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क्या आपके जोड़ों में भी है दर्द की समस्या?

Joint Pain in Hindi: उम्र बढ़ने के बाद लोगों में गठिया (आर्थराइटिस) एक आम बीमारी है.

Joint Pain in Hindi: उम्र बढ़ने के बाद लोगों में गठिया (आर्थराइटिस) एक आम बीमारी है. आर्थराइटिस के बहुत सारे प्रकार हैं. अब तक कम से कम 100 किस्म की आर्थराइटिस (Joint pain treatment) की पहचान की गई है. इसमें जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न की समस्या रहती है. पैड़ों को हिलाने व मोड़ने में भी परेशानी होती है. यह ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए तो वह पूरी उम्र ही सताती है. इसमें असहनीय दर्द तो होता ही है यह लोगों की जीवनशैली को भी प्रभावित करता है.

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इस बीमारी (Joint pain treatment) की भी देखभाल जरूरी है पर लोग इसके प्रति लापरवाही बरतते हैं. हालांकि सही इलाज हो तो इस बीमारी को ठीक भी किया जा सकता है. गठिया का इलाज शुरू होने के बाद इसे ठीक होने में थोड़ा ज्यादा वक्त लगता है. पर हां ध्यान रखें कि उपचार में कोई कोताही नहीं बरतें बल्कि इसकी दवाइयां नियमित रूप से लेते रहें.

उम्र के साथ-साथ जोड़ों का घिसना सामान्य बात है. यह घिसाव कई कारणों से होते हैं. मुख्य रूप से 55 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में यह समस्या देखी जाती है. इसका कारण मोटापा. कसरत नहीं करना, आधुनिक जीवनशैली आदि के कारण आजकल ज्यादा लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं. जोड़ों की यह बीमारी इतनी घातक है कि यह हृदय, किडनी, फेफड़ों के साथ रक्त नलिकाओं को भी प्रभावित करती है.

घरेलू उपचार – Joint pain treatment

1. गठिया (Joint pain treatment) के उपचार में डॉक्टरी दवाओं के साथ-साथ घरेलू उपचार भी शामिल है. इससे भी मरीज को राहत मिलती है. जैसे –

2. रोजाना सुबह नाश्ता करने से पहले आधा चम्मच मेथी पाउडर को गर्म पानी में डाल कर पी लें.

3. दिन में 2 बार रोजाना छोटी चम्मच हल्दी का सेवन करें.

4. सोने से पहले रात को अदरक की चाय के साथ अरंडी का तेल भी सेवन करें.


प्रकार – Types of Joint Pain in Hindi

1. गाउट

इस आर्थराइटिस (Joint pain treatment) में शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है. यह जोड़ों के कॉर्टिलेज को नुकसान पहुंचाता है. यूरिक एसिड मांसपेशियों व नसों में इकट्ठा होकर जोड़ों को जाम कर देता है. धीरे-धीरे यही समस्या आर्थराइटिस का रूप ले लेती है.

2. जुवेलाइन आर्थराइटिस –

जुवेलाइन आर्थराइटिस हर एक हजार में से तीन बच्चे को अपना शिकार बनाता है.

3. एंकलोजिंग आर्थराइटिस – Joint pain treatment

एंकलोजिंग आर्थराइटिस युवावस्था में होती है. यह भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है.

4. रूमेटाइट आर्थराइटिस –

ज्यादातर लोग रूमेटाइट आर्थराइटिस के शिकार होते हैं. रूमेटाइट आर्थराइटिस घुटने के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है. 25-35 वर्ष के लोग ही इसके अधिक शिकार होते हैं. रियुमेटाइट आर्थराइटिस किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है.

5. ऑस्टियो आर्थराइटिस –

यह मुख्य रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को ही अपना शिकार बनाता है. यह आर्थराइटिस सबसे ज्यादा घुटनों के जोड़ को प्रभावित करता है.

6. सोराइटिक आर्थराइटिस –

सोराइसिस आर्थराइटिस सही वक्त पर सही इलाज ना हो तो यह घातक साबित हो सकती है.

7. एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस –

यह बीमारी साधारणतः शरीर के पीठ व शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में होती है. इसमें हल्के लेकिन लगातार दर्द की शिकायत रहती है. इसका उपचार संभव है.

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8. ओस्टियोसोराइसिस –

यह बीमारी अनुवांशिक हो सकता है. यह समस्या मुख्य रूप से पीठ, कमर, घुटना व पांव में होती है.

9. पोलिमायलगिया रूमेटिका –

यह समस्या अधिकतर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होती है. इसमें कमर, कंधा व गले में तेज दर्द की शिकायत होती है. समय रहते अगर इसकी चिकित्सा शुरू की जाए तो इसका इलाज संभव है.

10. सिडडोगाउट – Joint pain treatment

इसमें जोड़ों में दर्द कैल्शियम पाइरोफासफेट या हाइड्रोपेटाइट क्रिस्टल के जोड़ों में इकट्ठा होने से होता है.

बचाव व उपचार – Joint Pain in Hindi

आर्थराइटिस (Joint pain treatment) समय के साथ-साथ अधिक तकलीफदेह हो जाती है. इसलिए जैसे ही इसके लक्षण पता चले तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. सही वक्त पर अगर इसका इलाज शुरू कर दिया जाए तो यह बीमारी ठीक हो जाती है.

अन्यथा बाद में यह लाइलाज हो जाती है और जीवन भर इस दर्द को झेलना पड़ता है. हालांकि दवा के साथ व्यायाम व योग से भी इसको काफी लाभ मिलता है. इससे बचाव के लिए नियमित व्यायाम करना चाहिए. साथ ही खान-पान व रहन-सहन पर भी विशेष ध्यान देने का जरूरत होती है. ‘योदादी’ के साथ अपने अनुभव को कमेंट कर जरूर शेयर करें. #Arthritis

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