पर ही लगा रहता है. बच्चे पर ध्यान देना तो अच्छी बात है लेकिन जरूरत से ज्यादा इन्वॉल्वमेंट बच्चे के बेहिवियरल डेवलपमेंट के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है. इस तरह की पेरेंटिंग स्टाइल को अन्य नामों से भी जाना जाता है. जैसे लॉनमोवर पेरेंटिंग, कोसेटिंग पेरेंट या बुलडोज पेरेंटिंग.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? Helicopter parents in hindi

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह ऐसी पेरेंटिंग स्टाइल है जिसमें ओवर प्रोटेक्टिव माता-पिता अपने बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान रखते हैं. ऐसे पेरेंट्स अपने बच्चों के अनुभवों, विशेष कर उनकी सफलताओं या असफलताओं के लिए बहुत अधिक जिम्मेदारी लेते हैं.

कारण

बच्चे के भविष्य को लेकर डर

कई माता-पिता मानते हैं कि उनका बच्चा आज जो कुछ भी कर रहा है, उसका उनके भविष्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है. क्लास में बच्चे को कम अंक मिलना, खेल टीम में सेलेक्शन न होना या अच्छे कॉलेज में एडमिशन न होने जैसे डर के कारण माता-पिता हेलीकॉप्टर पेरेंट्स (Helicopter parents in hindi) बन जाते हैं. उन्हें लगता है हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग के सहारे वे बच्चों की जिंदगी में आने वाले स्ट्रगल्स को रोक सकते हैं.

इसे भी पढ़ें: बच्चे के एडमिशन के दौरान माता-पिता से अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चिंता

कुछ माता-पिता अपने बच्चे को उदास देख कर काफी निराश हो जाते हैं और वे चिंता करने लगते हैं. ऐसा होने से रोकने के लिए पेरेंट्स हर संभव कोशिश करते हैं. हेलीकॉप्टर पेरेंट्स यह भूल जाते हैं कि उदास या दुःखी होना तो जीवन का एक हिस्सा है. ये बच्चे को भावनात्मक रूप से डेवलप और अधिक लचीला बनाने में भी मदद करते हैं.

दूसरे हेलीकॉप्टर पेरेंट्स का प्रभाव

एक माता-पिता जब दूसरे हेलीकॉप्टर पेरेंट्स को देखते हैं कि वे अपने बच्चे की लाइफ में कितना ज्यादा इन्वॉल्व हैं तो वे भी उनकी देखा-देखी हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग शुरू कर देते हैं. यह दबाव चाइल्डहुड और अडल्टहुड दोनों को ही प्रभावित करता है.

इस पेरेंटिंग के क्या हैं फायदे?

इसमें (Helicopter parents in hindi) में बच्चे ज्यादा प्यार और खुशी महसूस करते हैं. ऐसे बच्चों की जिंदगी में आगे बढ़ने के चांसेस ज्यादा होता हैं. माता-पिता और बच्चों की बीच बॉन्डिंग जैसी चीजें अधिक बढ़ती हैं. बावजूद इसके इस तरह की मॉडर्न पेरेंटिंग स्टाइल अभी भी एक कंट्रोवर्सियल मैटर ही है. कई अध्ययन में पता चला है कि पेरेंट्स की ज्यादा भागीदारी से बच्चों को असफलताओं और चुनौतियों से लड़ना कठिन हो जाता है.

हेलीकॉप्टर पेरेंट्स होने के नुकसान? Helicopter parents in hindi

1. हर माता-पिता को बच्चे की चिंता तो होती है लेकिन उनकी जिंदगी में बहुत ज्यादा घुल मिल जाने से हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग के नुकसान भी हो सकते हैं जो आपके बच्चों को ही झेलने पड़ सकते हैं. जैसे-

2. ओवर प्रोटेक्टिव पेरेंट्स का हर जगह हाजिर रहना बच्चे को अपने खुद से कुछ भी करने के लिए उनमें कॉन्फिडेंस को कम कर सकता है. उनमें किसी भी चीज के बारे में निर्णय लेने का आत्मविश्वास कम हो जाता है.

3. ऐसे माता-पिता हर वक्त बच्चे की हिफाजत के लिए मौजूद रहते हैं और उन्हें किसी तरह की परेशानियों में पड़ने ही नहीं देते हैं. ऐसे में बच्चा जिंदगी में किसी भी नेगेटिव चीज से कुछ भी नहीं सीखता है. शोध की मानें तो ऐसे बच्चे जीवन की परेशानियों और कठिन हालातों से मुकाबला करने में कम सक्षम होते हैं.

4. हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग से बच्चों में घबराहट बढ़ती है क्योंकि उन्हें हर वक्त डायरेक्शन की जरूरत पड़ती है. उन्हें जब भी कोई भी निर्णय अकेले लेने को कहा जाता है तो वे घबराते हैं।

5. यदि बच्चों के छोटे-छोटे काम आप करते हैं जैसे लंच पैक करना, अपने रूम की साफ-सफाई आदि, तो वे अपने काम को मैनेज करना नहीं सीख पाते हैं. ऐसे में जब वे बाहर रहने जाते हैं तो उन्हें कठिनाई होती है.

कैसे बंद करें हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग? Helicopter parents in hindi

  • अपने बच्चों के आगे-पीछे मंडराना बंद करें.
  • अपनी चिंताओं से बच्चों को दूर रखें.
  • बच्चे को किसी तरह का लेबल मत करें जैसे तुम बहुत फनी हो या तुम बहुत बदमाश हो आदि.
  • आपका बच्चा अगर अपने लिए कुछ अलग चुनता है तो परेशान मत हों.
  • आप अपने बच्चों को बहुत ज्यादा अटेंशन देना बंद करें.
  • पैरेंट्स का बच्चों के लिए फिक्रमंद होना अच्छा है लेकिन बच्चों को कुछ डिसीजन खुद लेने के लिए भी कहें.
  • यह सही है कि उनके दोस्तों के बारे में जानकारी रखना समय की जरूरत है लेकिन हर बात में इतनी दखलअंदाजी भी सही नहीं है.
  • उनकी समस्या समाधान में सिर्फ उनकी मदद करें न की खुद ही प्रॉब्लम्स सुलझाने लगें.
  • सीधे तौर पर कहा जाए तो बच्चे की बेहतर लाइफ और इमोशनल डेवलपमेंट के लिए उनको प्यार और केयर देने के साथ ही उन्हें कुछ फ्रीडम देना भी जरूरी है.

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